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लालटेन के उजाले में होता दाह संस्कार
Updated Mon, 10 Sep 2018 02:06 AM IST
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लालटेन के उजाले में होता दाह संस्कार
पाली (ललितपुर)। तहसील मुख्यालय पाली में घटवार ललितपुर मार्ग पर बना मुक्तिधाम बदहाली का शिकार बना है। इसके सौंदर्यीकरण का बजट कागजों में ही बनते बिखरते रहते हैं। सुविधाओं की कमी से यहां आने वाले लोगों को खूब अखरती है। इसके सौंदर्यकरण को लेकर आवाज भी खूब उठाई गयी। इसके बाद भी यहां का परिसर कंटीली झाड़ियों में तब्दील है। प्रकाश के आधे अधूरे इंतजाम है। क्षेत्र कोई भी हो शासन की मंशा है कि हर क्षेत्र साफ और सुरक्षित रहे । वही मुक्तिधाम का सबसे बड़ा भाग कटीली झाड़ियों में तब्दील है। जहां पैदल चलना सबके वश की बात नही रहती। तो विषैले जीव जंतुओं का भय भी बना रहता है। बसस्टैंड से मुक्तिधाम को जाने वाले रास्ते की स्ट्रीट लाइटें गायब हैं । शाम होते ही सड़क पर घना अंधेरा हो जाता है । इसके परिसर में लगी स्ट्रीट लाइटें बंद है। परिसर में एक सौलर पैनल लगा है वह भी अपनी खराब गुणवत्ता के चलते जवाब दे गया। रात्रि में पैनल लाइट लुका छिपी का खेल खेलती है। जिससे वहां लोगों को रात्रि में दाह संस्कार की रस्में अदा करने में बड़ी मुश्किल पैदा होती है। अब तो लोग मुक्तिधाम की व्यवस्थाओं से अच्छी तरह वाकिफ हो गए हैं और घर से ही लालटेन एवं टार्च लेकर निकलने लगे हैं। मुक्तिधाम के दाह संस्कार स्थल के ऊपर लगी टीनशेड भी खस्ताहाल होता जा रहा है । बारिश में इसके नीचे दाह संस्कार करना बड़ा मुश्किल हो जाता है।
अवस्थापना निधि से भी नही बदल पाई खास सूरत
पाली। अवस्थना निधि के अंतर्गत मुक्तिधाम में पेवर ब्रिक्स ए बैंच स्थापना का कार्य किया गया है । जिसका दायरा सिकुड़ा हुआ नजर आता है । प्रवेश द्वार से दाहसंस्कार स्थल तक के पेवर पूरी तरह उखड़ चुके हैं ।
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पाली (ललितपुर)। तहसील मुख्यालय पाली में घटवार ललितपुर मार्ग पर बना मुक्तिधाम बदहाली का शिकार बना है। इसके सौंदर्यीकरण का बजट कागजों में ही बनते बिखरते रहते हैं। सुविधाओं की कमी से यहां आने वाले लोगों को खूब अखरती है। इसके सौंदर्यकरण को लेकर आवाज भी खूब उठाई गयी। इसके बाद भी यहां का परिसर कंटीली झाड़ियों में तब्दील है। प्रकाश के आधे अधूरे इंतजाम है। क्षेत्र कोई भी हो शासन की मंशा है कि हर क्षेत्र साफ और सुरक्षित रहे । वही मुक्तिधाम का सबसे बड़ा भाग कटीली झाड़ियों में तब्दील है। जहां पैदल चलना सबके वश की बात नही रहती। तो विषैले जीव जंतुओं का भय भी बना रहता है। बसस्टैंड से मुक्तिधाम को जाने वाले रास्ते की स्ट्रीट लाइटें गायब हैं । शाम होते ही सड़क पर घना अंधेरा हो जाता है । इसके परिसर में लगी स्ट्रीट लाइटें बंद है। परिसर में एक सौलर पैनल लगा है वह भी अपनी खराब गुणवत्ता के चलते जवाब दे गया। रात्रि में पैनल लाइट लुका छिपी का खेल खेलती है। जिससे वहां लोगों को रात्रि में दाह संस्कार की रस्में अदा करने में बड़ी मुश्किल पैदा होती है। अब तो लोग मुक्तिधाम की व्यवस्थाओं से अच्छी तरह वाकिफ हो गए हैं और घर से ही लालटेन एवं टार्च लेकर निकलने लगे हैं। मुक्तिधाम के दाह संस्कार स्थल के ऊपर लगी टीनशेड भी खस्ताहाल होता जा रहा है । बारिश में इसके नीचे दाह संस्कार करना बड़ा मुश्किल हो जाता है।
अवस्थापना निधि से भी नही बदल पाई खास सूरत
पाली। अवस्थना निधि के अंतर्गत मुक्तिधाम में पेवर ब्रिक्स ए बैंच स्थापना का कार्य किया गया है । जिसका दायरा सिकुड़ा हुआ नजर आता है । प्रवेश द्वार से दाहसंस्कार स्थल तक के पेवर पूरी तरह उखड़ चुके हैं ।
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