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नियमों को ताक पर रखकर संचालित हो रही आरा मशीनें
Updated Mon, 11 Sep 2017 02:39 AM IST
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नियमों को ताक पर रखकर संचालित हो रही आरा मशीनें
ललितपुर।
जिले में पंजीकृत आरा मशीनें नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से लकड़ी का चिरान कर रही है। इस दौरान लकड़ी का चिरान कराने के लिए पहुंच रहे लोगों से न तो निकासी प्रमाण पत्र और न ही इसकी अनुमति मांगी जा रही है। ऐसे में अवैध कटान कर लाई गई लकड़ी का चिरान आसानी से हो रहा है। जिस पर विभागीय अफसरों का तनिक भी ध्यान नहीं है। इससे वन और विभाग को भारी क्षति पहुंच रही है।
शहरीकरण के चलते जंगलों का आकार निरंतर हो रहा है। जिसे ध्यान में रखकर हर साल लाखों पौधों का रोपण कराया जा रहा है। इस मामले में बुंदेलखंड का ललितपुर जिला समृद्ध है। यहां 74 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फैले जंगल में विभिन्न प्रजातियों के पेड़ लगे हुए हैं। इसमें सागौन, शीशम, गुरार, आम, महुआ की लकड़ी का इस्तेमाल भवनों की खिड़की व दरवाजे में काम आती है। इसके अलावा सोफे आदि भी बनाए जाते हैं। जिस कारण लकड़ी कारोबारियों की इन पेड़ों पर सीधी नजर रहती है। इसके चलते विभिन्न वन रेंजों में इमारती लकड़ी वाले पेड़ों की संख्या में भारी कमी आई है। कारोबारी न केवल कीमती पेड़ों का कटान कराने में सफल हो रहे हैं बल्कि उसका चिरान कराकर मालामाल हो रहे हैं। इस तरह जिले में लकड़ी का कारोबार चल निकला है। शहर में ही जगह-जगह सोफे, बेड बनाने की वर्क्स शॉप खुल गए हैं। हालांकि, विभाग ने लकड़ी के चिरान के लिए तमाम नियम कायदे बनाते हुए आरामशीन के लाइसेंस जारी किए हैं। इस समय जनपद की विभिन्न रेंजों के अंतर्गत करीब 39 आरामशीन संचालित हो रही हैं। इन संचालकों को विभागीय नियमों से भलीभांति परिचित कराया गया है। इसमें सुबह नौ बजे से रात्रि पांच बजे तक ही लकड़ी का चिरान करने के निर्देश हैं। इसके अतिरिक्त लकड़ी लेकर पहुंचने वाले व्यक्ति से लकड़ी के निकासी व कटान की अनुमति का पत्र मांगने का भी नियम है। लेकिन, संचालक मुनाफा कमाने के खातिर नियम कायदों की अनदेखी करा रहे हैं। इससे पेड़ों के अवैध कटान को बढ़ावा मिल रहा है। सूत्र बताते हैं कि इन आरामशीनों का स्थलीय निरीक्षण भी नहीं किया जा रहा है। जिससे मशीन संचालक पूरी तरह बेपरवाह हो गए हैं। तमाम आरामशीनों पर इमारती लकड़ी का भंडारण लगा है, जिसका उनके पास कोई ब्योरा भी नहीं है। इस मामले में विभागीय अफसर मौन बने हैं।
ललितपुर में चल रही आधा दर्जन मशीनें
ललितपुर वन रेंज अंतर्गत करीब आधा दर्जन आरा मशीन संचालित हो रही हैं। इसमें से एक आरामशीन पर इमारती लकड़ी का बड़े पैमाने पर स्टाक है। इससे स्पष्ट है कि इस मशीन पर इमारती लकड़ी का ज्यादा चिरान होता है। पौधशाला के बगल में होने से विभागीय भंडारण में रखी लकड़ी के गायब होने का खतरा बढ़ गया है। पिछले दिनों पिकअप में बरामद हुई लकड़ी को लेकर तरह-तरह की चर्चा है। सूत्र बताते हैं कि इस लकड़ी को आरामशीन पर चिरान के लिए भेजा जा रहा था। इसके बाद चिरान की गई लकड़ी को जनपद से बाहर भेजने की योजना थी। जिसकी पड़ताल एसडीओ आरके त्रिपाठी कर रहे हैं।
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क्षेत्रांतर्गत अफसरों को निरीक्षण के हैं निर्देश
जिस समय लाइसेंस जारी किए जाते हैं, उस समय संचालक को विभाग की सेवा शर्तों से अवगत करा दिया जाता है। इसके अलावा संचालकों की मनमानी को रोकने के लिए समय-समय पर निरीक्षण किए जाते हैं। क्षेत्रांतर्गत अफसरों को निरीक्षण करने के निर्देश पहले से ही हैं।
वीके यादव, प्रभारी डीएफओ, ललितपुर।
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ललितपुर।
जिले में पंजीकृत आरा मशीनें नियमों को ताक पर रखकर धड़ल्ले से लकड़ी का चिरान कर रही है। इस दौरान लकड़ी का चिरान कराने के लिए पहुंच रहे लोगों से न तो निकासी प्रमाण पत्र और न ही इसकी अनुमति मांगी जा रही है। ऐसे में अवैध कटान कर लाई गई लकड़ी का चिरान आसानी से हो रहा है। जिस पर विभागीय अफसरों का तनिक भी ध्यान नहीं है। इससे वन और विभाग को भारी क्षति पहुंच रही है।
शहरीकरण के चलते जंगलों का आकार निरंतर हो रहा है। जिसे ध्यान में रखकर हर साल लाखों पौधों का रोपण कराया जा रहा है। इस मामले में बुंदेलखंड का ललितपुर जिला समृद्ध है। यहां 74 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में फैले जंगल में विभिन्न प्रजातियों के पेड़ लगे हुए हैं। इसमें सागौन, शीशम, गुरार, आम, महुआ की लकड़ी का इस्तेमाल भवनों की खिड़की व दरवाजे में काम आती है। इसके अलावा सोफे आदि भी बनाए जाते हैं। जिस कारण लकड़ी कारोबारियों की इन पेड़ों पर सीधी नजर रहती है। इसके चलते विभिन्न वन रेंजों में इमारती लकड़ी वाले पेड़ों की संख्या में भारी कमी आई है। कारोबारी न केवल कीमती पेड़ों का कटान कराने में सफल हो रहे हैं बल्कि उसका चिरान कराकर मालामाल हो रहे हैं। इस तरह जिले में लकड़ी का कारोबार चल निकला है। शहर में ही जगह-जगह सोफे, बेड बनाने की वर्क्स शॉप खुल गए हैं। हालांकि, विभाग ने लकड़ी के चिरान के लिए तमाम नियम कायदे बनाते हुए आरामशीन के लाइसेंस जारी किए हैं। इस समय जनपद की विभिन्न रेंजों के अंतर्गत करीब 39 आरामशीन संचालित हो रही हैं। इन संचालकों को विभागीय नियमों से भलीभांति परिचित कराया गया है। इसमें सुबह नौ बजे से रात्रि पांच बजे तक ही लकड़ी का चिरान करने के निर्देश हैं। इसके अतिरिक्त लकड़ी लेकर पहुंचने वाले व्यक्ति से लकड़ी के निकासी व कटान की अनुमति का पत्र मांगने का भी नियम है। लेकिन, संचालक मुनाफा कमाने के खातिर नियम कायदों की अनदेखी करा रहे हैं। इससे पेड़ों के अवैध कटान को बढ़ावा मिल रहा है। सूत्र बताते हैं कि इन आरामशीनों का स्थलीय निरीक्षण भी नहीं किया जा रहा है। जिससे मशीन संचालक पूरी तरह बेपरवाह हो गए हैं। तमाम आरामशीनों पर इमारती लकड़ी का भंडारण लगा है, जिसका उनके पास कोई ब्योरा भी नहीं है। इस मामले में विभागीय अफसर मौन बने हैं।
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ललितपुर में चल रही आधा दर्जन मशीनें
ललितपुर वन रेंज अंतर्गत करीब आधा दर्जन आरा मशीन संचालित हो रही हैं। इसमें से एक आरामशीन पर इमारती लकड़ी का बड़े पैमाने पर स्टाक है। इससे स्पष्ट है कि इस मशीन पर इमारती लकड़ी का ज्यादा चिरान होता है। पौधशाला के बगल में होने से विभागीय भंडारण में रखी लकड़ी के गायब होने का खतरा बढ़ गया है। पिछले दिनों पिकअप में बरामद हुई लकड़ी को लेकर तरह-तरह की चर्चा है। सूत्र बताते हैं कि इस लकड़ी को आरामशीन पर चिरान के लिए भेजा जा रहा था। इसके बाद चिरान की गई लकड़ी को जनपद से बाहर भेजने की योजना थी। जिसकी पड़ताल एसडीओ आरके त्रिपाठी कर रहे हैं।
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क्षेत्रांतर्गत अफसरों को निरीक्षण के हैं निर्देश
जिस समय लाइसेंस जारी किए जाते हैं, उस समय संचालक को विभाग की सेवा शर्तों से अवगत करा दिया जाता है। इसके अलावा संचालकों की मनमानी को रोकने के लिए समय-समय पर निरीक्षण किए जाते हैं। क्षेत्रांतर्गत अफसरों को निरीक्षण करने के निर्देश पहले से ही हैं।
वीके यादव, प्रभारी डीएफओ, ललितपुर।