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जिले में अपराधियों को दबोचने में हॉफ रहे उड़ाका दल
Updated Fri, 01 Sep 2017 09:43 PM IST
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अपराधियों को दबोचने में हाफ रहे उड़ाका दल
ललितपुर।
जिले में आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने को लेकर गठित किए गए विभिन्न विभागों के उड़ाका दलों के वाहन हांफते नजर आ रहे हैं। इसकी बानगी वन और आबकारी विभाग है। दोनों ही विभागों के वाहन खस्ताहाल अवस्था में हैं, ऐसे में अपराधी अपने मंसूबों में कामयाब हो रहे हैं। जिससे शासन व प्रशासन की मंशा पर पानी फिरता दिख रहा है।
शासन ने राजस्व में बढ़ोत्तरी और अवैध कार्यों पर अंकुश लगाने के निर्देश विभागीय अफसरों को दे रखे हैं। जिसे ध्यान में रखकर बिजली विभाग, परिवहन विभाग, वाणिज्य कर विभाग, वन विभाग, आबकारी विभाग सहित कई विभागों ने उड़ाका दल का गठन किया है। जिसमें वन विभाग एवं आबकारी विभाग द्वारा उड़ाका दल को वाहन उपलब्ध कराए हैं जो खस्ताहाल अवस्था में हैं। न केवल वाहनों की स्पीड कम हो गई है बल्कि पेट्रोल/डीजल की खपत बढ़ गई है। कमोवेश यही स्थिति में एसडीओ महरौनी व ललितपुर के वाहन हैं। इसी दौर से आबकारी विभाग भी गुजर रहा है। इन हालात में छापामार कार्रवाई के दौरान वाहन अपराधियों का पीछा ठीक तरीके से नहीं कर पा रहे हैं। कई बार तो वाहन की वजह से अपराधी चंगुल में आते-आते हाथ से निकल जाते हैं। शातिर किस्म के अपराधी वाहनों की खस्ताहाल स्थिति को भांप कर इसका अनुचित फायदा उठा रहे हैं। बता दें कि आबकारी विभाग अवैध शराब तो वन विभाग अवैध खनन एवं कटान चुनौती बना हुआ है। उधर, बेसिक शिक्षा अधिकारी का वाहन नगर संसाधन केंद्र में धूल फांक रहा है। उन्होंने लापरवाह शिक्षकों को पकड़ने के लिए किराए पर अलग से वाहन ले रखा है। वहीं, खंड शिक्षा अधिकारी व जिला समन्वयको को वाहन के अभाव में मोटरसाइकिल से काम चलाना पड़ रहा है। अन्य विभागों में भी वाहनों की हालत ठीक नहीं है। शायद यही वजह है कि तमाम विभाग लक्ष्य के सापेक्ष राजस्व वसूलने में पिछड़ते जा रहे हैं। बीते दिनों डीएम मानवेंद्र सिंह ने समीक्षा के दौरान राजस्व वसूली कम होने पर नाराजी जाहिर की थी। इसके बाद भी राजस्व वसूली में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है।
नई वाहनों की है जरूरत
विभाग में वाहनों की स्थिति अच्छी नहीं है। वह स्वयं जरूरत पड़ने पर अपना व्यक्तिगत वाहन इस्तेमाल करते हैं। शासन से नए वाहनों की डिमांड की गई है। वर्तमान में उपलब्ध वाहनों से ही काम चलाया जा रहा है।
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वीके यादव
एसडीओ, महरौनी वन विभाग
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ललितपुर।
जिले में आपराधिक गतिविधियों पर अंकुश लगाने को लेकर गठित किए गए विभिन्न विभागों के उड़ाका दलों के वाहन हांफते नजर आ रहे हैं। इसकी बानगी वन और आबकारी विभाग है। दोनों ही विभागों के वाहन खस्ताहाल अवस्था में हैं, ऐसे में अपराधी अपने मंसूबों में कामयाब हो रहे हैं। जिससे शासन व प्रशासन की मंशा पर पानी फिरता दिख रहा है।
शासन ने राजस्व में बढ़ोत्तरी और अवैध कार्यों पर अंकुश लगाने के निर्देश विभागीय अफसरों को दे रखे हैं। जिसे ध्यान में रखकर बिजली विभाग, परिवहन विभाग, वाणिज्य कर विभाग, वन विभाग, आबकारी विभाग सहित कई विभागों ने उड़ाका दल का गठन किया है। जिसमें वन विभाग एवं आबकारी विभाग द्वारा उड़ाका दल को वाहन उपलब्ध कराए हैं जो खस्ताहाल अवस्था में हैं। न केवल वाहनों की स्पीड कम हो गई है बल्कि पेट्रोल/डीजल की खपत बढ़ गई है। कमोवेश यही स्थिति में एसडीओ महरौनी व ललितपुर के वाहन हैं। इसी दौर से आबकारी विभाग भी गुजर रहा है। इन हालात में छापामार कार्रवाई के दौरान वाहन अपराधियों का पीछा ठीक तरीके से नहीं कर पा रहे हैं। कई बार तो वाहन की वजह से अपराधी चंगुल में आते-आते हाथ से निकल जाते हैं। शातिर किस्म के अपराधी वाहनों की खस्ताहाल स्थिति को भांप कर इसका अनुचित फायदा उठा रहे हैं। बता दें कि आबकारी विभाग अवैध शराब तो वन विभाग अवैध खनन एवं कटान चुनौती बना हुआ है। उधर, बेसिक शिक्षा अधिकारी का वाहन नगर संसाधन केंद्र में धूल फांक रहा है। उन्होंने लापरवाह शिक्षकों को पकड़ने के लिए किराए पर अलग से वाहन ले रखा है। वहीं, खंड शिक्षा अधिकारी व जिला समन्वयको को वाहन के अभाव में मोटरसाइकिल से काम चलाना पड़ रहा है। अन्य विभागों में भी वाहनों की हालत ठीक नहीं है। शायद यही वजह है कि तमाम विभाग लक्ष्य के सापेक्ष राजस्व वसूलने में पिछड़ते जा रहे हैं। बीते दिनों डीएम मानवेंद्र सिंह ने समीक्षा के दौरान राजस्व वसूली कम होने पर नाराजी जाहिर की थी। इसके बाद भी राजस्व वसूली में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं दे रहा है।
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नई वाहनों की है जरूरत
विभाग में वाहनों की स्थिति अच्छी नहीं है। वह स्वयं जरूरत पड़ने पर अपना व्यक्तिगत वाहन इस्तेमाल करते हैं। शासन से नए वाहनों की डिमांड की गई है। वर्तमान में उपलब्ध वाहनों से ही काम चलाया जा रहा है।
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वीके यादव
एसडीओ, महरौनी वन विभाग