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महिलाओं ने बैंक पर स्वरोजगार के लिए ऋण न देने का आरोप लगाया
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हंगामा करतीं महिलाएं।
बैंक मैनेजर ने आरोपों को निराधार बताया, बोले- लोन के लिए आवश्यक था भौतिक सत्यापन
निघासन। महिलाओं को रोजगार के लिए ऋण देने वाली बंधन बैंक के मैनेजर पर छेदुई पतिया की महिलाओं ने कर्ज न देने का आरोप लगाया है। उधर, बैंक मैनेजर का कहना है कि जीरो बैलेंस से खाता खोले गए हैं। कर्ज देने से मना करने के आरोप निराधार हैं।
ग्राम पंचायत छेदुई पतिया के पतिया और धोबीपुरवा गांवों की रामपती, तुलसी, सुष्मिता सुशीला, मंजू, सुनीता और पुष्पा आदि ने बताया कि बंधन बैंक अकेले या समूह बनाकर व्यवसाय करने वाली महिलाओं को कर्ज देता है। इन लोगों ने अपना काम शुरू करने के लिए बंधन बैंक से संपर्क किया। इस पर उनको ऋण मंजूर करने का आश्वासन देकर उनके बचत खाते खोल लिए गए। महिलाओं ने आरोप लगाया कि ऊपर से पैसा न दे पाने पर उनका कर्ज मंजूर नहीं किया गया और उनको अपात्र घोषित कर दिया गया। इन महिलाओं ने बैंक मैनेजर और स्टाफ की बैंक के आला अफसरों से शिकायत की है।
इस बाबत बैंक मैनेजर तसदीक खान ने बताया कि उनका बैंक महिलाओं को काम शुरू करने के लिए पहली बार में तीस हजार रुपये तक लोन देता है। लेनदेन और कर्ज भुगतान ठीक रहने पर बैंक आगे ज्यादा लोन भी दे देता है। इन महिलाओं को पतिया में जनसेवा केंद्र संचालित करने वाला युवक शिवनरायन लाया था। महिलाओं को गांव जाकर भौतिक सत्यापन के बाद लोन मंजूर करने का आश्वासन दिया गया था।
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शिवनरायन ने इन लोगों के जीरो बैलेंस से बचत खाते खुलवाए थे। गांव जाकर भौतिक सत्यापन के दौरान जानकारी करने पर इन लोगों के माफिक तथ्य पता नहीं चले, इसी वजह से कर्ज देने से मना कर दिया गया। बैंक को कर्ज देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। बैंक अपना पैसा जानबूझकर फंसने वाली जगह पर इन्वेस्ट नहीं कर सकता।
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निघासन। महिलाओं को रोजगार के लिए ऋण देने वाली बंधन बैंक के मैनेजर पर छेदुई पतिया की महिलाओं ने कर्ज न देने का आरोप लगाया है। उधर, बैंक मैनेजर का कहना है कि जीरो बैलेंस से खाता खोले गए हैं। कर्ज देने से मना करने के आरोप निराधार हैं।
ग्राम पंचायत छेदुई पतिया के पतिया और धोबीपुरवा गांवों की रामपती, तुलसी, सुष्मिता सुशीला, मंजू, सुनीता और पुष्पा आदि ने बताया कि बंधन बैंक अकेले या समूह बनाकर व्यवसाय करने वाली महिलाओं को कर्ज देता है। इन लोगों ने अपना काम शुरू करने के लिए बंधन बैंक से संपर्क किया। इस पर उनको ऋण मंजूर करने का आश्वासन देकर उनके बचत खाते खोल लिए गए। महिलाओं ने आरोप लगाया कि ऊपर से पैसा न दे पाने पर उनका कर्ज मंजूर नहीं किया गया और उनको अपात्र घोषित कर दिया गया। इन महिलाओं ने बैंक मैनेजर और स्टाफ की बैंक के आला अफसरों से शिकायत की है।
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इस बाबत बैंक मैनेजर तसदीक खान ने बताया कि उनका बैंक महिलाओं को काम शुरू करने के लिए पहली बार में तीस हजार रुपये तक लोन देता है। लेनदेन और कर्ज भुगतान ठीक रहने पर बैंक आगे ज्यादा लोन भी दे देता है। इन महिलाओं को पतिया में जनसेवा केंद्र संचालित करने वाला युवक शिवनरायन लाया था। महिलाओं को गांव जाकर भौतिक सत्यापन के बाद लोन मंजूर करने का आश्वासन दिया गया था।
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शिवनरायन ने इन लोगों के जीरो बैलेंस से बचत खाते खुलवाए थे। गांव जाकर भौतिक सत्यापन के दौरान जानकारी करने पर इन लोगों के माफिक तथ्य पता नहीं चले, इसी वजह से कर्ज देने से मना कर दिया गया। बैंक को कर्ज देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। बैंक अपना पैसा जानबूझकर फंसने वाली जगह पर इन्वेस्ट नहीं कर सकता।