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बाघों की हिफाजत के लिए अब मैदान संभालेंगे ‘टाइगर गार्जियन’
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Wild Animals
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पलियाकलां (लखीमपुर खीरी)। बाघों की चहलकदमी पर नजर रखने के लिए अब ‘टाइगर गार्जियन’ मैदान में उतारे जाएंगे। इस संबंध में गांवों में टीमें बनाई जाएंगी। एक टीम में गांव के प्रधान समेत 10 शिक्षित शामिल रहेंगे। जिनको वाइल्ड लाइफ के बारे में विस्तार से जानकारी दी जाएगी। किसी भी विषम परिस्थितियों में अगर बाघ जंगल से समीपवर्ती गांवों में आता है तो यह टीम तुरंत पार्क प्रशासन को सूचना देंगी, जिसके बाद सतर्कता बढ़ाई जाएगी। इससे मानव-वन्यजीव संघर्ष पर भी रोक लगेगी। शिक्षित लोग रखने का उद्देश्य यह है कि टीम में शामिल लोग वाइल्ड लाइफ को समझें और आगे भी लोगों को जागरूक करें।
बाघों की चहलकदमी पर नजर रखने के साथ ही रैपिड रिस्पांस टीम, क्विक रिस्पांस टीम व टाइगर सेल का गठन किया जा चुका है। इसी शृंखला में अब टाइगर गार्जियन टीम तैनात करने का निर्णय किया गया है। डीडी मनोज कुमार सोनकर भी जंगल के समीपवर्ती गांवों में टीम बना रहे हैं। रमुआपुर समेत दो जगहों पर टीम बन चुकी हैं जो बाघों तथा तेंदुए कीगतिविधियों पर नजर रखेंगी।
बाघ सुरक्षा माह के तहत इन दिनों दुधवा टाइगर रिजर्व की तरफ से जंगल से सटे गांवों में जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। बनकटी व सौनहा में भी इसको लेकर गोष्ठी आयोजित हो चुकी है।
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शिकार पर भी टीम बनने से लगेगी रोक
वन्यजीवों के शिकार पर भी गार्जियन टीम बनने के बाद रोक लगने की संभावना जताई जा रही हैं। ऐसा इसीलिए है कि बाघ के साथ ही पार्क के वन्यजीवों की हर गतिविधि पर यह टीम नजर रखेगी। जिसके चलते शिकारियों के लगाए गए खुड़का व अन्य गतिविधियों पर भी टीम की नजर रहेगी।
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बाघों के संरक्षण तथा उनके बारे में जानकारियां टाइगर गार्जियन टीम बनाकर दी गई हैं। यह टीम बाघ के मूवमेंट की जानकारी पार्क प्रशासन को देगी साथ ही शिकारियों पर भी नजर रखेगी। जिससे दुधवा के वन्यजीवों पर शिकार का खतरा नहीं मंडराएगा। जंगल के समीपवर्ती लगभग सभी गांवों में यह टीम बनाने की योजना है।
-मनोज कुमार सोनकर, डिप्टी डायरेक्टर, दुधवा नेशनल पार्क
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बाघों की चहलकदमी पर नजर रखने के साथ ही रैपिड रिस्पांस टीम, क्विक रिस्पांस टीम व टाइगर सेल का गठन किया जा चुका है। इसी शृंखला में अब टाइगर गार्जियन टीम तैनात करने का निर्णय किया गया है। डीडी मनोज कुमार सोनकर भी जंगल के समीपवर्ती गांवों में टीम बना रहे हैं। रमुआपुर समेत दो जगहों पर टीम बन चुकी हैं जो बाघों तथा तेंदुए कीगतिविधियों पर नजर रखेंगी।
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बाघ सुरक्षा माह के तहत इन दिनों दुधवा टाइगर रिजर्व की तरफ से जंगल से सटे गांवों में जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है। बनकटी व सौनहा में भी इसको लेकर गोष्ठी आयोजित हो चुकी है।
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शिकार पर भी टीम बनने से लगेगी रोक
वन्यजीवों के शिकार पर भी गार्जियन टीम बनने के बाद रोक लगने की संभावना जताई जा रही हैं। ऐसा इसीलिए है कि बाघ के साथ ही पार्क के वन्यजीवों की हर गतिविधि पर यह टीम नजर रखेगी। जिसके चलते शिकारियों के लगाए गए खुड़का व अन्य गतिविधियों पर भी टीम की नजर रहेगी।
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बाघों के संरक्षण तथा उनके बारे में जानकारियां टाइगर गार्जियन टीम बनाकर दी गई हैं। यह टीम बाघ के मूवमेंट की जानकारी पार्क प्रशासन को देगी साथ ही शिकारियों पर भी नजर रखेगी। जिससे दुधवा के वन्यजीवों पर शिकार का खतरा नहीं मंडराएगा। जंगल के समीपवर्ती लगभग सभी गांवों में यह टीम बनाने की योजना है।
-मनोज कुमार सोनकर, डिप्टी डायरेक्टर, दुधवा नेशनल पार्क