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जिला अस्पताल सुविधाओं के अभाव में बना रेफर सेंटर
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सीटी स्कैन व डिजिटल एक्सरे का नहीं मिल रहा लाभ
ललितपुर। जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को अस्पताल में स्थापित आधुनिक मशीनों की सुविधा नहीं मिल पा रही है। यहां पर सीटी स्कैन, डिजिटल एक्सरे और नेत्र ऑपरेशन के लिए फेको मशीनें तो हैं, लेकिन अब तक इनसे काम नहीं लिया जा रहा है। इस कारण मरीजों को उपचार के लिए अन्य बड़े शहरों की ओर रुख करना पड़ रहा है और अस्पताल रेफर सेंटर बन गया है।
वर्तमान में जिला की आबादी 14 लाख है। यहां पर बड़े नर्सिंग होम नहीं हैं। मुख्यालय पर स्थित जिला अस्पताल ही एकमात्र सहारा है, जहां पर प्रतिदिन लगभग दो हजार मरीज उपचार कराने के लिए आते हैं। इनमें एक हजार से 15 सौ मरीज अस्पताल की ओपीडी के समय पर आते हैं। कुछ मरीज आपातकाल में आते हैं। यहां पर बीते वर्षों में शासन द्वारा बेहतर उपचार के लिए आधुनिक मशीनों की सुविधा दी गई। इनमें लगभग एक वर्ष से अधिक पूर्व में सीटी स्केन डिजीटल एक्सरे मशीन उपलब्ध कराई गई। लेकिन, अब तक इसे शुरू नहीं कराया जा सका है। हालत यह है कि दुर्घटनाओं से ग्रस्त मरीजों को केवल प्राथमिक उपचार ही मिल पाता है। सिर में चोट वाले मरीजों को सीटी स्कैन के लिए अन्य बड़े शहरों में जांच के लिए जाना पड़ता है, जिसमें एक मरीज को लगभग आठ से दस हजार रुपये का खर्च आता है। वर्तमान में जिला अस्पताल में डिजीटल एक्सरे की सुविधा के लिए मशीन दी गई है, मशीन शुरू नहीं होने के कारण धूल फांक रही है। ऐसे में हड्डी के फ्रेक्चर के मरीजों को निजी एक्सरे सेंटरों का सहारा लेना पड़ रहा है। जिसके लिए भर्ती मरीज को स्ट्रेचर व निजी वाहनों के सहारे एक्सरे के लिए जाना पड़ रहा है। जहां पर एक मरीज को एक एक्सरे के लिए लगभग चार सौ रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। जबकि, जिला अस्पताल में मरीजों को एक्सरे के लिए कम शुल्क देकर सुविधा मिलना है।
मोतियाबिंद के ऑपरेशन बिना चीरा लगाए करने के लिए फेको मशीन की सुविधा मिली, लेकिन शुरुआत में ही केवल 50 ऑपरेशन किए जा सके। इसके बाद मशीन ऑपरेटर व चिकित्सक नहीं आए। तब से अब तक किसी अन्य चिकित्सक की तैनाती नहीं हो सकी। अब मशीन अस्पताल की ओटी में रखी धूल फांक रही है। इसके चलते मरीजों मोतियाबिंद के ऑपरेशन पुरानी पद्धति से करने पड़ रहे हैं। ऐसे में कई मरीज ऑपरेशन कराने से परहेज करते हैं। इसके अलावा अस्पताल में गंभीर हालत के मरीजों को केवल प्राथमिक उपचार के बाद रेफर करना पड़ रहा है। सुविधाओं के अभाव में जिला अस्पताल रेफर सेंटर बनकर रह गया है।
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दस दिन से जला अस्पताल का ट्रांसफार्मर
जिला अस्पताल में लगभग 10 दिन से विद्युत ट्रांसफार्मर खराब पड़ा हुआ है। अस्पताल प्रशासन ने बिजली आपूर्ति दुरुस्त रखने के लिए डिजीटल एक्सरे के लिए अलग से रखे ट्रांसफार्मर से कनेक्शन करा दिया है। इससे डिजीटल एक्सरे मशीन ट्रायल के बाद केवल शोपीस साबित हो रही है।
डिजीटल एक्सरे का ट्रायल हो चुका है, लेकिन अस्पताल का एक ट्रांसफार्मर फुंक गया है। इस कारण डिजीटल एक्सरे मशीन नहीं चल पा रही है। ट्रांसफार्मर रखे जाने के बाद एक्सरे शुरू कराया जाएगा। सीटी स्कैन मशीन को भी शुरू कराया जाएगा।
- डॉ. अमित चतुर्वेदी, वरिष्ठ फिजीशियन, जिला अस्पताल
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ललितपुर। जिला अस्पताल में आने वाले मरीजों को अस्पताल में स्थापित आधुनिक मशीनों की सुविधा नहीं मिल पा रही है। यहां पर सीटी स्कैन, डिजिटल एक्सरे और नेत्र ऑपरेशन के लिए फेको मशीनें तो हैं, लेकिन अब तक इनसे काम नहीं लिया जा रहा है। इस कारण मरीजों को उपचार के लिए अन्य बड़े शहरों की ओर रुख करना पड़ रहा है और अस्पताल रेफर सेंटर बन गया है।
वर्तमान में जिला की आबादी 14 लाख है। यहां पर बड़े नर्सिंग होम नहीं हैं। मुख्यालय पर स्थित जिला अस्पताल ही एकमात्र सहारा है, जहां पर प्रतिदिन लगभग दो हजार मरीज उपचार कराने के लिए आते हैं। इनमें एक हजार से 15 सौ मरीज अस्पताल की ओपीडी के समय पर आते हैं। कुछ मरीज आपातकाल में आते हैं। यहां पर बीते वर्षों में शासन द्वारा बेहतर उपचार के लिए आधुनिक मशीनों की सुविधा दी गई। इनमें लगभग एक वर्ष से अधिक पूर्व में सीटी स्केन डिजीटल एक्सरे मशीन उपलब्ध कराई गई। लेकिन, अब तक इसे शुरू नहीं कराया जा सका है। हालत यह है कि दुर्घटनाओं से ग्रस्त मरीजों को केवल प्राथमिक उपचार ही मिल पाता है। सिर में चोट वाले मरीजों को सीटी स्कैन के लिए अन्य बड़े शहरों में जांच के लिए जाना पड़ता है, जिसमें एक मरीज को लगभग आठ से दस हजार रुपये का खर्च आता है। वर्तमान में जिला अस्पताल में डिजीटल एक्सरे की सुविधा के लिए मशीन दी गई है, मशीन शुरू नहीं होने के कारण धूल फांक रही है। ऐसे में हड्डी के फ्रेक्चर के मरीजों को निजी एक्सरे सेंटरों का सहारा लेना पड़ रहा है। जिसके लिए भर्ती मरीज को स्ट्रेचर व निजी वाहनों के सहारे एक्सरे के लिए जाना पड़ रहा है। जहां पर एक मरीज को एक एक्सरे के लिए लगभग चार सौ रुपये खर्च करने पड़ रहे हैं। जबकि, जिला अस्पताल में मरीजों को एक्सरे के लिए कम शुल्क देकर सुविधा मिलना है।
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मोतियाबिंद के ऑपरेशन बिना चीरा लगाए करने के लिए फेको मशीन की सुविधा मिली, लेकिन शुरुआत में ही केवल 50 ऑपरेशन किए जा सके। इसके बाद मशीन ऑपरेटर व चिकित्सक नहीं आए। तब से अब तक किसी अन्य चिकित्सक की तैनाती नहीं हो सकी। अब मशीन अस्पताल की ओटी में रखी धूल फांक रही है। इसके चलते मरीजों मोतियाबिंद के ऑपरेशन पुरानी पद्धति से करने पड़ रहे हैं। ऐसे में कई मरीज ऑपरेशन कराने से परहेज करते हैं। इसके अलावा अस्पताल में गंभीर हालत के मरीजों को केवल प्राथमिक उपचार के बाद रेफर करना पड़ रहा है। सुविधाओं के अभाव में जिला अस्पताल रेफर सेंटर बनकर रह गया है।
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दस दिन से जला अस्पताल का ट्रांसफार्मर
जिला अस्पताल में लगभग 10 दिन से विद्युत ट्रांसफार्मर खराब पड़ा हुआ है। अस्पताल प्रशासन ने बिजली आपूर्ति दुरुस्त रखने के लिए डिजीटल एक्सरे के लिए अलग से रखे ट्रांसफार्मर से कनेक्शन करा दिया है। इससे डिजीटल एक्सरे मशीन ट्रायल के बाद केवल शोपीस साबित हो रही है।
डिजीटल एक्सरे का ट्रायल हो चुका है, लेकिन अस्पताल का एक ट्रांसफार्मर फुंक गया है। इस कारण डिजीटल एक्सरे मशीन नहीं चल पा रही है। ट्रांसफार्मर रखे जाने के बाद एक्सरे शुरू कराया जाएगा। सीटी स्कैन मशीन को भी शुरू कराया जाएगा।
- डॉ. अमित चतुर्वेदी, वरिष्ठ फिजीशियन, जिला अस्पताल