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समाजवादी विचाराधारा आगे बढ़ाने में जुटे रहे कर्पूरी
Updated Mon, 29 Jan 2018 01:00 AM IST
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समाजवादी विचाराधारा आगे बढ़ाने में जुटे रहे कर्पूरी
ललितपुर। स्थानीय शिक्षक रैन बसेरा में जननायक कर्पूरी ठाकुर सेवा समिति (रजि.) के तत्वाधान में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जननायक कर्पूरी ठाकुर की 94 वीं जयंती पर भारतीय राजनीति में उनके योगदान विषय पर आयोजित गोष्ठी में उन्हें अमूल्य धरोहर के समान बताया गया।
मुख्य अतिथि रघु ठाकुर ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर दुनिया के अनूठे मुख्यमंत्री थे, जिन्होंने समाजवादी विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए पिछड़े वर्ग के उत्थान के लिए जीवन भर कार्य किया। अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए भूपेंद्र जैन ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर ने विषम परिस्थितियों में राजनीति जैसे कठिन क्षेत्र को चुना। विशिष्ट अतिथि तालबेहट नगर पंचायत की अध्यक्ष मुक्ता सोनी ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर ने कम समय में ही दलितों, किसानों, मजदूरों के रहनुमा के रूप में अपनी पहचान बनाई। उनकी कर्मठता, उनका अनुकरणीय त्याग और बलिदान हमारे लिए एक अमूल्य धरोहर के समान है जो हमें सदैव राष्ट्र प्रेम एवं जनसेवा के लिए अनुप्रेरित करता रहेगा। सुदर्शन डिग्री कालेज के संस्थापक पूर्व प्राचार्य डॉ. रविन्द्र नाथ यादव ने कहा कि बिहार के पितौझिया जिला समस्तीपुर में नाई परिवार में गोकुल ठाकुर के यहां जन्मे कर्पूरी ठाकुर 1952 में पहली बार बिहार विधान सभा के सदस्य चुने गए। उसके बाद वह कभी चुनाव नही हारे। झोपड़ी के लाल जननायक कर्पूरी ठाकुर ऐसे प्रदेश के मुख्यमन्त्री बने, जहां की राजनीति का मूल आधार कैश, कास्ट और क्रिमनल हो। समाजवादी पार्टी ेी जिला अध्यक्ष व जिला पंचायत सदस्य ज्योति लोधी ने कहा कि 1967 में बिहार में पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार बनी तो कर्पूरी जी उप मुख्यमंत्री-वित्त और शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी दी गई। उस दौरान उन्होंने ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए मैट्रिक के पाठ्यक्रम से अंग्रेजी की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया था। जिला पंचायत सदस्य बंशीधर श्रीवास व समाजवादी विचारक लक्ष्मी नारायण विश्वकर्मा ने कहा कि ईमानदारी, नम्रता कर्मठता और राजनीतिक कौशल ही कर्पूरी ठाकुर के हथियार थे। इसके अलावा अपना दल की प्रदेश सचिव अर्चना पटेल, कवि शिक्षक दूधलाल यादव, मुक्ति संस्था के महामंत्री कन्हैया लाल नामदेव, समाजवादी विचारक ठाकुर राघवेंद्र सिंह सिमिरिया व रमेश कुमार नापित टीकमगढ़ ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में डॉ. पूरन सिंह निरजंन, अमित प्रिय जैन, नेपाल सिंह यादव, राजपाल यादव फौजी, आधार सिंह यादव आदि उपस्थित रहे। संचालन शिक्षक लखनलाल आर्य ने किया। अंत में आभार पत्रकार गौरीशंकर सेन ने व्यक्त किया।
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ललितपुर। स्थानीय शिक्षक रैन बसेरा में जननायक कर्पूरी ठाकुर सेवा समिति (रजि.) के तत्वाधान में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जननायक कर्पूरी ठाकुर की 94 वीं जयंती पर भारतीय राजनीति में उनके योगदान विषय पर आयोजित गोष्ठी में उन्हें अमूल्य धरोहर के समान बताया गया।
मुख्य अतिथि रघु ठाकुर ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर दुनिया के अनूठे मुख्यमंत्री थे, जिन्होंने समाजवादी विचारधारा को आगे बढ़ाते हुए पिछड़े वर्ग के उत्थान के लिए जीवन भर कार्य किया। अध्यक्षीय उद्बोधन देते हुए भूपेंद्र जैन ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर ने विषम परिस्थितियों में राजनीति जैसे कठिन क्षेत्र को चुना। विशिष्ट अतिथि तालबेहट नगर पंचायत की अध्यक्ष मुक्ता सोनी ने कहा कि कर्पूरी ठाकुर ने कम समय में ही दलितों, किसानों, मजदूरों के रहनुमा के रूप में अपनी पहचान बनाई। उनकी कर्मठता, उनका अनुकरणीय त्याग और बलिदान हमारे लिए एक अमूल्य धरोहर के समान है जो हमें सदैव राष्ट्र प्रेम एवं जनसेवा के लिए अनुप्रेरित करता रहेगा। सुदर्शन डिग्री कालेज के संस्थापक पूर्व प्राचार्य डॉ. रविन्द्र नाथ यादव ने कहा कि बिहार के पितौझिया जिला समस्तीपुर में नाई परिवार में गोकुल ठाकुर के यहां जन्मे कर्पूरी ठाकुर 1952 में पहली बार बिहार विधान सभा के सदस्य चुने गए। उसके बाद वह कभी चुनाव नही हारे। झोपड़ी के लाल जननायक कर्पूरी ठाकुर ऐसे प्रदेश के मुख्यमन्त्री बने, जहां की राजनीति का मूल आधार कैश, कास्ट और क्रिमनल हो। समाजवादी पार्टी ेी जिला अध्यक्ष व जिला पंचायत सदस्य ज्योति लोधी ने कहा कि 1967 में बिहार में पहली बार गैर कांग्रेसी सरकार बनी तो कर्पूरी जी उप मुख्यमंत्री-वित्त और शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी दी गई। उस दौरान उन्होंने ऐतिहासिक निर्णय लेते हुए मैट्रिक के पाठ्यक्रम से अंग्रेजी की अनिवार्यता को समाप्त कर दिया था। जिला पंचायत सदस्य बंशीधर श्रीवास व समाजवादी विचारक लक्ष्मी नारायण विश्वकर्मा ने कहा कि ईमानदारी, नम्रता कर्मठता और राजनीतिक कौशल ही कर्पूरी ठाकुर के हथियार थे। इसके अलावा अपना दल की प्रदेश सचिव अर्चना पटेल, कवि शिक्षक दूधलाल यादव, मुक्ति संस्था के महामंत्री कन्हैया लाल नामदेव, समाजवादी विचारक ठाकुर राघवेंद्र सिंह सिमिरिया व रमेश कुमार नापित टीकमगढ़ ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम में डॉ. पूरन सिंह निरजंन, अमित प्रिय जैन, नेपाल सिंह यादव, राजपाल यादव फौजी, आधार सिंह यादव आदि उपस्थित रहे। संचालन शिक्षक लखनलाल आर्य ने किया। अंत में आभार पत्रकार गौरीशंकर सेन ने व्यक्त किया।
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