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रेल विद्युतीकरण का वन्यजीवन पर प्रभाव का अध्ययन करने पहुंची डब्ल्यूआईआई की टीम
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बांकेगंज-मैलानी के बीच जंगल में रेल विद्युतीकरण कार्य का सर्वे करती डब्ल्यूआईआई की टीम,साथ में व?
- फोटो : LAKHIMPUR
बांकेगंज। बांकेगंज-मैलानी के बीच रेल लाइन के विद्युतीकरण के लिए अनापत्ति प्रमाण-पत्र जारी करने से पहले केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने जांच के लिए 11 सदस्सीय टीम भेजी है। यह टीम सोमवार को मौके पर पहुंची। लखीमपुर-मैलानी रेल प्रखंड पर बांकेगंज-मैलानी के बीच 12 किलोमीटर लंबी रेल लाइन दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन जंगल से होकर गुजरती है।
इस रेल लाइन का विद्युतीकरण करने के लिए रेलवे ने वन विभाग से एनओसी मांगा था। जिला स्तर से रिपोर्ट भेजे जाने के बाद केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने यह पता लगाने के लिए कि विद्युतीकरण से वन एवं वन्यजीवन कितना प्रभावित होगा, 11 सदस्सीय टीम मौके पर भेजी है। भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई ) देहरादून के वैज्ञानिक एसपी गोयल के नेतृत्व में गठित टीम में डब्ल्यूआईआई के अधिकारियों के अलावा स्थानीय वन कर्मी एवं रेल विकास निगम के सीनियर मैनेजर योगेश मिश्रा और उनकी टीम शामिल है।
डब्ल्यूआईआई की टीम यह पता लगाएगी कि रेलवे ट्रैक के आसपास वन्यजीवों के मूवमेंट की क्या स्थित है। पेड़ों की ऊचाई क्या है। रेल विद्युतीकरण से आग लगने का खतरा तो नहीं है। विद्युतीकरण से वन्यजीवन कितना प्रभावित होगा। रेल ट्रैक के किनारे किन-किन जगहों से वन्यजीवों का आवागमन होता है, इसका साइन सर्वे भी किया जाएगा। इन बिंदुओं पर बरीकी से जांच करने के बाद यह टीम अपनी रिर्पोट केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार को सौपेगी।
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इसके आधार पर वन विभाग अनापत्ति प्रमाण-पत्र जारी करेगा। टीम के अधिकारियों ने बांकेगंज-मैलानी जंगल से गुजरी रेल लाइन किनारे पैदल, मोटर-ट्राली भ्रमण कर हालात का जायजा लिया। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के उपनिदेशक सुंदरेशा ने बताया कि यह टीम लगातर तीन दिन तक अध्ययन करेगी।
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इस रेल लाइन का विद्युतीकरण करने के लिए रेलवे ने वन विभाग से एनओसी मांगा था। जिला स्तर से रिपोर्ट भेजे जाने के बाद केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने यह पता लगाने के लिए कि विद्युतीकरण से वन एवं वन्यजीवन कितना प्रभावित होगा, 11 सदस्सीय टीम मौके पर भेजी है। भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई ) देहरादून के वैज्ञानिक एसपी गोयल के नेतृत्व में गठित टीम में डब्ल्यूआईआई के अधिकारियों के अलावा स्थानीय वन कर्मी एवं रेल विकास निगम के सीनियर मैनेजर योगेश मिश्रा और उनकी टीम शामिल है।
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डब्ल्यूआईआई की टीम यह पता लगाएगी कि रेलवे ट्रैक के आसपास वन्यजीवों के मूवमेंट की क्या स्थित है। पेड़ों की ऊचाई क्या है। रेल विद्युतीकरण से आग लगने का खतरा तो नहीं है। विद्युतीकरण से वन्यजीवन कितना प्रभावित होगा। रेल ट्रैक के किनारे किन-किन जगहों से वन्यजीवों का आवागमन होता है, इसका साइन सर्वे भी किया जाएगा। इन बिंदुओं पर बरीकी से जांच करने के बाद यह टीम अपनी रिर्पोट केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय भारत सरकार को सौपेगी।
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इसके आधार पर वन विभाग अनापत्ति प्रमाण-पत्र जारी करेगा। टीम के अधिकारियों ने बांकेगंज-मैलानी जंगल से गुजरी रेल लाइन किनारे पैदल, मोटर-ट्राली भ्रमण कर हालात का जायजा लिया। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के उपनिदेशक सुंदरेशा ने बताया कि यह टीम लगातर तीन दिन तक अध्ययन करेगी।