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मतदाताओं ने दी धनबल व जातिवाद पर करारी चोट

Sun, 03 Dec 2017 01:38 AM IST
Updated Sun, 03 Dec 2017 01:38 AM IST
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मतदाताओं ने दी धनबल व जातिवाद पर करारी चोट
मतदाताओं ने दी धनबल व जातिवाद पर करारी चोट
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ललितपुर। नगर पालिका परिषद अध्यक्ष पद के चुुनाव में धनबल, जातिवाद को नकार दिया गया। जो प्रत्याशी स्वजातीय वोट को अपनी पूंजी मानकर जीत का दंभ रहे थे, वह जिताऊ मत पाने के लिए तरस गए।
नगर पालिका परिषद अध्यक्ष का पद महिला के लिए आरक्षित किया गया तो कइयों की बांछे खिल गई। अधिकतर नेताओं ने अपनी पत्नियों को चुनाव मैदान में उतार दिया। कोई राजनीतिक दल के बैनरतले तो किसी ने निर्दलीय के रूप में ताल ठोकी। किसी को कुशवाहा तो किसी को ब्राह्मण, जैन, मुस्लिम समाज का वोट मिलने का भरोसा था। लगभग सभी ने स्वाजातीय मतदाताओं को लामबंद करने की कोशिश की। यही नहीं, स्वजातीय वोटरों को वोट बैंक के रूप में दिखाकर अन्य जातियों का वोट पाने का भरसक प्रयास किया। इस दौरान उम्मीदवारों ने मतदाताओं को लुभाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी। सोशल मीडिया से लेकर आधुनिक तकनीकों का सहारा लिया गया। मतदान के पश्चात विभिन्न समाजों के वोटों को लेकर अनिश्चितता वातावरण बना रहा। हर कोई अपने साथ होने का दावा करता रहा। लेकिन, जब मतपेटियां खुली तो जातिवाद व धनबल का दंभ वाले उम्मीदवार चुनाव में चित हो गए। भाजपा उम्मीदवार रजनी साहू ने पार्टी के परंपरागत वोट को लेकर जीत दर्ज की। इसमें मुहल्ला नेहरूनगर का वोट उनके लिए जीत का आधार बना। यहां से रजनी को अन्य उम्मीदवारों के मुकाबले सबसे ज्यादा वोट प्राप्त हुए।
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ये नहीं चले दांव
कुछ उम्मीदवारों ने मांस, मदिरा और पैसे से वोटरों को खरीदने की कोशिश की लेकिन उनका यह दांव काम नहीं आया। जिससे ऐसे उम्मीदवारों के मंसूबे ध्वस्त हो गए।
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भितरघात से जीत बदली हार में
निर्दलीय उम्मीदवार कमला देवी की कुशवाहा बिरादरी से होने के कारण चुनाव में सबसे मजबूत उम्मीदवारी मानी जा रही थी। इस समाज का शहर में 12 हजार के आसपास वोट है। इसके अलावा उनके पति रमेश कुशवाहा सदर विधायक रह चुके हैं, जिसका फायदा उन्हें मिलने की उम्मीद जताई जा रही थी। लेकिन, भितरघात ने उनकी जीत को हार में बदल दिया। सपा उम्मीदवार संध्या सुड़ेले ब्राह्मण, मुस्लिम व यादव वोट बैंक के सहारे जीत की ओर अग्रसर थी। ऐन वक्त पर ब्राह्मणों का अधिकांश वोट भाजपा की तरफ मुड़ गया तो मुस्लिम का कुछ वोट कडंकी व कमला को मिल गया। जिससे वह पहले की जगह तीसरे पर पहुंच गई।
कड़ंकी ने बिगाड़ा साइकिल व पहिया का खेल
निर्दलीय उम्मीदवार वंदना जैन कड़ंकी ने दूसरे नंबर पर उपस्थिति दर्ज कराकर राजनीतिक पंडितों के विश्लेषण को फेल कर दिया है। कड़ंकी ने न केवल संध्या सुड़ेले बल्कि कमला देवी के वोट बैंक में सेंधमारी कर दी। इससे संध्या तीसरे तो कमला चौथे नंबर पर पहुंच गई। माना जा रहा है कि कडंकी अपने जैन वोट के साथ कुशवाहा व मुस्लिमों का अच्छा खासा वोट हथियाने में कामयाब हुए हैं।

राजनैतिक दलों पर भारी पड़े निर्दलीय
निर्दलीय उम्मीदवार वंदना जैन कड़ंकी ने 13591 वोट लेकर दूसरे स्थान पर जगह बना ली। इसका परिणाम यह हुआ कि सपा की संध्या तीसरे नंबर पर, बसपा की आशा पांचवें नंबर पर, कांग्रेस की यशोधरा राजे छठवें नंबर पर रही तो आम आदमी का प्रदर्शन बेहद खराब रहा। आप उम्मीदवार रेखा पटैरिया महज 1312 वोट पाकर आठवें नंबर पर रही।
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