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Lalitpur News: मियांवाकी पद्धति से रोपे गए 1.49 लाख पौधे

Wed, 08 Jan 2025 12:27 AM IST
Jhansi Bureau झांसी ब्यूरो
Updated Wed, 08 Jan 2025 12:27 AM IST
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1.49 lakh saplings planted using Miyanwaki method
संवाद न्यूज एजेंसी
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ललितपुर। जनपद की भौगोलिक स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी अक्षय त्रिपाठी ने मियांवाकी पद्धति से सघन पौधरोपण कराया। जनपद में 20 स्थलों का चयन किया गया। जिनमें 13 स्थानों पर कार्य पूरा हो चुका है। यहां पर 1,49,050 पौधे लगाए गए हैं।
जिलाधिकारी ने बताया कि जिले में विशाल पठारी एवं पथरीली भूमि होने के कारण न्यूनतम स्थान में अधिक से अधिक वृक्ष लगाने के लिए मियांवाकी पद्धति से सघन पौधरोपण कार्य किया गया है। पद्धति मूलरूप से जापानी है, जिससे कराया गया पौधरोपण परंपरागत रूप से लगाए गए जंगलों की तुलना में 30 गुना अधिक घने होते हैं तथा 2-3 वर्षों में ही आत्मनिर्भर बनकर 10 गुना तेजी से बढ़ सकते हैं। मियांवाकी पौधरोपण विधि का उद्देश्य रणनीतिक रूप से स्वदेशी पेड़ों को लगाकर छोटे क्षेत्रों में घनाहरित आवरण स्थापित करना है। उन्होंने बताया कि देशी पेड़ों का घना हरा आवरण उस क्षेत्र के धूल कणों को अवशोषित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जहां उद्यान स्थापित किया गया है। पौधे सतह के तापमान को नियंत्रित करने में भी मदद करते हैं।
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नगर क्षेत्र स्थित औद्योगिक आस्थान चंदेरा में मियांवाकी पद्धति से पार्कों के सौंदर्यीकरण एवं पाैधरोपण का कार्य किया जा रहा है, यहां पर 8 बेड बनाए गए हैं, प्रत्येक बेड में 500 पौधे लगाए जा रहे हैं, इस प्रकार कुल 4 हजार पौधे मियावाकी पद्धति से लगाए जा रहे हैं।
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विकासखंड बिरधा की ग्राम पंचायत कल्यानपुरा में मियावाकी पद्धति से 25 एकड़ भूमि पर पौधरोपण कार्य कराया जा रहा है, इसके लिए 13 बेड तैयार कर 39000 पौधे लगाए जाने की योजना बनाई गई है। प्रस्तावित 13 बेड के सापेक्ष सभी बेड तैयार कर लिए गए हैं और 11 बेड में 32000 पौधों का रोपण भी किया जा चुका है। शेष पौधों का रोपण कार्य प्रगति पर है। पौधों की सिंचाई के लिए 03 सोलर पंप की स्थापना की गई है। पौधों की सुरक्षा के लिए 1130 मीटर तार फेंसिंग कार्य कराया गया है।

विकासखंड जखौरा की ग्राम पंचायत बादरोन में संचालित स्थायी गोवंश स्थल में कुल 1045 गोवंश संरक्षित हैं। उक्त व्यवस्था के सुचारू रूप से संचालन के लिए ग्राम पंचायत की भूमि पर लगभग 4.0 एकड़ में ग्राम पंचायत द्वारा भूमि सुधार कार्य कराते हुए हरा चारा (बरसीम) की बोआई की गई, जिसको एक बार बोने के उपरांत लगभग 5 बार तक कटाई की जा सकती है और उसमें गोवंश के लिए पोषक तत्व से पूर्ण हरा चारा उपलब्ध कराया गया।
अमरपुर मंडी परिसर में लगभग 3600 वर्ग मीटर की भूमि में मियावाकी पद्धति द्वारा लगभग 24 प्रजातियों के 13000 पौधों का रोपण किया गया।
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