{"_id":"5ff758158ebc3e2e7117b52e","slug":"wild-life-lakhimpur-news-bly4328974158","type":"story","status":"publish","title_hn":"तराई में फिर से आबाद होने लगी गिद्धों की दुनिया","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
तराई में फिर से आबाद होने लगी गिद्धों की दुनिया
विज्ञापन
गणना के दौरान दुधवा टाइगर रिजर्व में दिखाई दिए गिद्ध। संवाद
- फोटो : LAKHIMPUR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। तेजी से लुप्त हो रहे गिद्धों की संख्या में पिछले दो वर्ष के अंतराल में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हाल ही में गिद्धों की गणना के जो परिणाम सामने आए हैं वह काफी उत्साहजनक हैं। दो साल पहले हुई गणना में दुधवा टाइगर रिजर्व में महज 18 गिद्ध पाए गए थे, जबकि दिसंबर 2020 की गणना में यहां कुल 182 गिद्ध मिले हैं।
कभी बहुतायत संख्या में पाए जाने वाले गिद्धों की संख्या में लगातार गिरावट आनी शुरू हुई तो सन 2000 के अंत तक 98 फीसदी गिद्ध गायब हो गए। देश में केवल दो फीसदी गिद्ध ही बचे थे, जिसका प्रमुख कारण पशुओं को दी जाने वाली दर्द नाशक (डाइकलोफेनिक) नामक दवा बताई जाती है। दरअसल, डाइकलोफेनिक दवा का इस्तेमाल कर चुके पशुओं की किसी कारण से मौत हो जाने पर उनका मांस खाने से गिद्धों की मौत हो रही थी। डाइकलोफेनिक दवा के दुष्प्रभाव से गिद्धों की संख्या में आ रही भारी कमी से चिंतित सरकार ने डाइकलोफेनिक दवा को प्रतिबंधित कर दिया। पूरे तराई क्षेत्र को डाइकलोफेनिक फ्री जोन घोषित किया गया, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आने शुरू हो गए हैं।
दुधवा टाइगर रिजर्व में जब दिसंबर 2018 और जनवरी 2019 में गिद्धों की गणना कराई गई तो यहां मात्र 18 गिद्ध ही दिखाई दिए थे, जिसमें दुधवा नेशनल पार्क में एक भी गिद्ध नहीं दिखाई दिया था, जबकि कतर्निया घाट (वन्यजीव विहार) में 10 तो बफरजोन में 18 गिद्ध ही दिखाई दिए। दो साल बाद दिसंबर 2020 में फिर गिद्धों की गणना कराई गई तो इसमें कुल 182 गिद्ध दिखाई दिए। दुधवा नेशनल पार्क और किशनपुर सेंक्चुरी में 94, कतर्निया घाट ( वन्यजीव विहार ) 35 और बफरजोन में 53 गिद्ध दिखाई दिए। भले ही यह संख्या अधिक नहीं है लेकिन गिद्धों की आबादी में हो रही यह बढ़ोतरी उत्साहजनक है।
विज्ञापन
जाने माने पर्यावरणविद एवं राज्य वन्यजीव सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य डॉ वीपी सिंह ने बताया कि डाइकलोफेनिक दवा पर प्रतिबंध के बाद गिद्धों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। यह बात हाल में हुई गिद्धों की गणना से साबित हो रही है। लेकिन अभी और सावधानी बरतने एवं गिद्धों के संरक्षण के लिए और अधिक प्रयास किए जाने की जरूरत है।
-
दिसंबर 2020 में दुधवा टाइगर रिजर्व में गिद्धों की गणना कराई गई। जिसमें दुधवा नेशनल पार्क समेत कतर्निया घाट (वन्यजीव विहार) और बफरजोन में कुल 182 गिद्ध दिखाई दिए हैं। यह गिद्धों के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों का परिणाम है।
- संजय पाठक, मुख्य वन संरक्षक / फील्ड निदेशक,दुधवा टाइगर रिजर्व
दुधवा में बाघ और भालुओं के कुनबे में भी हुआ है इजाफा
बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व में चल रहे संरक्षण और संवर्धन के प्रयासों के चलते बाघ और भालुओं के कुनबे में भी इजाफा हुआ है। बाघों के लिए सर्वाधिक अनुकूल प्राकृतिवास माने जाने वाले टाइगर रिजर्व जंगल में एक तरफ जहां बाघों की संख्या 68 से बढ़कर 107 हो गई है, तो वहीं वर्तमान समय में 100 के करीब भालू हैं। जबकि एक दशक पहले इनकी संख्या 70 के आसपास थी। इसी तरह दुधवा टाइगर रिजर्व के दक्षिण सोनारीपुर रेंज में सन 1984 में करीब 30 वर्ग किलोमीटर के एरिया को विद्युत चालित तारों की बाड़ से घेरकर गैंडों का नया घर तैयार किया गया था। इसमें असम से तीन मादा के अलावा दो नर और नेपाल से चार मादा गैंडे लाकर शुरू की गई इस परियोजना में गैंडों की संख्या बढ़कर 42 हुई है। संवाद
विज्ञापन
कभी बहुतायत संख्या में पाए जाने वाले गिद्धों की संख्या में लगातार गिरावट आनी शुरू हुई तो सन 2000 के अंत तक 98 फीसदी गिद्ध गायब हो गए। देश में केवल दो फीसदी गिद्ध ही बचे थे, जिसका प्रमुख कारण पशुओं को दी जाने वाली दर्द नाशक (डाइकलोफेनिक) नामक दवा बताई जाती है। दरअसल, डाइकलोफेनिक दवा का इस्तेमाल कर चुके पशुओं की किसी कारण से मौत हो जाने पर उनका मांस खाने से गिद्धों की मौत हो रही थी। डाइकलोफेनिक दवा के दुष्प्रभाव से गिद्धों की संख्या में आ रही भारी कमी से चिंतित सरकार ने डाइकलोफेनिक दवा को प्रतिबंधित कर दिया। पूरे तराई क्षेत्र को डाइकलोफेनिक फ्री जोन घोषित किया गया, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आने शुरू हो गए हैं।
विज्ञापन
दुधवा टाइगर रिजर्व में जब दिसंबर 2018 और जनवरी 2019 में गिद्धों की गणना कराई गई तो यहां मात्र 18 गिद्ध ही दिखाई दिए थे, जिसमें दुधवा नेशनल पार्क में एक भी गिद्ध नहीं दिखाई दिया था, जबकि कतर्निया घाट (वन्यजीव विहार) में 10 तो बफरजोन में 18 गिद्ध ही दिखाई दिए। दो साल बाद दिसंबर 2020 में फिर गिद्धों की गणना कराई गई तो इसमें कुल 182 गिद्ध दिखाई दिए। दुधवा नेशनल पार्क और किशनपुर सेंक्चुरी में 94, कतर्निया घाट ( वन्यजीव विहार ) 35 और बफरजोन में 53 गिद्ध दिखाई दिए। भले ही यह संख्या अधिक नहीं है लेकिन गिद्धों की आबादी में हो रही यह बढ़ोतरी उत्साहजनक है।
विज्ञापन
जाने माने पर्यावरणविद एवं राज्य वन्यजीव सलाहकार परिषद के पूर्व सदस्य डॉ वीपी सिंह ने बताया कि डाइकलोफेनिक दवा पर प्रतिबंध के बाद गिद्धों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है। यह बात हाल में हुई गिद्धों की गणना से साबित हो रही है। लेकिन अभी और सावधानी बरतने एवं गिद्धों के संरक्षण के लिए और अधिक प्रयास किए जाने की जरूरत है।
-
दिसंबर 2020 में दुधवा टाइगर रिजर्व में गिद्धों की गणना कराई गई। जिसमें दुधवा नेशनल पार्क समेत कतर्निया घाट (वन्यजीव विहार) और बफरजोन में कुल 182 गिद्ध दिखाई दिए हैं। यह गिद्धों के संरक्षण के लिए किए जा रहे प्रयासों का परिणाम है।
- संजय पाठक, मुख्य वन संरक्षक / फील्ड निदेशक,दुधवा टाइगर रिजर्व
दुधवा में बाघ और भालुओं के कुनबे में भी हुआ है इजाफा
बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व में चल रहे संरक्षण और संवर्धन के प्रयासों के चलते बाघ और भालुओं के कुनबे में भी इजाफा हुआ है। बाघों के लिए सर्वाधिक अनुकूल प्राकृतिवास माने जाने वाले टाइगर रिजर्व जंगल में एक तरफ जहां बाघों की संख्या 68 से बढ़कर 107 हो गई है, तो वहीं वर्तमान समय में 100 के करीब भालू हैं। जबकि एक दशक पहले इनकी संख्या 70 के आसपास थी। इसी तरह दुधवा टाइगर रिजर्व के दक्षिण सोनारीपुर रेंज में सन 1984 में करीब 30 वर्ग किलोमीटर के एरिया को विद्युत चालित तारों की बाड़ से घेरकर गैंडों का नया घर तैयार किया गया था। इसमें असम से तीन मादा के अलावा दो नर और नेपाल से चार मादा गैंडे लाकर शुरू की गई इस परियोजना में गैंडों की संख्या बढ़कर 42 हुई है। संवाद