फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Lakhimpur Kheri News ›   wild life

बाघ आबादी में, खामियाजा भुगत रहे ग्रामीण

Thu, 16 Jan 2020 09:45 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 16 Jan 2020 09:45 PM IST
विज्ञापन
wild life
बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। खीरी जिला मानव-वन्यजीव संघर्ष से जूझ रहा है। कभी बाघ तो कभी तेंदुए का हमला। कभी हाथियों का उत्पात, लेकिन हर बार ग्रामीणों को ही इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। बाघ और वन्यजीवों का तराई के जंगलों में बढ़ना वन विभाग और वन्यजीव विशेषज्ञों की नजर में जहां जैव विविधता समृद्ध होने का संकेत माना जा रहा है, वहीं ग्रामीणों खासकर किसानों की मुसीबत बढ़ती जा रही हैं। वन विभाग इन वन्यजीवों को जंगल के अंदर सीमित रखने में कामयाब नहीं हो पा रहा है।
विज्ञापन

जिले में 1.20 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र 884 वर्ग किलोमीटर घने जंगल हैं। जिनमें 100 से अधिक बाघ तो करीब 200 जंगली हाथियों के अलावा हजारों की संख्या में शाकाहारी वन्यजीव हैं। बाघों की बढ़ती संख्या के लिहाज से जंगल का दायरा कम पड़ने लगा है। बाघों को अपनी टेरीटरी बनाने के लिए भी पर्याप्त जंगल नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में बाघों, तेंदुओं और हाथियों का जंगल से बाहर खेतों में आना आम बात हो गई है। बाघों और तेंदुओं के हमले से जहां इंसानों और पालतू जानवरों की जाने जा रही हैं, वहीं हाथी फसल उजाड़ रहे हैं। वन विभाग इसके बदले केवल मुआवजा देकर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेता है।
विज्ञापन

वन विभाग का कहना है कि जंगली जानवरों को एक सीमित दायरे में रोक पाना संभव नहीं है, लेकिन लोगों का कहना है कि इसके लिए कुछ ऐसे कदम जरूर उठाए जा सकते हैं जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष में काफी हद तक कमी आ सके। वन विभाग ने अब तक वन्यजीवों की सुरक्षा और उनकी निगरानी के लिए तो कई योजनाएं बनाईं, लेकिन इंसानों और पालतू जानवरों की सुरक्षा के लिए इसमें कोई योजना शामिल नहीं की है।
विज्ञापन
विज्ञापन


तराई आर्कलैंड स्केप योजना परवान चढ़ती तो कम होता मानव-वन्यजीव संघर्ष
बाघों और हाथियों का जंगल में वितरण और घनत्व असंतुलित है। कहीं पर बाघ अधिक हैं तो किसी जंगल में बिल्कुल नहीं हैं। बाघों के स्वछंद विचरण के लिए वन विभाग ने तराई आर्कलैंड स्केप योजना बनाई थी। इसके तहत सभी जंगलों को एक दूसरे से जोड़ा जाना था, लेकिन 15 साल में इस योजना पर 15 फीसदी भी काम नहीं हो पाया। इससे सीमित जगह में बाघों का घनत्व बढ़ने से मानव-वन्यजीव संघर्ष की घटनाएं बढ़ रही हैं।

वन विभाग के पास है स्टाफ की कमी
वन विभाग के पास स्टाफ की खासकर फील्ड स्टाफ की काफी कमी है। एसडीओ से लेकर वन रक्षक तक के जितने पद सृजित हैं उनके मुकाबले संख्या बहुत कम है। इससे वन्यजीवों की मॉनीटरिंग प्रभावित होती है।

जंगल के चारों तरफ खाईं खोदने और सौर ऊर्जा बाड़ लगाने की योजना नहीं
मानव-वन्यजीव संघर्ष की स्थित में कई बार वन्यजीव विशेषज्ञों ने राय दी कि जंगल के चारों और गहरी खाई खोदकर और सौर उर्जा चलित बाड़ लगाकर वन्यजीवों को जंगल के अंदर सीमित रखा जा सकता है, लेकिन वन विभाग ने इस योजना पर भी कभी गौर नहीं किया।

क्या कहते हैं किसान
बांकेगंज ब्लॉक की डाटपुर पंचायत के प्रधान हंसराम, गुलाग नगर गांव निवासी डॉ जहीर अहमद, झालापुरवा के श्याम सुंदर शर्मा और मधुरे सिंह का कहना है कि वन विभाग जंगल के अंदर वन्यजीवों को सीमित रखने के प्रति गंभीरता से काम नहीं कर रहा है। जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है। जंगल से सटी आबादी के गांवों में बाघ और तेंदुए इंसानों पर हमला कर या तो उन्हें घायल कर रहे हैं या उनकी जान ले रहे हैं। परेशान किसानों का कहना है कि हिंसक वन्यजीवों की चहलकदमी के चलते जीना मुहाल हो रहा है।


मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने के लिए ग्लोबल टाइगर फोरम समेत कई संस्थाएं काम कर रही हैं। उनके अध्ययन के अनुसार इस स्थिति से निपटने की योजना बनाई जा रही है।
-डॉ अनिल कुमार पटेल, उपनिदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed