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बाघों के साथ अब हाथी गिने जाएंगे

Fri, 03 Sep 2021 01:12 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 03 Sep 2021 01:12 AM IST
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wild animal
दुधवा टाइगर रिजर्व में चहलकदमी करता बाघ। फाइल फोटो - फोटो : LAKHIMPUR
लखीमपुर खीरी। हर चार साल के अंतराल पर होने वाले बाघों की गणना के साथ इस बार जंगली हाथियों की भी गिनती होगी। यह काम बाघों की गिनतनी के पहले चरण में ही होगा। इसमें वैज्ञानिक प्रणाली अपनाई जाएगी ताकि गणना के सटीक परिणाम आ सकें।
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देश भर में बाघों की गणना हर चार साल के अंतराल पर होती है। अब टाइगर इस्टीमेशन-2022 नाम से इस अभियान की तैयारियां शुरू हो गई हैं। इसके लिए उत्तर प्रदेश के नोडल अधिकारी नियुक्त हुए दुधवा टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संजय पाठक ने बताया कि टाइगर इस्टीमेशन का काम तीन चरणों में होगा। इसके लिए सितंबर माह में ही प्रशिक्षण का सिलसिला शुरू हो जाएगा। सितंबर माह के अंत तक दुधवा टाइगर रिजर्व में प्रदेश भर के वनाधिकारियों को टाइगर इस्टीमेशन का प्रशिक्षण देंगे। यह वनाधिकारी अपने-अपने कार्यक्षेत्र में जाकर अधिकारियों और फील्ड कर्मचारियों को प्रशिक्षित करेंगे।
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बरसात के बाद टाइगर इस्टीमेशन का पहला चरण शुरू होगा, जिसमें सबसे पहले साइन सर्वे किया जाएगा। यह चरण आठ दिन का होगा। इसमें मल-मूत्र, पगचिह्न, पेड़ों पर बाघों की खरोंच आदि का सर्वे कर बाघों और अन्य परभक्षी जीवों की मौजूदगी का आकलन किया जाएगा। तीन दिन बाद ट्रांजिट वाक की जाएगी। इसमें एक बीट को इकाई मानकर टीमें घूमेंगी और ट्रांजिट लाइन के दोनों तरफ देखते हुए चलेंगी और बाघ और तेंदुए के भोजन के लिए शाकाहारी जीवों की उपलब्धता और उनके घनत्व का आकलन करेंगी।
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इसके बाद विजीटेशन सर्वे होगा, जिसमें इस बात का पता लगाया जाएगा कि किस क्षेत्र में किस-किस प्रजाति के पेड़ झाड़ियां और घास हैं। अंतिम दिन पक्षियों की गणना होगी। दूसरे चरण में इस बात का आकलन किया जाएगा कि बाघ तेंदुओं के प्राकृतिवास के आसपास रोशनी की स्थिति क्या है तो व्यवधान क्या हैं। जैसे रेलवे लाइन, सड़क और आबादी कितनी दूर है और उसका बाघ या तेंदुओं के प्राकृतिवास पर क्या प्रभाव है। दूसरा चरण फील्ड में न होकर लैब में होगा।
तीसरे चरण में कैमरा ट्रैपिंग की जाएगी। इसमें दो वर्ग किलोमीटर ग्रिड में एक जोड़ी कैमरा लगाया जाएगा। इस तरह दुधवा टाइगर रिजर्व में कुल 1100 ग्रिड बनाए जाएंगे। यह कैमरे निश्चित अवधि तक एक ही जगह पर लगे रहेंगे। बाद में इनकी तस्वीरों का संकलन कर इन्हें विश्लेषण के लिए भारतीय वन्यजीव संस्थान देहरादून भेजा जाएगा। यह संस्थान कंप्यूटर तकनीक से चित्रों का विश्लेषण कर धारियों का मिलान कर यह पता लगाएगा कि कि किस जगह पर कुल कितने बाघ हैं।
राष्ट्रीय स्तर पर इसे कंपाइल कर परिणाम घोषित किए जाएंगे। 2018 में हुए टाइगर इस्टीमेशन के दौरान दुधवा टाइगर रिजर्व में कुल 105 बाघ पाए गए थे। जिनकी संख्या में इजाफा होने की उम्मीद है।
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पहली बार हो रही जंगली हाथियों की गणना
यह पहला मौका है जब टाइगर इस्टीमेशन के साथ जंगली हाथियों की गिनती हो रही है। हाथियों की गिनती साइन सर्वे के साथ जेनेटिक भी होगी। इसमें हाथी के पग चिह्न और प्रत्यक्ष गिनती के साथ मल मूत्र से डीएनए सैंपल लेकर उनकी सही संख्या का पता लगाया जाएगा। करीब चार साल पहले हुई हाथियों की गणना में दुधवा टाइगर रिजर्व में 149 हाथी होने का अनुमान लगाया गया था। टाइगर इस्टीमेशन के पहले चरण में ही जंगली हाथियों की गणना के परिणाम पहले आने की संभावना है।

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दुधवा टाइगर रिजर्व समेत पूरे उत्तर प्रदेश में टाइगर इस्टीमेशन-2022 की तैयारियां चल रहीं हैं। इसके लिए सितंबर माह में प्रशिक्षण और बरसात के बाद टाइगर इस्टीमेशन की प्रक्रिया शुरू हो जाएगी। इस बार टाइगर इस्टीमेशन के साथ जंगली हाथियों की गणना भी होगी।
-संजय पाठक, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
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