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स्वास्थ्य: जिले के सरकारी अस्पताल बने रेफर सेंटर
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जिले के सरकारी अस्पताल बने रेफर सेंटर
आयुष्मान योजना लागू होने के बाद भी नहीं बदले हालात
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना आयुष्मान भारत के चालू होने के बाद भी जिले का ‘स्वास्थ्य’ ठीक नहीं हैं। जहां जिले के अधिकांश सरकारी अस्पतालों में चिकित्सक और स्टाफ की कमी है। तो वहीं, कई जांचों के उपकरण भी उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में सरकारी अस्पताल रेफर सेंटर बन कर रह गए हैं।
जिले के सरकारी अस्पतालों की डॉक्टरों की कमी किसी से छिपी नहीं हैं। चिकित्सकों की कमी के चलते स्वास्थ्य विभाग में स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी पर हैं। यहां पर विशेषज्ञों की कमी के चलते के अधिकांश पद खाली हैं, जिससे गंभीर स्थिति में मरीजों केे रेफर करना पड़ता है। इनमें मेजर अटैक, हेंडिंजरी, लकवा, किडनी फैल, प्लेट कम होने पर व गंभीर बुखार के मरीजों को केवल रेफर ही किया जा रहा है। इनमें कुछ मरीजों को जांच के अभाव में ही रेफर किया जाता है। वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों पर रेडियोलॉजिस्ट के पांच पद स्वीकृत हैं, जिसके सापेक्ष सभी पद खाली हैं। वहीं, पैथोलॉजिस्ट के तीन पद के सापेक्ष एक पद पर कार्यरत हैं। साथ ही तीन सर्जनों में दो कार्यरत हैं। ऐनेस्थेटिस्ट तीन पद में सभी पद रिक्त हैं। इएमओ चार में एक कार्यरत हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। इसके साथ ही जिला अस्पताल में शासन से भले ही उपकरणों की सुविधा दी हो, लेकिन चिकित्सकों व विशेषज्ञों के अभाव में धूल फांक रही है। इनमें फेंको मशीन नेत्र सर्जन के स्थानांतरण से बंद पड़ी है तो वहीं, बीते वर्ष जिला अस्पताल में डिजीटल एक्सरे की सुविधा के लिए उपकरण प्राप्त हुए। तब से लगभग एक वर्ष बीतने के बाद भी यह सुविधा चालू नहीं की जा सकी। इसके साथ ही सीटी स्कैन को भी शुरू नहीं की जा सकी है। इसके साथ ही जिले में न्यूरो सर्जन की कमी के चलते एक्सीडेंटल केसों को रेफर किया जाता है। इतना ही नहीं हृदयरोग विशेषज्ञ के अभाव में मरीजों को महानगरों की ओर मुख करना पड़ रहा है। इससे जिले में स्वास्थ्य विभाग की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
ढाई सौ से अधिक मरीज होते रेफर
जिला अस्पताल में चिकित्सकों व विशेषज्ञों की कमी बनी हुई है। इसके साथ ही उपकरणों का अभाव है। जिससे जिला अस्पताल से प्रतिदिन लगभग आठ से दस मरीजों को रेफर किया जा रहा है। इनमें अधिकतर गंभीर बीमारी से पीड़ित व दुर्घटनाओं से ग्रस्त मरीज होते हैं।
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एक नजर में जिले की वर्तमान स्थिति
जिला की आबादी 14 लाख
जिला अस्पताल - 01
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र - 04
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र - 02
नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र - 23
उपकेंद्र - 98
जिला में चिकित्सकों की स्थिति
पदनाम स्वीकृत पद कार्यरत रिक्त
लेवल - 1 46 23 23
लेवल - 2 02 12 00
लेवल - 3 15 07 08
लेवल - 4 14 05 09
कुल 77 47 40
डेंटल सर्जन 02 00 02
चिकित्साधिकारी सामु. स्वा. कें 18 12 06
कुल 97 59 48
जिला अस्पताल
स्वीकृत पद कार्यरत रिक्त पद
29 16 12
शासन को किया पत्राचार
जिले में चिकित्सकों व विशेषज्ञों की कमी है। जिन्हें भरने के लिए शासन को पत्राचार किया गया है। चिकित्सक मिलते ही तैनात किया जाएगा।
- डा. प्रताप सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
ललितपुर
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आयुष्मान योजना लागू होने के बाद भी नहीं बदले हालात
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। देश की सबसे बड़ी स्वास्थ्य योजना आयुष्मान भारत के चालू होने के बाद भी जिले का ‘स्वास्थ्य’ ठीक नहीं हैं। जहां जिले के अधिकांश सरकारी अस्पतालों में चिकित्सक और स्टाफ की कमी है। तो वहीं, कई जांचों के उपकरण भी उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में सरकारी अस्पताल रेफर सेंटर बन कर रह गए हैं।
जिले के सरकारी अस्पतालों की डॉक्टरों की कमी किसी से छिपी नहीं हैं। चिकित्सकों की कमी के चलते स्वास्थ्य विभाग में स्वास्थ्य सेवाएं बेपटरी पर हैं। यहां पर विशेषज्ञों की कमी के चलते के अधिकांश पद खाली हैं, जिससे गंभीर स्थिति में मरीजों केे रेफर करना पड़ता है। इनमें मेजर अटैक, हेंडिंजरी, लकवा, किडनी फैल, प्लेट कम होने पर व गंभीर बुखार के मरीजों को केवल रेफर ही किया जा रहा है। इनमें कुछ मरीजों को जांच के अभाव में ही रेफर किया जाता है। वर्तमान में स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों पर रेडियोलॉजिस्ट के पांच पद स्वीकृत हैं, जिसके सापेक्ष सभी पद खाली हैं। वहीं, पैथोलॉजिस्ट के तीन पद के सापेक्ष एक पद पर कार्यरत हैं। साथ ही तीन सर्जनों में दो कार्यरत हैं। ऐनेस्थेटिस्ट तीन पद में सभी पद रिक्त हैं। इएमओ चार में एक कार्यरत हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में भी बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं। इसके साथ ही जिला अस्पताल में शासन से भले ही उपकरणों की सुविधा दी हो, लेकिन चिकित्सकों व विशेषज्ञों के अभाव में धूल फांक रही है। इनमें फेंको मशीन नेत्र सर्जन के स्थानांतरण से बंद पड़ी है तो वहीं, बीते वर्ष जिला अस्पताल में डिजीटल एक्सरे की सुविधा के लिए उपकरण प्राप्त हुए। तब से लगभग एक वर्ष बीतने के बाद भी यह सुविधा चालू नहीं की जा सकी। इसके साथ ही सीटी स्कैन को भी शुरू नहीं की जा सकी है। इसके साथ ही जिले में न्यूरो सर्जन की कमी के चलते एक्सीडेंटल केसों को रेफर किया जाता है। इतना ही नहीं हृदयरोग विशेषज्ञ के अभाव में मरीजों को महानगरों की ओर मुख करना पड़ रहा है। इससे जिले में स्वास्थ्य विभाग की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है।
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ढाई सौ से अधिक मरीज होते रेफर
जिला अस्पताल में चिकित्सकों व विशेषज्ञों की कमी बनी हुई है। इसके साथ ही उपकरणों का अभाव है। जिससे जिला अस्पताल से प्रतिदिन लगभग आठ से दस मरीजों को रेफर किया जा रहा है। इनमें अधिकतर गंभीर बीमारी से पीड़ित व दुर्घटनाओं से ग्रस्त मरीज होते हैं।
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एक नजर में जिले की वर्तमान स्थिति
जिला की आबादी 14 लाख
जिला अस्पताल - 01
सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र - 04
प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र - 02
नया प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र - 23
उपकेंद्र - 98
जिला में चिकित्सकों की स्थिति
पदनाम स्वीकृत पद कार्यरत रिक्त
लेवल - 1 46 23 23
लेवल - 2 02 12 00
लेवल - 3 15 07 08
लेवल - 4 14 05 09
कुल 77 47 40
डेंटल सर्जन 02 00 02
चिकित्साधिकारी सामु. स्वा. कें 18 12 06
कुल 97 59 48
जिला अस्पताल
स्वीकृत पद कार्यरत रिक्त पद
29 16 12
शासन को किया पत्राचार
जिले में चिकित्सकों व विशेषज्ञों की कमी है। जिन्हें भरने के लिए शासन को पत्राचार किया गया है। चिकित्सक मिलते ही तैनात किया जाएगा।
- डा. प्रताप सिंह, मुख्य चिकित्सा अधिकारी
ललितपुर