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शासनादेश को ठेंगा दिखाकर बिना टेंडर बांटी जा रहीं लाखों रुपए की यूनिफार्म
Updated Sat, 16 Sep 2017 02:39 AM IST
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बिना टेंडर बांटी जा रहीं लाखों रुपये की यूनिफार्म
ललितपुर।
जनपद के परिषदीय विद्यालयों में शासन की मंशा के विपरीत बिना नाप के रेडीमेड यूनिफार्म वितरित तो की ही जा रही है, साथ ही शासनादेश को भी ठेंगा दिखाया जा रहा है। शासन के आदेश हैं कि किसी कीमत में एक लाख से अधिक धनराशि का व्यय किया जाता है तो उसके लिए टेंडर प्रक्रिया अनिवार्य है, लेकिन जनपद के किसी भी परिषदीय विद्यालय में यूनिफार्म वितरण के लिए टेंडर प्रक्रिया नहीं अपनाई गई हैं।
सर्व शिक्षा अभियान के तहत परिषदीय और अनुदानित प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले लगभग 1.52 लाख बच्चों को यूनिफार्म के दो-दो सेट वितरित किए जा रहे हैं। इसके लिए शासन द्वारा लगभग 6.08 करोड़ की धनराशि व्यय की जा रही है। शासन के सख्त आदेश हैं कि यदि कहीं पर यूनिफार्म वितरण में 10 हजार रुपए से अधिक धनराशि व्यय की जा रही है तो वहां पर कम से कम तीन लोगों से कुटेशन और यदि एक या उससे अधिक धनराशि व्यय की जाती है तो टेंडर प्रक्रिया पूर्ण करना अनिवार्य है। एक सेट की लागत 200 रुपये निर्धारित है और प्रत्येक बच्चों को दो-दो सेट यूनिफार्म बांटी जाती है, यानी प्रत्येक बच्चे पर 400 रुपये खर्च किए जाने हैं। इस हिसाब से यदि किसी विद्यालय का छात्रांकन 200 या फिर इससे अधिक है तो वहां पर यूनिफार्म वितरण के मत में एक लाख रुपये या फिर उससे अधिक धनराशि व्यय की जा रही है, जो शासनादेश के क्रम में टेंडर प्रक्रिया के दायरे में आता है। जनपद में लगभग 30 ऐसे परिषदीय विद्यालय हैं जहां का छात्रांकन 200 से अधिक है और इसमें 14 विद्यालय ऐसे हैं जिनका छात्रांकन 300 से भी अधिकृत है, जो अधिकतम छात्रांकन 593 तक है। लेकिन जनपद के किसी भी विद्यालय में यूनिफार्म वितरण के लिए टेंडर प्रक्रिया नहीं अपनाई गई है।
बीएसए है बचाव की मुद्रा में, नहीं शासनादेश की फिक्र
इस मामले में जब खंड शिक्षा अधिकारियों से बात की तो उनका कहना था कि यूनिफार्म वितरण का कार्य दो अलग-अलग हिस्सों में होता है। इसमें कपड़े का अलग और सिलाई का अलग काम दिया जाता है, इसलिए वह टेंडर के दायरे में नहीं आते हैं। इस संबंध में जब जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अंबरीष कुमार से भी बात की तो उन्होंने भी यही जवाब दिया। गौरतलब है कि प्रत्येक यूनिफार्म सेट पर 60 से 65 रुपये तक की सिलाई का व्यय हो रहा है, यदि अधिकृत सिलाई व्यय 65 रुपये भी मान लिया जाए तो दो सेट यूनिफार्म या एक बच्चे की यूनिफार्म की सिलाई पर 130 रुपये व्यय हो रहे हैं। इसमें प्रत्येक बच्चे के कपड़े पर व्यय के लिए लगभग 270 रुपये व्यय हो रहे हैं। यदि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और खंड शिक्षा अधिकारियों के मन की भी मान की जाए तो 270 रुपये प्रत्येक बच्चे के कपड़े के हिसाब से यदि किसी विद्यालय का छात्रांकन 370 से अधिक है तो फिर शासनादेश के क्रम में वह टेंडर प्रक्रिया के दायरे में आते हैं। जनपद के 06 विद्यालय ऐसे हैं जहां पर 370 से अधिक बच्चों को यूनिफार्म वितरित की जानी है। इन विद्यालयों में भी टेंडर प्रक्रिया नहीं अपनाई गई है।
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यह है केवल दिखावा
वैसे यदि वास्तविकता की बात करें तो गांवों में इतने टेलर नहीं कि वह इतनी बड़ी संख्या में यूनिफार्म सिलकर दे सकें। इसलिए यूनिफार्म माफिया का सहारा लिया जा रहा है और यही माफिया यूनिफार्म के लिए व्यय होने वाले कपड़े और सिलाई का अलग-अलग बिल आदा कर रहे हैं, जबकि ठेका एक ही व्यक्ति ले रहा है।
यूनिफार्म वितरण के लिए कपड़े और सिलाई दोनों का ही अलग-अलग काम दिया जाता है, इसलिए वह टेंडर के दायरे में नहीं आते हैं। जनपद में अभी किसी भी विद्यालय में यूनिफार्म के लिए टेंडर नहीं निकाला गया है।
- अंबरीष कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, ललितपुर।
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ललितपुर।
जनपद के परिषदीय विद्यालयों में शासन की मंशा के विपरीत बिना नाप के रेडीमेड यूनिफार्म वितरित तो की ही जा रही है, साथ ही शासनादेश को भी ठेंगा दिखाया जा रहा है। शासन के आदेश हैं कि किसी कीमत में एक लाख से अधिक धनराशि का व्यय किया जाता है तो उसके लिए टेंडर प्रक्रिया अनिवार्य है, लेकिन जनपद के किसी भी परिषदीय विद्यालय में यूनिफार्म वितरण के लिए टेंडर प्रक्रिया नहीं अपनाई गई हैं।
सर्व शिक्षा अभियान के तहत परिषदीय और अनुदानित प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में पढ़ने वाले लगभग 1.52 लाख बच्चों को यूनिफार्म के दो-दो सेट वितरित किए जा रहे हैं। इसके लिए शासन द्वारा लगभग 6.08 करोड़ की धनराशि व्यय की जा रही है। शासन के सख्त आदेश हैं कि यदि कहीं पर यूनिफार्म वितरण में 10 हजार रुपए से अधिक धनराशि व्यय की जा रही है तो वहां पर कम से कम तीन लोगों से कुटेशन और यदि एक या उससे अधिक धनराशि व्यय की जाती है तो टेंडर प्रक्रिया पूर्ण करना अनिवार्य है। एक सेट की लागत 200 रुपये निर्धारित है और प्रत्येक बच्चों को दो-दो सेट यूनिफार्म बांटी जाती है, यानी प्रत्येक बच्चे पर 400 रुपये खर्च किए जाने हैं। इस हिसाब से यदि किसी विद्यालय का छात्रांकन 200 या फिर इससे अधिक है तो वहां पर यूनिफार्म वितरण के मत में एक लाख रुपये या फिर उससे अधिक धनराशि व्यय की जा रही है, जो शासनादेश के क्रम में टेंडर प्रक्रिया के दायरे में आता है। जनपद में लगभग 30 ऐसे परिषदीय विद्यालय हैं जहां का छात्रांकन 200 से अधिक है और इसमें 14 विद्यालय ऐसे हैं जिनका छात्रांकन 300 से भी अधिकृत है, जो अधिकतम छात्रांकन 593 तक है। लेकिन जनपद के किसी भी विद्यालय में यूनिफार्म वितरण के लिए टेंडर प्रक्रिया नहीं अपनाई गई है।
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इस मामले में जब खंड शिक्षा अधिकारियों से बात की तो उनका कहना था कि यूनिफार्म वितरण का कार्य दो अलग-अलग हिस्सों में होता है। इसमें कपड़े का अलग और सिलाई का अलग काम दिया जाता है, इसलिए वह टेंडर के दायरे में नहीं आते हैं। इस संबंध में जब जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी अंबरीष कुमार से भी बात की तो उन्होंने भी यही जवाब दिया। गौरतलब है कि प्रत्येक यूनिफार्म सेट पर 60 से 65 रुपये तक की सिलाई का व्यय हो रहा है, यदि अधिकृत सिलाई व्यय 65 रुपये भी मान लिया जाए तो दो सेट यूनिफार्म या एक बच्चे की यूनिफार्म की सिलाई पर 130 रुपये व्यय हो रहे हैं। इसमें प्रत्येक बच्चे के कपड़े पर व्यय के लिए लगभग 270 रुपये व्यय हो रहे हैं। यदि जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और खंड शिक्षा अधिकारियों के मन की भी मान की जाए तो 270 रुपये प्रत्येक बच्चे के कपड़े के हिसाब से यदि किसी विद्यालय का छात्रांकन 370 से अधिक है तो फिर शासनादेश के क्रम में वह टेंडर प्रक्रिया के दायरे में आते हैं। जनपद के 06 विद्यालय ऐसे हैं जहां पर 370 से अधिक बच्चों को यूनिफार्म वितरित की जानी है। इन विद्यालयों में भी टेंडर प्रक्रिया नहीं अपनाई गई है।
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वैसे यदि वास्तविकता की बात करें तो गांवों में इतने टेलर नहीं कि वह इतनी बड़ी संख्या में यूनिफार्म सिलकर दे सकें। इसलिए यूनिफार्म माफिया का सहारा लिया जा रहा है और यही माफिया यूनिफार्म के लिए व्यय होने वाले कपड़े और सिलाई का अलग-अलग बिल आदा कर रहे हैं, जबकि ठेका एक ही व्यक्ति ले रहा है।
यूनिफार्म वितरण के लिए कपड़े और सिलाई दोनों का ही अलग-अलग काम दिया जाता है, इसलिए वह टेंडर के दायरे में नहीं आते हैं। जनपद में अभी किसी भी विद्यालय में यूनिफार्म के लिए टेंडर नहीं निकाला गया है।
- अंबरीष कुमार, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, ललितपुर।