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दो वर्ष तक के बच्चों को पूरक आहार दिया तो होगी कार्रवाई
Updated Wed, 08 Aug 2018 03:16 AM IST
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मां के दूध का विकल्प नहीं डब्बा बंद आहार
विश्व स्तनपान सप्ताह विशेष
दो वर्ष तक के बच्चों को पूरक आहार देने का प्रचार पड़ करना सकता महंगा
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। मां के दूध के विकल्प के तौर पर किसी भी डब्बा बंद दूध, शिशु आहार या दूध की बोतलों का उत्पादन, आपूर्ति, वितरण या प्रचार नहीं कर सकता है। यदि कोई ऐसा करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
मां के दूध का कोई विकल्प नहीं है। जन्म के शुरुआती छह माह तक शिशु को सिर्फ स्तनपान कराना अनिवार्य है। छह माह से दो साल तक के बच्चे को स्तनपान के साथ पूरक आहार देना जरूरी है। इस समय बाजार में डब्बा बंद शिशु आहार आ रहे हैं। इसे ध्यान में रखकर भारत सरकार की ओर से महिला और बाल विकास कल्याण मंत्रालय द्वारा 1992 में शिशु दुग्धाहार विकल्प, दुग्धपान बोतल एवं शिशु आहार अधिनियम को लागू किया गया था, जिसे वर्ष 2003 में संशोधित किया गया। इस अधिनियम के तहत कोई भी मां के दूध के विकल्प के तौर पर किसी भी डब्बा बंद दूध, शिशु आहार या दूध की बोतलों का उत्पादन, आपूर्ति, वितरण या प्रचार नहीं कर सकता है। इस अधिनियम के तहत प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी व्यक्ति को दो साल से कम उम्र के बच्चों के लिए दुग्धाहार विकल्प, दुग्धपान बोतल या शिशु आहार खरीदने अथवा उपयोग करने के लिए किसी भी तरीके से प्रोत्साहित करना प्रतिबंधित है। इस अधिनियम का उद्देश्य है, दो वर्ष तक के बच्चों के दूध के विकल्प व संबंधित उत्पादों के समर्थन पर रोक लगाना है। वहीं, गर्भवती महिला और धात्री माताओं को शिक्षित व जागरूक करना, शिशु दूध के विकल्प और शिशु खाद्य सामग्री को बाधित और नियंत्रित करना, चिकित्सा संस्थान और स्वास्थ्य कार्यकर्ता को उनकी भूमिका और उत्तरदायित्व को बताना और जागरूक करना है। इस संबंध में डॉ. एस बरिया बाल रोग विशेषज्ञ ने बताया कि एक नवजात के लिए सर्वप्रथम मां का दूध ही सर्वोपरि होता है। मां के दूध से निकलने वाले पोषक तत्व सबसे ज्यादा प्रभावी होते है जो बाहर मिलने वाले दूध और खाद्य सामग्री की तुलना में काफी हद तक बेहतर होते हैं। यदि इस नियम का कोई उल्लंघन करता है तो उसे छह माह से तीन साल तक की सजा एवं 2 से 5 हजार तक का जुर्माना या दोनों के लिए कार्रवाई की जा सकती है।
क्या बैन है आईएमएस एक्ट के अंतर्गत
वह सभी प्रकार के खाद्य पदार्थ जो 2 वर्ष तक के बच्चों के लिए बने हैं।
स्वास्थ्य कार्यकर्ता एवं माताओं को उपहार और मुफ्त सेम्पल देना।
बच्चों की खाने वाली सामग्रियों की पैकिंग लेबल पर माँ या बच्चों की फोटो लगाना।
कंपनी द्वारा बिक्री प्रोत्साहन के स्टाफ के वेतन पर कमीशन देना।
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विश्व स्तनपान सप्ताह विशेष
दो वर्ष तक के बच्चों को पूरक आहार देने का प्रचार पड़ करना सकता महंगा
अमर उजाला ब्यूरो
ललितपुर। मां के दूध के विकल्प के तौर पर किसी भी डब्बा बंद दूध, शिशु आहार या दूध की बोतलों का उत्पादन, आपूर्ति, वितरण या प्रचार नहीं कर सकता है। यदि कोई ऐसा करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।
मां के दूध का कोई विकल्प नहीं है। जन्म के शुरुआती छह माह तक शिशु को सिर्फ स्तनपान कराना अनिवार्य है। छह माह से दो साल तक के बच्चे को स्तनपान के साथ पूरक आहार देना जरूरी है। इस समय बाजार में डब्बा बंद शिशु आहार आ रहे हैं। इसे ध्यान में रखकर भारत सरकार की ओर से महिला और बाल विकास कल्याण मंत्रालय द्वारा 1992 में शिशु दुग्धाहार विकल्प, दुग्धपान बोतल एवं शिशु आहार अधिनियम को लागू किया गया था, जिसे वर्ष 2003 में संशोधित किया गया। इस अधिनियम के तहत कोई भी मां के दूध के विकल्प के तौर पर किसी भी डब्बा बंद दूध, शिशु आहार या दूध की बोतलों का उत्पादन, आपूर्ति, वितरण या प्रचार नहीं कर सकता है। इस अधिनियम के तहत प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से किसी भी व्यक्ति को दो साल से कम उम्र के बच्चों के लिए दुग्धाहार विकल्प, दुग्धपान बोतल या शिशु आहार खरीदने अथवा उपयोग करने के लिए किसी भी तरीके से प्रोत्साहित करना प्रतिबंधित है। इस अधिनियम का उद्देश्य है, दो वर्ष तक के बच्चों के दूध के विकल्प व संबंधित उत्पादों के समर्थन पर रोक लगाना है। वहीं, गर्भवती महिला और धात्री माताओं को शिक्षित व जागरूक करना, शिशु दूध के विकल्प और शिशु खाद्य सामग्री को बाधित और नियंत्रित करना, चिकित्सा संस्थान और स्वास्थ्य कार्यकर्ता को उनकी भूमिका और उत्तरदायित्व को बताना और जागरूक करना है। इस संबंध में डॉ. एस बरिया बाल रोग विशेषज्ञ ने बताया कि एक नवजात के लिए सर्वप्रथम मां का दूध ही सर्वोपरि होता है। मां के दूध से निकलने वाले पोषक तत्व सबसे ज्यादा प्रभावी होते है जो बाहर मिलने वाले दूध और खाद्य सामग्री की तुलना में काफी हद तक बेहतर होते हैं। यदि इस नियम का कोई उल्लंघन करता है तो उसे छह माह से तीन साल तक की सजा एवं 2 से 5 हजार तक का जुर्माना या दोनों के लिए कार्रवाई की जा सकती है।
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क्या बैन है आईएमएस एक्ट के अंतर्गत
वह सभी प्रकार के खाद्य पदार्थ जो 2 वर्ष तक के बच्चों के लिए बने हैं।
स्वास्थ्य कार्यकर्ता एवं माताओं को उपहार और मुफ्त सेम्पल देना।
बच्चों की खाने वाली सामग्रियों की पैकिंग लेबल पर माँ या बच्चों की फोटो लगाना।
कंपनी द्वारा बिक्री प्रोत्साहन के स्टाफ के वेतन पर कमीशन देना।