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विश्व शौचालय दिवसः किसी ने शौचालय में भरीं ईंटें तो कोई बांध रहा पशु
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ग्राम पंचायत कोठिया के शौचालय के बाहर बंधे पशु।
लखीमपुर खीरी। जिला ओडीएफ (खुले में शौच मुक्त) घोषित किया जा चुका है। मगर गांवों में अभी हालात इसके उलट हैं। किसी ने शौचालय में ईंटें भर रखी हैं, तो पशु बांध रहा है। सामुदायिक शौचालयों पर ताले लटक रहे हैं। अभी तमाम लोग खुले में शौच के लिए जाते हैं। कुछ घरों में शौचालय ही नहीं हैं।
जनपद की कुल आबादी करीब 50 लाख है। 1165 ग्राम पंचायतें हैं। मोदी सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत सभी गांवों को ओडीएफ बनाने के लिए अभियान चलाया गया था। पंचायती राज विभाग द्वारा अब तक 4,79,686 व्यक्तिगत शौचालयों का निर्माण कराया जा चुका है। इसके अलावा प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक-एक सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया जा रहा है। अभी तक करीब 50 प्रतिशत ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय बनाए जा सके हैं।
स्वच्छ भारत मिशन फेस टू चलाया जा रहा है, जिसमें वंचित परिवारों को व्यक्तिगत शौचालय का लाभ दिया जा रहा है। साथ ही लोगों को शौचालय का प्रयोग करने के लिए प्रेरित करने का भी लक्ष्य विभाग को दिया गया है। इसके बावजूद सभी गांवों को ओडीएफ नहीं बनाया जा सका है। लोगों को शौचालय का प्रयोग करने के लिए जागरूक करने के अभियान में पंचायती राज विभाग पिछड़ गया है। इसी का नतीजा है कि अभी तमाम गांवों में लोग शौचालय का प्रयोग नहीं कर रहे हैं। शौचालयों में ईंटें या उपले भर हैं, तो कहीं पशु बांधे जा रहे हैं। खुले में शौच करने से रोकने के लिए गांवों में निगरानी समितियां बनाई गई थीं, जो अब निष्क्रिय हो चुकी हैं। लिहाजा गांवों को ओडीएफ बनाने का काम अभी तक पूरा नहीं हो पाया है।
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सामुदायिक शौचालयों में लटक रहे ताले
गांवों में जिन परिवारों के घरों में शौचालय नहीं बने हैं, उनकी सुविधा के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत में सामुदायिक शौचालय बनाए गए हैं। जिले की सभी 1165 ग्राम पंचायतों में सार्वजनिक शौचालय बनाए गए है। सामुदायिक शौचालयों का संचालन महिला स्वयं सहायता समूहों को दिया गया है। बावजूद इसके सामुदायिक शौचालयों पर ताले लटक रहे हैं।
जनपद में 2014 के बाद से अब तक 4,79,686 व्यक्तिगत शौचालयों का निर्माण कराया जा चुका है। आबादी बढ़ने के साथ ही नए परिवार भी बन रहे हैं, जिससे उन्हें शौचालय का लाभ देकर संतृप्त करने की दिशा में काम किया जा रहा है। कुछ जगहों पर सामुदायिक शौचालयों के बंद होने के मामले संज्ञान में आए हैं, जिसकी जांच कराकर आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। जिन लोगों ने शौचालयों में उपले या ईंटें भर रखी हैं, उन्हें शौचालय का प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
- सौम्य शील सिंह, डीपीआरओ
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जनपद की कुल आबादी करीब 50 लाख है। 1165 ग्राम पंचायतें हैं। मोदी सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत सभी गांवों को ओडीएफ बनाने के लिए अभियान चलाया गया था। पंचायती राज विभाग द्वारा अब तक 4,79,686 व्यक्तिगत शौचालयों का निर्माण कराया जा चुका है। इसके अलावा प्रत्येक ग्राम पंचायत में एक-एक सामुदायिक शौचालय का निर्माण कराया जा रहा है। अभी तक करीब 50 प्रतिशत ग्राम पंचायतों में सामुदायिक शौचालय बनाए जा सके हैं।
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स्वच्छ भारत मिशन फेस टू चलाया जा रहा है, जिसमें वंचित परिवारों को व्यक्तिगत शौचालय का लाभ दिया जा रहा है। साथ ही लोगों को शौचालय का प्रयोग करने के लिए प्रेरित करने का भी लक्ष्य विभाग को दिया गया है। इसके बावजूद सभी गांवों को ओडीएफ नहीं बनाया जा सका है। लोगों को शौचालय का प्रयोग करने के लिए जागरूक करने के अभियान में पंचायती राज विभाग पिछड़ गया है। इसी का नतीजा है कि अभी तमाम गांवों में लोग शौचालय का प्रयोग नहीं कर रहे हैं। शौचालयों में ईंटें या उपले भर हैं, तो कहीं पशु बांधे जा रहे हैं। खुले में शौच करने से रोकने के लिए गांवों में निगरानी समितियां बनाई गई थीं, जो अब निष्क्रिय हो चुकी हैं। लिहाजा गांवों को ओडीएफ बनाने का काम अभी तक पूरा नहीं हो पाया है।
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सामुदायिक शौचालयों में लटक रहे ताले
गांवों में जिन परिवारों के घरों में शौचालय नहीं बने हैं, उनकी सुविधा के लिए प्रत्येक ग्राम पंचायत में सामुदायिक शौचालय बनाए गए हैं। जिले की सभी 1165 ग्राम पंचायतों में सार्वजनिक शौचालय बनाए गए है। सामुदायिक शौचालयों का संचालन महिला स्वयं सहायता समूहों को दिया गया है। बावजूद इसके सामुदायिक शौचालयों पर ताले लटक रहे हैं।
जनपद में 2014 के बाद से अब तक 4,79,686 व्यक्तिगत शौचालयों का निर्माण कराया जा चुका है। आबादी बढ़ने के साथ ही नए परिवार भी बन रहे हैं, जिससे उन्हें शौचालय का लाभ देकर संतृप्त करने की दिशा में काम किया जा रहा है। कुछ जगहों पर सामुदायिक शौचालयों के बंद होने के मामले संज्ञान में आए हैं, जिसकी जांच कराकर आवश्यक कार्यवाही की जाएगी। जिन लोगों ने शौचालयों में उपले या ईंटें भर रखी हैं, उन्हें शौचालय का प्रयोग करने के लिए प्रेरित किया जाएगा।
- सौम्य शील सिंह, डीपीआरओ