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हिंदी दिवस पर हुआ महाविद्यालयों में संगोष्ठी का आयोजन
Updated Fri, 15 Sep 2017 03:03 AM IST
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हिंदी दिवस पर हुआ महाविद्यालयों में संगोष्ठी का आयोजन
ललितपुर।
केपीएस डिग्री कॉलेज में गुरुवार को हिंदी दिवस पर एक गोष्ठी का आयोजन प्राचार्य डॉ. कपिलनाथ श्रंगी ऋषि की अध्यक्षता में किया गया। इस मौके पर कॉलेज के प्राध्यापकों के द्वारा हिंदी विषय और हिंदी दिवस मानने के प्रयोजनों पर प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम की शुरुआत सहायक प्राध्यापक अखिलेश बबेले ने हिंदी की संवैधानिक स्थिति और आज के समय में इसकी दिशा, दशा पर विचार व्यक्त किए। हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. जनक किशोरी शर्मा ने हिंदी के गौरव और हिंदी भाषा के योगदान विशेषकर, स्वतंत्रता आंदोलन में हिंदी कवियों के योगदान को याद किया। श्रंगीऋषि ने हिंदी में अपने आप को दूर करने के दुस्साहस से बचने को कहा। इस मौके पर डॉ. जितेंद्र राजपूत, डॉ. रजनी चौबे, राजीव चौबे, दीपक जैन, सल्लन अली, दयाराम झा, सौरभ तिवारी, छाया तिवारी, अरुणा सिंह, स्वाति सिंह, सोनम मिश्रा, अनीता साहू, राहुल चौबे, इरशाद खान, रीतेश शर्मा, दिग्यविजय एवं छात्र-छात्राएं आदि उपस्थित रहे।
वहीं, रानी लक्ष्मीबाई महाविद्यालय में भी हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें राष्ट्रीय भाषा के इतिहास और हिंदी को राष्ट्रीय भाषा को दर्जा दिलाने तक के तमाम उतार चढ़ावों पर प्रकाश डाला गया। महाविद्यालय के प्रबंधक राजेश यादव ने प्रमुख रूप इस बात पर जोर दिया कि हिंदी बोलचाल भी गौरवान्वित करने का अवसर देती है एवं हम अंग्रेजी के सामने मनोवैज्ञानिक रुप से खुद को पिछड़ा समझते हैं। महाविद्यालय के प्रवक्ता अवधेश गुरु रावत ने अमीर खुसरो से लेकर भारतेंदु हरिश्चंद्र और आधुनिक हिंदी के लेखकों और कवियों के हिंदी के विकास में योगदान की भूमिका पर प्रकाश डाला और उनके योगदान को हिंदी के परिमार्जन के लिए आवश्यक भी बताया। इस मौके पर सीता शुक्ला, नोडल आफिसर नरेंद्र रावत, प्रियंका राजपूत, सोना दीक्षित, भावना सेन उपस्थित रहे और संचालन सीमा राजपूत ने किया ।
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ललितपुर।
केपीएस डिग्री कॉलेज में गुरुवार को हिंदी दिवस पर एक गोष्ठी का आयोजन प्राचार्य डॉ. कपिलनाथ श्रंगी ऋषि की अध्यक्षता में किया गया। इस मौके पर कॉलेज के प्राध्यापकों के द्वारा हिंदी विषय और हिंदी दिवस मानने के प्रयोजनों पर प्रकाश डाला गया। कार्यक्रम की शुरुआत सहायक प्राध्यापक अखिलेश बबेले ने हिंदी की संवैधानिक स्थिति और आज के समय में इसकी दिशा, दशा पर विचार व्यक्त किए। हिंदी विभागाध्यक्ष डॉ. जनक किशोरी शर्मा ने हिंदी के गौरव और हिंदी भाषा के योगदान विशेषकर, स्वतंत्रता आंदोलन में हिंदी कवियों के योगदान को याद किया। श्रंगीऋषि ने हिंदी में अपने आप को दूर करने के दुस्साहस से बचने को कहा। इस मौके पर डॉ. जितेंद्र राजपूत, डॉ. रजनी चौबे, राजीव चौबे, दीपक जैन, सल्लन अली, दयाराम झा, सौरभ तिवारी, छाया तिवारी, अरुणा सिंह, स्वाति सिंह, सोनम मिश्रा, अनीता साहू, राहुल चौबे, इरशाद खान, रीतेश शर्मा, दिग्यविजय एवं छात्र-छात्राएं आदि उपस्थित रहे।
वहीं, रानी लक्ष्मीबाई महाविद्यालय में भी हिंदी दिवस के उपलक्ष्य में एक संगोष्ठी का आयोजन किया गया, जिसमें राष्ट्रीय भाषा के इतिहास और हिंदी को राष्ट्रीय भाषा को दर्जा दिलाने तक के तमाम उतार चढ़ावों पर प्रकाश डाला गया। महाविद्यालय के प्रबंधक राजेश यादव ने प्रमुख रूप इस बात पर जोर दिया कि हिंदी बोलचाल भी गौरवान्वित करने का अवसर देती है एवं हम अंग्रेजी के सामने मनोवैज्ञानिक रुप से खुद को पिछड़ा समझते हैं। महाविद्यालय के प्रवक्ता अवधेश गुरु रावत ने अमीर खुसरो से लेकर भारतेंदु हरिश्चंद्र और आधुनिक हिंदी के लेखकों और कवियों के हिंदी के विकास में योगदान की भूमिका पर प्रकाश डाला और उनके योगदान को हिंदी के परिमार्जन के लिए आवश्यक भी बताया। इस मौके पर सीता शुक्ला, नोडल आफिसर नरेंद्र रावत, प्रियंका राजपूत, सोना दीक्षित, भावना सेन उपस्थित रहे और संचालन सीमा राजपूत ने किया ।
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