{"_id":"5ff89dcd8ebc3e2e6e5ef515","slug":"wild-animals-lakhimpur-news-bly433031448","type":"story","status":"publish","title_hn":"घेराबंदी के बाद भी बाघ को नहीं किया जा सका ट्रैंक्युलाइज","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
घेराबंदी के बाद भी बाघ को नहीं किया जा सका ट्रैंक्युलाइज
विज्ञापन
किशनपुर सेंक्चुरी के घास मैदान में बाघ की घेराबंदी करते वन कर्मी। संवाद
- फोटो : LAKHIMPUR
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। दुधवा टाइगर रिजर्व की किशनपुर सेंक्चुरी में पिछले चार दिनों से बाघ की घेराबंदी जारी है, लेकिन वन विभाग को अब तक उसे ट्रैंक्युलाइज करने में सफलता नहीं मिली है। किशनपुर सेंक्चुरी जंगल में पिछले चार दिनों के अंदर बाघ चार से पांच बार ट्रैंक्युलाइजर टीमों के सामने आया लेकिन जब तक उस पर निशाना साधा जाता वह झाड़ियों में छिपकर आंखों से ओझल हो गया। बाघ को बेहोश करने में लगातार मिल रही असफलता से वन विभाग हताश हो चला है।
शिकारियों के चंगुल से छूटकर गर्दन में नायलॉन की रस्सी का फंदा लिए जंगल में घूम रहे बाघ का सटीक सुराग मिलने के बाद मंगलवार को घेराबंदी की गई। ट्रैंक्युलाइजर टीमों को भी मौके पर बुला लिया गया लेकिन घेराबंदी के बावजूद बाघ झाड़ियों में ही छिपा रही। वन्यजीवों की कॉलिंग के जरिए इस बात के संकेत भी मिल रहे हैं कि बाघ उसी जगह पर मौजूद है। कई बार प्रभावित बाघ निगरानी टीमों की नजरों में भी आया लेकिन निशाना साधने से पहले ही वह गच्चा देकर घास के मैदान में छिप गया। सबसे बड़ी बात यह है कि बाघ को धोखा देकर निशाने पर लेने के लिए लगाया गया कैमो फ्लैज वाहन भी कारगर साबित नहीं हुआ। बाघ वन विभाग के झांसे में आने के बजाए वन विभाग को ही झांसा दे रहा है।
-
चार दिन से लगातार बाघ को ट्रैंक्युलाइज करने की कवायद चल रही है, लेकिन ऊंची-ऊंची घास और झाड़ियों के कारण अब तक कामयाबी नहीं मिल सकी है।
- मनोज सोनकर, उपनिदेशक, दुधवा नेशनल पार्क
गुलरिया: बस्तौला चौराहा के पास दिखा बाघ, सहमे राहगीर
गुलरिया। गुरुवार की रात 11 बजे गोला से अपने घर जा रहे डिमरौल निवासी आनंद शर्मा के बीच सड़क पर बाघ दिखने से होश उड़ गए। बस्तौला चौराहे के पास अन्य राहगीर भी बाघ देखकर सहम गए।
विज्ञापन
डिमरौल निवासी आनंद शर्मा रात लगभग 11 बजे अपने चार पहिया वाहन से वापस घर आ रहे थे। बस्तौला चौराहे से बिजुआ की तरफ हनुमान मंदिर के पुल पर खड़ा बाघ देखकर उनके होश उड़ गए। वाहन मे आनंद अकेले ही थे, जिन्होंने 50 मीटर पहले वाहन रोक लिया और लाइटें जलाते रहे। इस बीच और वाहन भी निकल रहे थे, जो दूर ही रुक गये। लगभग पांच मिनट तक खड़े रहने के बाद बाघ पुल के नीचे की तरफ चला गया।
भीरा के फारेस्टर अमरपाल सिंह का कहना है कि यह इलाका जंगल का है और वन्यजीव रात में एक जगह से दूसरी जगह मूवमेंट करते रहते हैं। सभी लोगों को चलते समय ठंड के दिनों में रात या दिन में सावधानी बरतने की आवश्यकता है। गन्ने के खेतों में हिंसक वन्यजीव विचरण करते रहते हैं और कभी कभी रोड या गांव के निकट भी पहुंच जाते हैं। संवाद
ममरी: बाघ की चहलकदमी, ग्रामीणों से कहा-सतर्क रहें
ममरी। हैदराबाद थाना क्षेत्र के तूलमेलगंज और बिहारीपुर गांव के बीच बाघ की चहलकदमी मिलने पर पहुंचे महेशपुर रेंज के वन कर्मियों ने तूलमेलगंज गांव में बैठक कर वहां के ग्रामीणों को आगाह करते हुए सतर्क रहने की सलाह दी है। रेंजर मोबीन आरिफ के निर्देशन में हुई बैठक में फॉरेस्टर जगदीश वर्मा ने बताया कि बिहारीपुर फार्म और तूलमेलगंज गांव जंगल से सटे हुए हैं, जहां बाघ के खेतों में विचरण करने की सूचना मिल रही है। ऐसे में यदि किसी को कहीं पर बाघ की आहट मिलती है तो उसकी तुरंत सूचना वन चौकी पर दें। जंगल एरिया के निकट बाघ शिकार की तलाश में पहुंच जाता है ऐसे में सभी को सतर्क रहने, गन्ने की छिलाई समूह में खड़े होकर करना है। संवाद
चौखड़ा फार्म में खेतों में बाघ की दहाड़ से सहमे ग्रामीण
मझगईं। इलाके के चौखड़ा फार्म में एक झाले के करीब खेतों में बाघ की दहाड़ से ग्रामीणों में दहशत फैल गई। गुरुवार की रात करीब 11 बजे चौखड़ा फार्म निवासी सरजीत सिंह, निक्का सिंह आदि ग्रामीण गहरी नींद में सो रहे थे। तभी बाघ की दहाड़ सुनकर उनकी नींद उड़ गई। ग्रामीणों के मुताबिक करीब एक घंटा तक बाघ वहां चहलकदमी करता रहा उसके बाद जंगल की ओर चला गया। बाघ की दहशत से झाले के लोग पूरी रात जागते रहे। शुक्रवार को सूचना पाकर वनकर्मियों ने मौका मुआयना किया है। फारेस्ट गार्ड शरद मिश्रा ने बताया कि पार्क का जंगल करीब होने से बाघ जंगल से आ जाता है इस समय बाघों की मेटिंग का समय भी है। ग्रामीणों से अकेले खेतों की ओर जाने से मना किया है, विभाग भी लगातार गश्त कर रहा है। संवाद
विज्ञापन
शिकारियों के चंगुल से छूटकर गर्दन में नायलॉन की रस्सी का फंदा लिए जंगल में घूम रहे बाघ का सटीक सुराग मिलने के बाद मंगलवार को घेराबंदी की गई। ट्रैंक्युलाइजर टीमों को भी मौके पर बुला लिया गया लेकिन घेराबंदी के बावजूद बाघ झाड़ियों में ही छिपा रही। वन्यजीवों की कॉलिंग के जरिए इस बात के संकेत भी मिल रहे हैं कि बाघ उसी जगह पर मौजूद है। कई बार प्रभावित बाघ निगरानी टीमों की नजरों में भी आया लेकिन निशाना साधने से पहले ही वह गच्चा देकर घास के मैदान में छिप गया। सबसे बड़ी बात यह है कि बाघ को धोखा देकर निशाने पर लेने के लिए लगाया गया कैमो फ्लैज वाहन भी कारगर साबित नहीं हुआ। बाघ वन विभाग के झांसे में आने के बजाए वन विभाग को ही झांसा दे रहा है।
विज्ञापन
-
चार दिन से लगातार बाघ को ट्रैंक्युलाइज करने की कवायद चल रही है, लेकिन ऊंची-ऊंची घास और झाड़ियों के कारण अब तक कामयाबी नहीं मिल सकी है।
- मनोज सोनकर, उपनिदेशक, दुधवा नेशनल पार्क
गुलरिया: बस्तौला चौराहा के पास दिखा बाघ, सहमे राहगीर
गुलरिया। गुरुवार की रात 11 बजे गोला से अपने घर जा रहे डिमरौल निवासी आनंद शर्मा के बीच सड़क पर बाघ दिखने से होश उड़ गए। बस्तौला चौराहे के पास अन्य राहगीर भी बाघ देखकर सहम गए।
विज्ञापन
डिमरौल निवासी आनंद शर्मा रात लगभग 11 बजे अपने चार पहिया वाहन से वापस घर आ रहे थे। बस्तौला चौराहे से बिजुआ की तरफ हनुमान मंदिर के पुल पर खड़ा बाघ देखकर उनके होश उड़ गए। वाहन मे आनंद अकेले ही थे, जिन्होंने 50 मीटर पहले वाहन रोक लिया और लाइटें जलाते रहे। इस बीच और वाहन भी निकल रहे थे, जो दूर ही रुक गये। लगभग पांच मिनट तक खड़े रहने के बाद बाघ पुल के नीचे की तरफ चला गया।
भीरा के फारेस्टर अमरपाल सिंह का कहना है कि यह इलाका जंगल का है और वन्यजीव रात में एक जगह से दूसरी जगह मूवमेंट करते रहते हैं। सभी लोगों को चलते समय ठंड के दिनों में रात या दिन में सावधानी बरतने की आवश्यकता है। गन्ने के खेतों में हिंसक वन्यजीव विचरण करते रहते हैं और कभी कभी रोड या गांव के निकट भी पहुंच जाते हैं। संवाद
ममरी: बाघ की चहलकदमी, ग्रामीणों से कहा-सतर्क रहें
ममरी। हैदराबाद थाना क्षेत्र के तूलमेलगंज और बिहारीपुर गांव के बीच बाघ की चहलकदमी मिलने पर पहुंचे महेशपुर रेंज के वन कर्मियों ने तूलमेलगंज गांव में बैठक कर वहां के ग्रामीणों को आगाह करते हुए सतर्क रहने की सलाह दी है। रेंजर मोबीन आरिफ के निर्देशन में हुई बैठक में फॉरेस्टर जगदीश वर्मा ने बताया कि बिहारीपुर फार्म और तूलमेलगंज गांव जंगल से सटे हुए हैं, जहां बाघ के खेतों में विचरण करने की सूचना मिल रही है। ऐसे में यदि किसी को कहीं पर बाघ की आहट मिलती है तो उसकी तुरंत सूचना वन चौकी पर दें। जंगल एरिया के निकट बाघ शिकार की तलाश में पहुंच जाता है ऐसे में सभी को सतर्क रहने, गन्ने की छिलाई समूह में खड़े होकर करना है। संवाद
चौखड़ा फार्म में खेतों में बाघ की दहाड़ से सहमे ग्रामीण
मझगईं। इलाके के चौखड़ा फार्म में एक झाले के करीब खेतों में बाघ की दहाड़ से ग्रामीणों में दहशत फैल गई। गुरुवार की रात करीब 11 बजे चौखड़ा फार्म निवासी सरजीत सिंह, निक्का सिंह आदि ग्रामीण गहरी नींद में सो रहे थे। तभी बाघ की दहाड़ सुनकर उनकी नींद उड़ गई। ग्रामीणों के मुताबिक करीब एक घंटा तक बाघ वहां चहलकदमी करता रहा उसके बाद जंगल की ओर चला गया। बाघ की दहशत से झाले के लोग पूरी रात जागते रहे। शुक्रवार को सूचना पाकर वनकर्मियों ने मौका मुआयना किया है। फारेस्ट गार्ड शरद मिश्रा ने बताया कि पार्क का जंगल करीब होने से बाघ जंगल से आ जाता है इस समय बाघों की मेटिंग का समय भी है। ग्रामीणों से अकेले खेतों की ओर जाने से मना किया है, विभाग भी लगातार गश्त कर रहा है। संवाद