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भीगी आंखों से सुपुर्द-ए-खाक किए ताजिए व बुर्राक
Updated Mon, 02 Oct 2017 01:19 AM IST
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भीगी आंखों से सुुपुर्द-ए-खाक किए ताजिए व बुर्राक
ललितपुर। हज़रत इमाम हसन और हुसैन के साथ कर्बला में शहीद हुए 72 साथियों की याद में मोहर्रम की दसवीं तारीख को रविवार की रात शहर में ताजिए व बुर्राक का जुलूस निकाला गया। शहीदों को याद कर जुलूस में लोगों की आंखें नम रहीं। युवाओं ने मातमपुर्सी करते हुए अली का लश्कर या हुसैन की सदाएं बुलंद कीं। अंत में ताजिए व बुर्राक को डोंड़ाघाट स्थित करबला ले जाकर सुपुर्द ए खाक किया किया।
पैगंबर-ए-इस्लाम हज़रत मोहम्मद साहब के नवासे हज़रत इमाम हसन और हुसैन की शहादत पर शहर में ताजिए और बुर्राक का जुलूस निकाला गया। रविवार को जौहर की नमाज के बाद अपने मुकाम से उठकर कई मुहल्लों के ताजिए उठकर मुहल्लों में जुलूस के रुप में निकाले गए, बाद में घंटाघर पर एकत्रित हुए। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने ताजिया के निकट बैठकर फातहा पढ़ी और इमाम हसन और हुसैन को याद किया। यहां जामा मस्जिद घुसायाना, मुहल्ला कसाई मंडी, सदनशाह, अजीतापुरा, पुरानी बजरिया, आजादचौक आदि स्थानों से ताजियों का जुलूस निकाला गया। घंटाघर पहुंचने पर तालाबपुरा, गांधीनगर के ताजिए व बुर्राक शामिल हुए। यहां ताजियों की जियारत के लिए नगर व आसपास के क्षेत्रों के लोग शामिल हुए। कर्बला में शहीद हुए हसन हुसैन और उनके 72 सार्थियों को यादकर लोगों की आंखें नम हो गईं। ताजियों के जुलूस में विभिन्न अखाड़ों के युवाओं ने जंग के प्रतीक के रुप में हैरतअंगेज प्रदर्शन किए। यहां ताजिया जुलूस के दौरान अली का लश्कर या हुसैन की सदाएं बुलंद होती रहीं। अकीदतमंदों ने ताजियों पर शाम की फातिहा पढ़ी। सावरकर चौक पर मातमपुर्सी के बाद ताजिए व बुर्राक करबला पर ले जाकर सुपुर्द-ए-खाक किया गया। ताजियों के जुलूस को शांति पूर्वक निकालने के लिए नगर पालिका द्वारा साफ सफाई व जिला व पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए।
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ललितपुर। हज़रत इमाम हसन और हुसैन के साथ कर्बला में शहीद हुए 72 साथियों की याद में मोहर्रम की दसवीं तारीख को रविवार की रात शहर में ताजिए व बुर्राक का जुलूस निकाला गया। शहीदों को याद कर जुलूस में लोगों की आंखें नम रहीं। युवाओं ने मातमपुर्सी करते हुए अली का लश्कर या हुसैन की सदाएं बुलंद कीं। अंत में ताजिए व बुर्राक को डोंड़ाघाट स्थित करबला ले जाकर सुपुर्द ए खाक किया किया।
पैगंबर-ए-इस्लाम हज़रत मोहम्मद साहब के नवासे हज़रत इमाम हसन और हुसैन की शहादत पर शहर में ताजिए और बुर्राक का जुलूस निकाला गया। रविवार को जौहर की नमाज के बाद अपने मुकाम से उठकर कई मुहल्लों के ताजिए उठकर मुहल्लों में जुलूस के रुप में निकाले गए, बाद में घंटाघर पर एकत्रित हुए। मुस्लिम समुदाय के लोगों ने ताजिया के निकट बैठकर फातहा पढ़ी और इमाम हसन और हुसैन को याद किया। यहां जामा मस्जिद घुसायाना, मुहल्ला कसाई मंडी, सदनशाह, अजीतापुरा, पुरानी बजरिया, आजादचौक आदि स्थानों से ताजियों का जुलूस निकाला गया। घंटाघर पहुंचने पर तालाबपुरा, गांधीनगर के ताजिए व बुर्राक शामिल हुए। यहां ताजियों की जियारत के लिए नगर व आसपास के क्षेत्रों के लोग शामिल हुए। कर्बला में शहीद हुए हसन हुसैन और उनके 72 सार्थियों को यादकर लोगों की आंखें नम हो गईं। ताजियों के जुलूस में विभिन्न अखाड़ों के युवाओं ने जंग के प्रतीक के रुप में हैरतअंगेज प्रदर्शन किए। यहां ताजिया जुलूस के दौरान अली का लश्कर या हुसैन की सदाएं बुलंद होती रहीं। अकीदतमंदों ने ताजियों पर शाम की फातिहा पढ़ी। सावरकर चौक पर मातमपुर्सी के बाद ताजिए व बुर्राक करबला पर ले जाकर सुपुर्द-ए-खाक किया गया। ताजियों के जुलूस को शांति पूर्वक निकालने के लिए नगर पालिका द्वारा साफ सफाई व जिला व पुलिस प्रशासन द्वारा सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए।
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