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भक्ति के बिना मानव जीवन पूर्ण नहीं होता
लखीमपुर खीरी
Updated Fri, 03 Jul 2015 07:51 PM IST
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पंजाबी कॉलोनी स्थित ऋषि आश्रम में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा वाचक स्वामी संत शरण ने बताया कि मानव जीवन बिना भक्ति के परिपूर्ण नहीं होता। जीवन में सब मिल जाए तो इस जीवन का आधार ही समाप्त हो जाता है।
उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा हमें भक्ति से परिपूर्ण कर देती है। इसीलिए त्रेता युग में भगवान शिव माता सती के साथ अगत्स्य ऋषि की कुटिया पर गए थे। शिवजी ने कथा सुनी। मां सती के मन में अहंकार आने के कारण कथा के भाव से वंचित रह गईं। मार्ग में वापस जाते समय उन्हें राम जी के दर्शन हुए। शिवजी ने उन्हें प्रणाम किया लेकिन सती ने भ्रम किया। परीक्षा लेने गई सीता का रूप बनाया और वापस आकर शिव जी से झूठ बोल दिया। शिव जी को पता चल गया उन्होंने सती का परित्याग कर दिया। सती माता ने अपने पिता के यज्ञ में शिवजी का अपमान देखकर अपना शरीर त्याग दिया और पार्वती के रूप में हिमालय के यहां जन्म लिया।
पार्वती ने देवर्षि नारद को गुरु मानकर शिवजी का पाने के लिए तपस्या की। शिव जी भूत प्रेतों के साथ गए इससे हिमालय वासी डर गए लेकिन नारद ने शिव के वास्तविक रूप का ज्ञान कराया तब जाकर शिव पार्वती का विवाह हुआ। संत ने कहा कि जबतक अपने वास्तविक रूप का ज्ञान नहीं होता तब तक शिवजी की प्राप्ति नहीं होती।
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उन्होंने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा हमें भक्ति से परिपूर्ण कर देती है। इसीलिए त्रेता युग में भगवान शिव माता सती के साथ अगत्स्य ऋषि की कुटिया पर गए थे। शिवजी ने कथा सुनी। मां सती के मन में अहंकार आने के कारण कथा के भाव से वंचित रह गईं। मार्ग में वापस जाते समय उन्हें राम जी के दर्शन हुए। शिवजी ने उन्हें प्रणाम किया लेकिन सती ने भ्रम किया। परीक्षा लेने गई सीता का रूप बनाया और वापस आकर शिव जी से झूठ बोल दिया। शिव जी को पता चल गया उन्होंने सती का परित्याग कर दिया। सती माता ने अपने पिता के यज्ञ में शिवजी का अपमान देखकर अपना शरीर त्याग दिया और पार्वती के रूप में हिमालय के यहां जन्म लिया।
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पार्वती ने देवर्षि नारद को गुरु मानकर शिवजी का पाने के लिए तपस्या की। शिव जी भूत प्रेतों के साथ गए इससे हिमालय वासी डर गए लेकिन नारद ने शिव के वास्तविक रूप का ज्ञान कराया तब जाकर शिव पार्वती का विवाह हुआ। संत ने कहा कि जबतक अपने वास्तविक रूप का ज्ञान नहीं होता तब तक शिवजी की प्राप्ति नहीं होती।
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