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अब तक 1400 लोगों को बार्डर से भेजा गया
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डोंगराखुर्द। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश के बार्डर पर स्थित अमझरा घाटी से अब तक 1400 लोगों को भेजा जा चुका है। लेकिन, अभी भी आने वालों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है।
मध्यप्रदेश बार्डर पर स्थित होने के कारण अमझरा में बाहर से आने वालों का सिलसिला जारी है। कोई पैदल चलकर तो कोई ट्रकों के सहारे आ रहा है। सभी को अपने घर पहुंचने की जल्दी है। महाराष्ट्र, तेलंगाना, गुजरात समेत कई राज्यों में काम करने वाले मजदूरों का कोरोना वायरस के कारण काम बंद हो गया है। खाने पीने का कोई अन्य साधन नहीं होने के कारण यह अपने घर को वापस जा रहे हैं।
रास्ते में दुकानों पर जो मिल गया, वह खा लेते हैं और हैंडपंप पर पानी पी लेते हैं। यह मजदूर कहीं पैदल चलकर कहीं ट्र्रक के सहारे आ रहे हैं। मध्यप्रदेश का प्रमुख प्रवेश द्वारा होने के कारण बार्डर पर सबसे अधिक लोगों का आना- जाना हो रहा है। ट्रकों में आ रहे लोगों में सोशल डिस्टेंस का पालन नहीं हो पा रहा है, क्योंकि ट्रकों में ठूंस- ठूंस कर लोगों को भरकर लाया जा रहा है। यह मजदूर कोरोना कैरियर भी बन सकते हैं।
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अब तक अमझरा बार्डर पर चौदह सौ लोग अन्य प्रांतों से आ चुके हैं। इनको बार्डर से अन्य जिलों की सीमा में भेजा जा चुका है। लेकिन, इसके बाद भी आने वाले मजदूरों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। मजदूर भूखे पेट आ रहे हैं। यदि रास्ते में कहीं खाने - पीने को मिल गया तो ठीक, अन्यथा पैदल चलते जा रहे हैं। अमझरा बार्डर पर नाराहट व्यापार मंडल की ओर से आने वाले मजदूरों के खाना पीना का इंतजाम किया जा रहा है। ग्राम प्रधान नाराहट डा. दिलीप कुमार सोनी की ओर से पानी का टैंकर नियमित पहुंचाया जा रहा है। इसी पानी से आने वाले मजदूर अपनी प्यास बुझा रहे हैं।
अभी तक चौदह सौ लोगों को सरकारी बसों के माध्यम से मजदूरों के गृह जनपदों में भिजवाया गया है। बीती रात चार सौ लोग अमझरा में थे, जिन्हें बसों के माध्यम से भिजवा दिया गया है। जो लोग भी आ रहे हैं, उनका ध्यान रखा जा रहा है। सभी को सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए भिजवाया जा रहा है।
- अभिषेक कुमार सिंह, तहसीलदार, पाली
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मध्यप्रदेश बार्डर पर स्थित होने के कारण अमझरा में बाहर से आने वालों का सिलसिला जारी है। कोई पैदल चलकर तो कोई ट्रकों के सहारे आ रहा है। सभी को अपने घर पहुंचने की जल्दी है। महाराष्ट्र, तेलंगाना, गुजरात समेत कई राज्यों में काम करने वाले मजदूरों का कोरोना वायरस के कारण काम बंद हो गया है। खाने पीने का कोई अन्य साधन नहीं होने के कारण यह अपने घर को वापस जा रहे हैं।
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रास्ते में दुकानों पर जो मिल गया, वह खा लेते हैं और हैंडपंप पर पानी पी लेते हैं। यह मजदूर कहीं पैदल चलकर कहीं ट्र्रक के सहारे आ रहे हैं। मध्यप्रदेश का प्रमुख प्रवेश द्वारा होने के कारण बार्डर पर सबसे अधिक लोगों का आना- जाना हो रहा है। ट्रकों में आ रहे लोगों में सोशल डिस्टेंस का पालन नहीं हो पा रहा है, क्योंकि ट्रकों में ठूंस- ठूंस कर लोगों को भरकर लाया जा रहा है। यह मजदूर कोरोना कैरियर भी बन सकते हैं।
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अब तक अमझरा बार्डर पर चौदह सौ लोग अन्य प्रांतों से आ चुके हैं। इनको बार्डर से अन्य जिलों की सीमा में भेजा जा चुका है। लेकिन, इसके बाद भी आने वाले मजदूरों का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। मजदूर भूखे पेट आ रहे हैं। यदि रास्ते में कहीं खाने - पीने को मिल गया तो ठीक, अन्यथा पैदल चलते जा रहे हैं। अमझरा बार्डर पर नाराहट व्यापार मंडल की ओर से आने वाले मजदूरों के खाना पीना का इंतजाम किया जा रहा है। ग्राम प्रधान नाराहट डा. दिलीप कुमार सोनी की ओर से पानी का टैंकर नियमित पहुंचाया जा रहा है। इसी पानी से आने वाले मजदूर अपनी प्यास बुझा रहे हैं।
अभी तक चौदह सौ लोगों को सरकारी बसों के माध्यम से मजदूरों के गृह जनपदों में भिजवाया गया है। बीती रात चार सौ लोग अमझरा में थे, जिन्हें बसों के माध्यम से भिजवा दिया गया है। जो लोग भी आ रहे हैं, उनका ध्यान रखा जा रहा है। सभी को सोशल डिस्टेंस का पालन करते हुए भिजवाया जा रहा है।
- अभिषेक कुमार सिंह, तहसीलदार, पाली
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संजय खन्ना- फोटो : LALITPUR