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कल्चरल- पुलिस लाइन के इतिहास में गुम हो गए जन्माष्टी के वो तीन दिन
Updated Wed, 09 Aug 2017 02:12 AM IST
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पुलिस लाइन में अब नहीं होता तीन दिवसीय जन्माष्टमी पर्व
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर।
पुलिस लाइन में जन्माष्टमी का तीन दिन का मंच अब कहीं गुम हो गया है, इसमें स्कूली बच्चों द्वारा सजाई जाने वाली राधा-कृष्ण की झांकियां, आर्केस्ट्रा, भजन संध्या और पुलिस कर्मचारियों की प्रतिभाओं के प्रदर्शन के साथ ही लोकगीत, लोक नृत्य और बुंदेेलखंडी गायकी का उत्कृष्ट प्रदर्शन का बेहतरीन आयोजन किया जाता था। लेकिन, यह सब अब शहरवासियों के लिए एक गुजरा हुआ सपना रह गया है। चार दशक पूर्व का पुलिस लाइन का यह आयोजन करीब सात वर्ष से शहर के लिए अतीत बन चुका है। इस बार 15 अगस्त के दिन श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और स्वतंत्रता दिवस भले ही एक दिन हों, लेकिन दोनों कार्यक्रम सादगी के साथ मनाए तो जाएंगे, लेकिन मंच एक नहीं होगा।
पुलिस लाइन प्रांगण में चार दशक पूर्व श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर एक छोटे से रूप में शुरू होने वाला मंच का कार्यक्रम एक भव्य आयोजन प्रदर्शित होने लगा और शहरवासियों के मुख्य आकर्षण का केंद्र बन चुका था। सावन महीने की शुरुआत होते ही लोग पुलिस लाइन में होने वाले इस आयोजन का इंतजार करने लगते थे। पहले तो यह पुलिस श्रीकृष्ण की झांकी और पुलिस कर्मचारियों के प्रदर्शन तक ही सीमित रहता था। लेकिन धीमे-धीमे इसके आयोजन की रूपरेखा लगातार परिवर्तित होती रही और यह कार्यक्रम ललितपुर की शान बन गया। पहले दिन स्कूली बच्चों द्वारा धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन की धूम रहती थी और श्रीकृष्ण जन्म की आकर्षक झांकी सजाई जाती थी। तो वहीं दूसरे दिन शहर समेत विभिन्न जनपदों की आर्केस्ट्रा पार्टियां अपना धमाल दिखाती थीं। वहीं, जन्माष्टमी के दिन आखिरी कार्यक्रम के अंतर्गत भव्य भजन संध्या का आयोजन किया जाता था। पुलिस लाइन के इस मंच पर स्थानीय कलाकारों के अलावा भोपाल, कानपुर, झांसी, सागर, जबलपुर की आर्केस्ट्रा के कलाकारों ने भी अपनी प्रतिभाएं दिखाई। इस मंच पर दिल्ली के लालकिला के मंच पर प्रतिभा दिखाने वाले राष्ट्रपति पुरस्कृत स्थानीय लोकनृत्य कलाकार शिवराज और लीला फूला भी अपनी प्रतिभा दिखा चुके हैं। कविताओं और शायरी भी लगातार मंच संयोजक द्वारा लोगों का मन प्रफुल्लित करती दिखाई देती थीं। धर्म संभाव के साथ आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान मंदिर में जहां वैष्णो देवी की गुफा सहित झांकी भी सजाई जाती थी, वहीं भगवान की जेल वाली झांकी भी भव्य आकर्षण होती थी। जबकि मंदिर के बाहर भव्य मेला भी आयोजित होता था। लेकिन पुलिस लाइन के इस मंच से जन्माष्टमी पर होने वाली वह तीन दिवसीय कार्यक्रम अब इतिहास के पन्नों की बातें हो गई हैं। हालांकि पुलिस लाइन स्थित मुक्तिधाम मंदिर में जन्माष्टमी के दिन रात्रि में झांकी सजाने के साथ सादगी से कार्यक्रम जरूर आयोजित किए जाते हैं और इस बार भी भजन कीर्तन और झांकी व प्रसादी वितरण तक ही कार्यक्रम सीमित रहेगा।
यह दिखा चुकी प्रतिभा
ललितपुर। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के तीन दिवसीय आयोजित कार्यक्रमों में पुलिस लाइन के मंच पर राजा बुंदेला, खुशबू जैन, जगमोहन जोशी, नूपुर अवस्थी, अब्दुल हमीद चौहान, शैलेंद्र सागर, चंद्रशेखर त्रिपाठी, सोनाली संज्ञा, अशोक देवलिया, बॉबी पांडेय, चंकी पांडेय द्वारा अपनी प्रतिभा दिखा चुके हैं, जिनमें से अधिकांश बड़े मंचों पर भी देखे जा सकते हैं। कोई फिल्मों में तो कोई धारावाहिकों या गायकी में कहीं न कहीं नजर आते हैं।
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पुलिस लाइन के मंच पर अब तीन दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन करीब सात वर्ष से नहीं हुए हैं। लेकिन मंदिर परिसर में जन्माष्टमी पर भजन संध्या, झांकी व प्रसादी कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस बार भी मंदिर परिसर में ही सादगी के साथ जन्माष्टमी का कार्यक्रम आयोजित होगा।
अतुल कुमार सिंह, प्रतिसार निरीक्षक।
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अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर।
पुलिस लाइन में जन्माष्टमी का तीन दिन का मंच अब कहीं गुम हो गया है, इसमें स्कूली बच्चों द्वारा सजाई जाने वाली राधा-कृष्ण की झांकियां, आर्केस्ट्रा, भजन संध्या और पुलिस कर्मचारियों की प्रतिभाओं के प्रदर्शन के साथ ही लोकगीत, लोक नृत्य और बुंदेेलखंडी गायकी का उत्कृष्ट प्रदर्शन का बेहतरीन आयोजन किया जाता था। लेकिन, यह सब अब शहरवासियों के लिए एक गुजरा हुआ सपना रह गया है। चार दशक पूर्व का पुलिस लाइन का यह आयोजन करीब सात वर्ष से शहर के लिए अतीत बन चुका है। इस बार 15 अगस्त के दिन श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और स्वतंत्रता दिवस भले ही एक दिन हों, लेकिन दोनों कार्यक्रम सादगी के साथ मनाए तो जाएंगे, लेकिन मंच एक नहीं होगा।
पुलिस लाइन प्रांगण में चार दशक पूर्व श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर एक छोटे से रूप में शुरू होने वाला मंच का कार्यक्रम एक भव्य आयोजन प्रदर्शित होने लगा और शहरवासियों के मुख्य आकर्षण का केंद्र बन चुका था। सावन महीने की शुरुआत होते ही लोग पुलिस लाइन में होने वाले इस आयोजन का इंतजार करने लगते थे। पहले तो यह पुलिस श्रीकृष्ण की झांकी और पुलिस कर्मचारियों के प्रदर्शन तक ही सीमित रहता था। लेकिन धीमे-धीमे इसके आयोजन की रूपरेखा लगातार परिवर्तित होती रही और यह कार्यक्रम ललितपुर की शान बन गया। पहले दिन स्कूली बच्चों द्वारा धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन की धूम रहती थी और श्रीकृष्ण जन्म की आकर्षक झांकी सजाई जाती थी। तो वहीं दूसरे दिन शहर समेत विभिन्न जनपदों की आर्केस्ट्रा पार्टियां अपना धमाल दिखाती थीं। वहीं, जन्माष्टमी के दिन आखिरी कार्यक्रम के अंतर्गत भव्य भजन संध्या का आयोजन किया जाता था। पुलिस लाइन के इस मंच पर स्थानीय कलाकारों के अलावा भोपाल, कानपुर, झांसी, सागर, जबलपुर की आर्केस्ट्रा के कलाकारों ने भी अपनी प्रतिभाएं दिखाई। इस मंच पर दिल्ली के लालकिला के मंच पर प्रतिभा दिखाने वाले राष्ट्रपति पुरस्कृत स्थानीय लोकनृत्य कलाकार शिवराज और लीला फूला भी अपनी प्रतिभा दिखा चुके हैं। कविताओं और शायरी भी लगातार मंच संयोजक द्वारा लोगों का मन प्रफुल्लित करती दिखाई देती थीं। धर्म संभाव के साथ आयोजित इस कार्यक्रम के दौरान मंदिर में जहां वैष्णो देवी की गुफा सहित झांकी भी सजाई जाती थी, वहीं भगवान की जेल वाली झांकी भी भव्य आकर्षण होती थी। जबकि मंदिर के बाहर भव्य मेला भी आयोजित होता था। लेकिन पुलिस लाइन के इस मंच से जन्माष्टमी पर होने वाली वह तीन दिवसीय कार्यक्रम अब इतिहास के पन्नों की बातें हो गई हैं। हालांकि पुलिस लाइन स्थित मुक्तिधाम मंदिर में जन्माष्टमी के दिन रात्रि में झांकी सजाने के साथ सादगी से कार्यक्रम जरूर आयोजित किए जाते हैं और इस बार भी भजन कीर्तन और झांकी व प्रसादी वितरण तक ही कार्यक्रम सीमित रहेगा।
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यह दिखा चुकी प्रतिभा
ललितपुर। श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के तीन दिवसीय आयोजित कार्यक्रमों में पुलिस लाइन के मंच पर राजा बुंदेला, खुशबू जैन, जगमोहन जोशी, नूपुर अवस्थी, अब्दुल हमीद चौहान, शैलेंद्र सागर, चंद्रशेखर त्रिपाठी, सोनाली संज्ञा, अशोक देवलिया, बॉबी पांडेय, चंकी पांडेय द्वारा अपनी प्रतिभा दिखा चुके हैं, जिनमें से अधिकांश बड़े मंचों पर भी देखे जा सकते हैं। कोई फिल्मों में तो कोई धारावाहिकों या गायकी में कहीं न कहीं नजर आते हैं।
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पुलिस लाइन के मंच पर अब तीन दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन करीब सात वर्ष से नहीं हुए हैं। लेकिन मंदिर परिसर में जन्माष्टमी पर भजन संध्या, झांकी व प्रसादी कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इस बार भी मंदिर परिसर में ही सादगी के साथ जन्माष्टमी का कार्यक्रम आयोजित होगा।
अतुल कुमार सिंह, प्रतिसार निरीक्षक।