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1512 मजदूरों को भेजा गया एमटी कोच से गोरखपुर
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ललितपुर। मंगलवार को जिले की सीमा झांसी- सागर हाइवे अमझरा घाटी पर विभिन्न राज्यों से आए मजदूरों को विशिष्ट गल्ला मंडी अमरपुर मंडी में डेढ़ हजार मजदूरों को स्क्रीनिंग कर गोरखपुर के लिए रात्रि नौ बजे एमटी कोच स्पेशल ट्रेन से भेजा गया।
वैश्विक बीमारी नोवल कोरोना वायरस संक्रमण को रोकनेे के लिए लॉकडाउन से मजदूर बेरोजगार हो गए हैं। प्रथम चरण के लॉकडाउन में लोगों केे उम्मीद रही कि अब लॉकडाउन खुल जाएगा। दूसरा चरण लागू होते ही कुछ मजदूर अपने घरों की ओर चलने को मजबूर हो गए। तीसरे चरण तक फैक्ट्री व अन्य उद्योग चालू होने का इंतजार किया। ऐसे में मजदूरी कर बचाए गए पैसे भी खर्च हो गए। लेकिन, खुलने की उम्मीद खत्म होने पर अब घरों की ओर रुख कर लिया है।
लॉकडाउन को लागू हुए लगभग 56 दिन बीतने के बाद भी बाहर से आने वाले लोगों केे सिलसिला थमा नहीं है। बाहर से आ रहे प्रवासी मजदूर प्रतिदिन हजारों की संख्या में जिले की सीमा से प्रवेश कर रहे हैं। हालांकि, जिला प्रशासन द्वारा शासन के निर्देश पर सीमा पर ही रोक कर स्क्रीनिंग कराई जा रही है। जहां से बसों के माध्यम से गृह जनपद भेजा जा रहा है।
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सोमवार और मंगलवार को महाराष्ट्र व गुजरात से आए डेढ़ हजार मजदूरों को ललितुपर से गृह जनपद भेजने के लिए एक ट्रेन चलाई गई। स्टेशन पहुंचाने से पहले प्रवासियों को सीमा से विशिष्ट गल्ला मंडी अमरपुर में लाया गया। जहां पर खाना खिलाया गया। सभी की स्क्रीनिंग कराई गई। स्क्रीनिंग के बाद 1,512 बाहर से आए प्रवासी मजदूरों के लिए एमटी कोच स्पेशल ट्रेन से गोरखपुर के लिए रवाना किया गया। ट्रेन का गोरखपुर के अलावा गोंडा व बस्ती में स्टापेज रहेगा। इनमें सबसे अधिक मजदूर गोरखपुर व बिहार के हैं।
बाहर से आए प्रवासी मजदूरों को अमझरा घाट सीमा से अमरपुर में स्क्रीनिंग कराई गई। जहां से नौ बजे एमटी कोच ट्रेन से 1512 मजदूरों को गोरखपुर के लिए रवाना किया गया। इस दौरान यह ट्रेन गोंडा व बस्ती में भी रुकेगी।
- अनिल कुमार मिश्र
अपर जिलाधिकारी
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लॉकडाउन से बेरोजगार मजदूरों के सामने आर्थिक संकट तो खड़ा ही है, इससे अधिक परेशानी अपने घर तक पहुंचने में हो रही है। प्रशासन द्वारा जहां भी वाहन उपलब्ध कराया जा रहा है, उसी में सफर कर घर पहुंचने की जल्दबाजी है। मंगलवार को अमरपुर मंडी में ठहराए गए मजदूर ट्रेन के आने से पहले ही अपने आप की जल्दबाजी में तैैयारी कर रहे हैं। वाहनों की कमी के चलते जिस स्थिति में थे, वैसे ही अपने घरों की ओर चल दिए, लेकिन मंडी में ट्रेन शाम को होने के चलते चबूतरे पर ही बैठकर दाढ़ी बनाई।
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प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचना काफी कठिन नजर आ रहा है। कइयों के तो छोटे बच्चे भी साथ में हैं। जैसे ही राज्य सरकारों के द्वारा मजदूरों को भेजने की बात आई तो मौके को गंवाना नहीं चाहते थे। इसलिए साथ में कुछ सामान को लेकर निकल पड़े। पैदल चलकर परेशान हो गए। इस दौरान रास्ते में जंगलों व परिस्थतियों के अनुसार चलने व बैठने में कइयों के कपड़े फट गए। मंगलवार को मंडी में मजदूर स्टेशन से पहुंचने से पहले अपने कपड़ो को सिलते नजर आए।
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वैश्विक बीमारी नोवल कोरोना वायरस संक्रमण को रोकनेे के लिए लॉकडाउन से मजदूर बेरोजगार हो गए हैं। प्रथम चरण के लॉकडाउन में लोगों केे उम्मीद रही कि अब लॉकडाउन खुल जाएगा। दूसरा चरण लागू होते ही कुछ मजदूर अपने घरों की ओर चलने को मजबूर हो गए। तीसरे चरण तक फैक्ट्री व अन्य उद्योग चालू होने का इंतजार किया। ऐसे में मजदूरी कर बचाए गए पैसे भी खर्च हो गए। लेकिन, खुलने की उम्मीद खत्म होने पर अब घरों की ओर रुख कर लिया है।
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लॉकडाउन को लागू हुए लगभग 56 दिन बीतने के बाद भी बाहर से आने वाले लोगों केे सिलसिला थमा नहीं है। बाहर से आ रहे प्रवासी मजदूर प्रतिदिन हजारों की संख्या में जिले की सीमा से प्रवेश कर रहे हैं। हालांकि, जिला प्रशासन द्वारा शासन के निर्देश पर सीमा पर ही रोक कर स्क्रीनिंग कराई जा रही है। जहां से बसों के माध्यम से गृह जनपद भेजा जा रहा है।
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सोमवार और मंगलवार को महाराष्ट्र व गुजरात से आए डेढ़ हजार मजदूरों को ललितुपर से गृह जनपद भेजने के लिए एक ट्रेन चलाई गई। स्टेशन पहुंचाने से पहले प्रवासियों को सीमा से विशिष्ट गल्ला मंडी अमरपुर में लाया गया। जहां पर खाना खिलाया गया। सभी की स्क्रीनिंग कराई गई। स्क्रीनिंग के बाद 1,512 बाहर से आए प्रवासी मजदूरों के लिए एमटी कोच स्पेशल ट्रेन से गोरखपुर के लिए रवाना किया गया। ट्रेन का गोरखपुर के अलावा गोंडा व बस्ती में स्टापेज रहेगा। इनमें सबसे अधिक मजदूर गोरखपुर व बिहार के हैं।
बाहर से आए प्रवासी मजदूरों को अमझरा घाट सीमा से अमरपुर में स्क्रीनिंग कराई गई। जहां से नौ बजे एमटी कोच ट्रेन से 1512 मजदूरों को गोरखपुर के लिए रवाना किया गया। इस दौरान यह ट्रेन गोंडा व बस्ती में भी रुकेगी।
- अनिल कुमार मिश्र
अपर जिलाधिकारी
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लॉकडाउन से बेरोजगार मजदूरों के सामने आर्थिक संकट तो खड़ा ही है, इससे अधिक परेशानी अपने घर तक पहुंचने में हो रही है। प्रशासन द्वारा जहां भी वाहन उपलब्ध कराया जा रहा है, उसी में सफर कर घर पहुंचने की जल्दबाजी है। मंगलवार को अमरपुर मंडी में ठहराए गए मजदूर ट्रेन के आने से पहले ही अपने आप की जल्दबाजी में तैैयारी कर रहे हैं। वाहनों की कमी के चलते जिस स्थिति में थे, वैसे ही अपने घरों की ओर चल दिए, लेकिन मंडी में ट्रेन शाम को होने के चलते चबूतरे पर ही बैठकर दाढ़ी बनाई।
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प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचना काफी कठिन नजर आ रहा है। कइयों के तो छोटे बच्चे भी साथ में हैं। जैसे ही राज्य सरकारों के द्वारा मजदूरों को भेजने की बात आई तो मौके को गंवाना नहीं चाहते थे। इसलिए साथ में कुछ सामान को लेकर निकल पड़े। पैदल चलकर परेशान हो गए। इस दौरान रास्ते में जंगलों व परिस्थतियों के अनुसार चलने व बैठने में कइयों के कपड़े फट गए। मंगलवार को मंडी में मजदूर स्टेशन से पहुंचने से पहले अपने कपड़ो को सिलते नजर आए।

अमरपुर गल्ला मंडी में रूके बाहर से मजदूर- फोटो : LALITPUR