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Lakhimpur Kheri News: समूह की महिलाओं को काम करने को मिलेगी जगह, बनेंगे वर्किंग शेड
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लखीमपुर खीरी। जनपद की स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के लिए ब्लाक स्तर पर वर्किंग शेड का निर्माण कराया जाएगा, ताकि महिलाएं यहां पर आकर अपना काम कर सके। वर्किंग शेड का निर्माण मनरेगा से कराया जाना है। जमीन उपलब्ध के लिए संबंधित अफसरों को पत्र लिखा गया है।
जनपद में करीब 20 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूह हैं, जिनसे लाखों महिलाएं जुड़ी हैं। महिलाएं विभिन्न प्रकार के उत्पादन तैयार करती हैं और उनको बेचकर आय उठाती है। समूह की महिलाएं पुष्टाहार तैयार करने से लेकर गांव में वितरण तक का काम करती हैं। तमाम महिलाएं अनुपयोगी वस्तुओं से उपयोगी चीजें बनाकर उनको अच्छे दामों पर बेचती हैं।
महिलाएं जलकुंभी, केले के रेसे से तमाम प्रकार के उत्पादन तैयार करती हैं। इतना ही नहीं फिटर, प्लंबर और पंप ऑपरेटर जैसी तकनीकी भूमिकाएं भी संभाल रही हैं। जिला मुख्यालय पर आकांक्षा हट भी चलाती हैं, जहां समूह की महिलाओं के हाथों से तैयार उत्पादन बेचे जाते हैं। अधिकांश महिलाएं अपने उत्पादन गांवों व घरों पर ही तैयार करती हैं।
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घर पर काम करने का माहौल नहीं मिल पाता है। महिलाओं को काम का एक स्थान देने के उद्देश्य से प्रत्येक ब्लॉक में वर्किंग शेड का निर्माण कराया जाना है, ताकि महिलाएं यहां पर आकर अपना काम कर सके। साथ ही एक दूसरे का काम भी देखेंगी और अन्य उत्पादनों को तैयार करने की प्रेरणा मिलेगी।
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जनपद में करीब 20 हजार से अधिक स्वयं सहायता समूह हैं, जिनसे लाखों महिलाएं जुड़ी हैं। महिलाएं विभिन्न प्रकार के उत्पादन तैयार करती हैं और उनको बेचकर आय उठाती है। समूह की महिलाएं पुष्टाहार तैयार करने से लेकर गांव में वितरण तक का काम करती हैं। तमाम महिलाएं अनुपयोगी वस्तुओं से उपयोगी चीजें बनाकर उनको अच्छे दामों पर बेचती हैं।
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महिलाएं जलकुंभी, केले के रेसे से तमाम प्रकार के उत्पादन तैयार करती हैं। इतना ही नहीं फिटर, प्लंबर और पंप ऑपरेटर जैसी तकनीकी भूमिकाएं भी संभाल रही हैं। जिला मुख्यालय पर आकांक्षा हट भी चलाती हैं, जहां समूह की महिलाओं के हाथों से तैयार उत्पादन बेचे जाते हैं। अधिकांश महिलाएं अपने उत्पादन गांवों व घरों पर ही तैयार करती हैं।
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घर पर काम करने का माहौल नहीं मिल पाता है। महिलाओं को काम का एक स्थान देने के उद्देश्य से प्रत्येक ब्लॉक में वर्किंग शेड का निर्माण कराया जाना है, ताकि महिलाएं यहां पर आकर अपना काम कर सके। साथ ही एक दूसरे का काम भी देखेंगी और अन्य उत्पादनों को तैयार करने की प्रेरणा मिलेगी।