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बाघ को बेहोश करने में रोड़ा बनीं झाड़ियां और घना जंगल

Sat, 02 Jan 2021 11:55 PM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 02 Jan 2021 11:55 PM IST
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Wild Animals
किशनपुर सेंक्चुरी के कैमरे में कैद हुई फंदा लगे बाघ की तस्वीर। संवाद - फोटो : LAKHIMPUR
बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। दुधवा टाइगर रिजर्व के किशनपुर सेंक्चुरी की कटैया बीट में पिछले 17 दिनों से गर्दन में नायलॉन रस्सी का फंदा फंसाए जंगल में घूम रहे बाघ को टैंक्युलाइज करना वन विभाग के लिए चुनौती बन गया है। घना जंगल और वहां खड़ी लंबी नरकुल की झाड़ियों के अलावा घास के मैदान बाघ को टैंक्युलाइज करने में रोड़ा बने हुए हैं।
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शनिवार को एक बार फिर लगाए गए कैमरों में बाघ की लोकेशन ट्रैप हुई, पगचिह्न भी दिखे लेकिन उसका कोई सटीक सुराग नहीं मिल सका। कैमरे में कैद हुई बाघ की तस्वीर और मिले पगचिह्नों के अध्ययन से इस बात की पुष्टि हुई है कि यह वही बाघ है जिसकी गर्दन में रस्सी का फंदा पड़ा हुआ है। वन विभाग के मुताबिक कैमरों में ट्रैप तस्वीर से उसकी लोकेशन उसी जगह मिली है, जहां शुक्रवार की रात वह चहलकदमी कर रहा था। सर्च अभियान का नेतृत्व कर रहे आईएफएस अधिकारी राजेश कुमार के मुताबिक बाघ गतिविधियां सामान्य हैं, वह लगातार शिकार कर रहा है और वॉटरहोल में पानी भी पी रहा है।
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103 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैले किशनपुर सेंक्चुरी के घने जंगल, खड़ी लंबी नरकुल, घनी झाड़ियां और घास के मैदान बाघ को ट्रैंक्युलाइज करने में रोड़ा बन रहे हैं। जंगल में हर रोज 12 से 14 किलोमीटर की लंबी दूरी तय करने वाले इस बाघ को बेहोश करना टैंक्युलाइजर टीमों के लिए चुनौती बन गया है। यही कारण है कि टैंक्युलाइजर टीमें उसे घेरने और निशाने पर लेने में कामयाब नहीं हो पा रहीं हैं। बाघ की लोकेशन का पता रात के समय लगता है। दिन में जब टैंक्युलाइज टीमें उस जगह पहुंचती हैं तो काफी तलाश करने के बाद भी उसका कोई अता-पता नहीं चलता है। इसको लेकर वन विभाग की दिक्कत बढ़ती जा रही हैं।
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गर्दन में रस्सी का फंदा लिए किशनपुर सेंक्चुरी जंगल में घूम रहे बाघ की लगातार दूसरे दिन भी लोकेशन ट्रेस हुई है। घने जंगल और झाड़ियों में छिपे होने की वजह से अभी वह आंखों से ओझल है। उम्मीद है कि जल्द ही उसे टैंक्युलाइज कर फंदे से मुक्ति दिलाई जाएगी।
- मनोज सोनकर, उपनिदेशक, दुधवा नेशनल पार्क।
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