{"_id":"597109624f1c1b69558b456c","slug":"141500580194-lalitpur-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"महापुराण के पठन, मनन से होती पुण्य की प्राप्ति...","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
महापुराण के पठन, मनन से होती पुण्य की प्राप्ति...
Updated Fri, 21 Jul 2017 01:19 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
महापुराण के पठन, मनन से होती पुण्य की प्राप्ति
ललितपुर।
श्री सिद्धपीठ चंडी मंदिर धाम पर चल रहे सवा पांच करोड़ पार्थिव शिवलिंग निर्माण आयोजन में बृहस्पतिवार को श्रद्धालुओं ने 15 लाख पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया। वैदिक ब्राह्मणों द्वारा श्रीरुद्रमहायज्ञ का पीठ पूजन किया गया।
श्री चंडीधाम मंदिर पर बृहस्पतिवार को पार्थिव शिवलिंग का पूजन व महा रुद्राभिषेक प्रधान यजमान सरदार बीके सिंह व सह यजमान मनोज गोस्वामी ने किया। श्रद्धालुओं को शिव की महिमा की कथा सुनाते हुए चंडी पीठाधीश्वर स्वामी चंद्रेश्वर गिरि महाराज ने कहा कि सभी देवों में निराले हैं भगवान शिव। उनकी महिमा अपार है। वे बहुत ज्यादा औपचारिकताओं में विश्वास नहीं रखते। ग्रंथों का ज्ञाता हो या निरक्षर, हर कोई उनकी कृपा प्राप्त कर सकता है। मनुष्य ही नहीं बल्कि देव, दानव और पशु-पक्षी तक उन्हें नमन करते हैं। उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। शिवपुराण में भगवान भोलेनाथ की कृपा से जुड़े अनेक अध्याय हैं। महादेव की महिमा का वर्णन इस महापुराण में हैं। इस ग्रंथ के पठन, मनन और जीवन में पालन करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। पार्थिव शिवलिंग की महिमा बताते हुए उन्होंने कहा कि सतयुग में स्वर्ण, द्वापरयुग में पारद, कलयुग में पार्थिव शिवलिंग का अधिक महत्व है। कलयुग में अमीर-गरीब सभी भक्त हो पार्थिव शिवलिंग बना कर भगवान शिव की आराधना कर सकता है। महादेव का पूजन कर लेने पर सभी प्रकार के दुखों का शमन हो जाता हैं। सभी प्रकार के सुख प्राप्त हो जाते हैं एवं इससे सभी मनोकामनाएं सिद्ध हो जाती हैं। भगवान शिव को जलधारा अत्यंत प्रिय हैं। जलधारा से अभिषेक का विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार अभिषेक कई प्रकार के बताए गए हैं। रुद्रमंत्रों द्वारा शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है, इसे ही रुद्राभिषेक कहा जाता है। इसके बाद मंदिर में भगवान शिव की महाआरती की गई एवं प्रसाद वितरण किया गया।
विज्ञापन
ललितपुर।
श्री सिद्धपीठ चंडी मंदिर धाम पर चल रहे सवा पांच करोड़ पार्थिव शिवलिंग निर्माण आयोजन में बृहस्पतिवार को श्रद्धालुओं ने 15 लाख पार्थिव शिवलिंग का निर्माण किया। वैदिक ब्राह्मणों द्वारा श्रीरुद्रमहायज्ञ का पीठ पूजन किया गया।
श्री चंडीधाम मंदिर पर बृहस्पतिवार को पार्थिव शिवलिंग का पूजन व महा रुद्राभिषेक प्रधान यजमान सरदार बीके सिंह व सह यजमान मनोज गोस्वामी ने किया। श्रद्धालुओं को शिव की महिमा की कथा सुनाते हुए चंडी पीठाधीश्वर स्वामी चंद्रेश्वर गिरि महाराज ने कहा कि सभी देवों में निराले हैं भगवान शिव। उनकी महिमा अपार है। वे बहुत ज्यादा औपचारिकताओं में विश्वास नहीं रखते। ग्रंथों का ज्ञाता हो या निरक्षर, हर कोई उनकी कृपा प्राप्त कर सकता है। मनुष्य ही नहीं बल्कि देव, दानव और पशु-पक्षी तक उन्हें नमन करते हैं। उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। शिवपुराण में भगवान भोलेनाथ की कृपा से जुड़े अनेक अध्याय हैं। महादेव की महिमा का वर्णन इस महापुराण में हैं। इस ग्रंथ के पठन, मनन और जीवन में पालन करने से पुण्य की प्राप्ति होती है। पार्थिव शिवलिंग की महिमा बताते हुए उन्होंने कहा कि सतयुग में स्वर्ण, द्वापरयुग में पारद, कलयुग में पार्थिव शिवलिंग का अधिक महत्व है। कलयुग में अमीर-गरीब सभी भक्त हो पार्थिव शिवलिंग बना कर भगवान शिव की आराधना कर सकता है। महादेव का पूजन कर लेने पर सभी प्रकार के दुखों का शमन हो जाता हैं। सभी प्रकार के सुख प्राप्त हो जाते हैं एवं इससे सभी मनोकामनाएं सिद्ध हो जाती हैं। भगवान शिव को जलधारा अत्यंत प्रिय हैं। जलधारा से अभिषेक का विशेष महत्व है। शास्त्रों के अनुसार अभिषेक कई प्रकार के बताए गए हैं। रुद्रमंत्रों द्वारा शिवलिंग का अभिषेक किया जाता है, इसे ही रुद्राभिषेक कहा जाता है। इसके बाद मंदिर में भगवान शिव की महाआरती की गई एवं प्रसाद वितरण किया गया।
विज्ञापन