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मतदाताओं को रिझाने और मनाने का दौर तेज
बांकेगंज।
Updated Mon, 31 Aug 2015 04:27 PM IST
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त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के लिए मतदान तिथि की घोषणा अभी नहीं हुई है लेकिन चुनाव नजदीक आते ही मतदाताओं को रिझाने-लुभाने और समझाने-बुझाने का दौर तेज हो गया है। साथ ही मौजूदा प्रधान पुराने गिले शिकवे भुलाकर अपने पक्ष में मतदान करने के लिए लोगों को मनाने में जुटे हुए हैं।
संभावित उम्मीदवार नए-नए वादे कर मतदाताओं को विकास के सपने दिखा रहे हैं। वर्तमान प्रधान की खामियां उजागर कर भविष्य संवारने का भी वादा कर रहे हैं। वहीं वर्तमान और पूर्व प्रधानों को आम जनता के गिले शिकवों से जूझना पड़ रहा है। इस बार पंचायत चुनावों में मतदाताओं की जागरूकता संभावित उम्मीदवारों के लिए सिरदर्द बन गई है। गांव में सड़क, बिजली, पानी, और शिक्षा के मुद्दों को लेकर लोगों में वर्तमान और पूर्व प्रधानों के प्रति गुस्सा है। ऐसे में संभावित उम्मीदवारों को समझ में नहीं आ रहा है कि वोटरों को कैसे समझाएं। कैसे उन्हें बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने का भरोसा दिलाएं।
चुनाव नजदीक आ रहे हैं। संभावित उम्मीदवार अभी से दिन-रात एक करके जीत के लिए गांवों की गलियों में पसीना बहाते नजर आ रहे हें। त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के लिए घमासान मचा हुआ है। गांव का मुखिया बनने का सपना संजोए बैठे कोई उम्मीदवार कहीं इलाके के असरदार लोगों की चिरौरी कर रहे हैं तो कोई जाति-बिरादरी के ठेकेदारों की चापलूसी करते दिखाई दे रहे हैं।
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पति, पिता और बेटों ने थामी कमान
त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के लिए अभी आरक्षण की सूची जारी नहीं हुई है। इसको लेकर संभावित दावेदारों की धुकधुकी बढ़ी हुई है। साथ ही कयासों का दौर जारी है। बावजूद इसके अभी से संभावित महिला उम्मीदवारों का चुनाव प्रबंधन उनके पति और ससुर संभाल रहे हैं तो दूसरी तरफ संभावित युवा उम्मीदवारों के चुनाव की कमान उनके पिता संभाल रहे हैं। कई ग्राम पंचायतों में तो पिता के चुनाव की कमान उनके पुत्रों ने अपने हाथों में ले रखी है।
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मतदाता चुप, संभावित उम्मीदवार परेशान
इस बार उम्मीदवार बेचैन हैं और मतदाता खामोश। हमेशा मतदाताओं को बेवकूफ बनाने वाले इन प्रधानों को इस बार मतदाता बेवकूफ बना रहा है। मतदाता खुलकर सामने आना तो दूर जुबान तक खोलना गंवारा नहीं कर रहा है।
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संभावित उम्मीदवार नए-नए वादे कर मतदाताओं को विकास के सपने दिखा रहे हैं। वर्तमान प्रधान की खामियां उजागर कर भविष्य संवारने का भी वादा कर रहे हैं। वहीं वर्तमान और पूर्व प्रधानों को आम जनता के गिले शिकवों से जूझना पड़ रहा है। इस बार पंचायत चुनावों में मतदाताओं की जागरूकता संभावित उम्मीदवारों के लिए सिरदर्द बन गई है। गांव में सड़क, बिजली, पानी, और शिक्षा के मुद्दों को लेकर लोगों में वर्तमान और पूर्व प्रधानों के प्रति गुस्सा है। ऐसे में संभावित उम्मीदवारों को समझ में नहीं आ रहा है कि वोटरों को कैसे समझाएं। कैसे उन्हें बुनियादी सुविधाएं मुहैया कराने का भरोसा दिलाएं।
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चुनाव नजदीक आ रहे हैं। संभावित उम्मीदवार अभी से दिन-रात एक करके जीत के लिए गांवों की गलियों में पसीना बहाते नजर आ रहे हें। त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के लिए घमासान मचा हुआ है। गांव का मुखिया बनने का सपना संजोए बैठे कोई उम्मीदवार कहीं इलाके के असरदार लोगों की चिरौरी कर रहे हैं तो कोई जाति-बिरादरी के ठेकेदारों की चापलूसी करते दिखाई दे रहे हैं।
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पति, पिता और बेटों ने थामी कमान
त्रिस्तरीय पंचायत चुनावों के लिए अभी आरक्षण की सूची जारी नहीं हुई है। इसको लेकर संभावित दावेदारों की धुकधुकी बढ़ी हुई है। साथ ही कयासों का दौर जारी है। बावजूद इसके अभी से संभावित महिला उम्मीदवारों का चुनाव प्रबंधन उनके पति और ससुर संभाल रहे हैं तो दूसरी तरफ संभावित युवा उम्मीदवारों के चुनाव की कमान उनके पिता संभाल रहे हैं। कई ग्राम पंचायतों में तो पिता के चुनाव की कमान उनके पुत्रों ने अपने हाथों में ले रखी है।
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मतदाता चुप, संभावित उम्मीदवार परेशान
इस बार उम्मीदवार बेचैन हैं और मतदाता खामोश। हमेशा मतदाताओं को बेवकूफ बनाने वाले इन प्रधानों को इस बार मतदाता बेवकूफ बना रहा है। मतदाता खुलकर सामने आना तो दूर जुबान तक खोलना गंवारा नहीं कर रहा है।