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सिर्फ पांच साल क्यों... हर साल तैयार हो नेताओं का रिपोर्ट कार्ड
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लखीमपुर खीरी। जनपद में 23 फरवरी को 17वीं विधान सभा के लिए 23 फरवरी को मतदान है। चौथे चरण में खीरी में होने वाले मतदान को लेकर अमर उजाला के वर्चुअल संवाद में शहर की प्रतिष्ठित और जागरूक महिलाओं ने जनप्रतिनिधियों के चुनाव को लेकर अपनी राय जाहिर की। इसमें मुख्य रुप से चुने गए जनप्रतिनिधियों की हर साल जवाबदेही तय किए जाने की मांग की। विभिन्न क्षेत्रों से जुड़ी महिलाओं ने जहां वोटर लिस्ट के बनने के दौरान हुई गड़बड़ियों पर सवाल उठाए, तो वहीं सरकारी दफ्तरों में महिलाओं से किए जाने वाले व्यवहार पर भी सवाल उठाए। इसके साथ ही महिलाओं ने स्थानीय निकाय से जुड़ी संस्थाओं को शहर की बदहाली के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए उनकी सुनवाई न किए जाने पर भी नाराजगी जताई।
वोटर कार्ड बनाते वक्त होती है गड़बड़ी
वोटर कार्ड में होने वाली गड़बड़ी का चुनाव के प्रतिशत पर भारी असर होता है। परिवार में ही वोटर कार्ड बनवाने के दौरान औपचारिकताएं पूरी करने के बाद भी वोटर कार्ड नहीं बने। इससे चुनाव में वोट प्रतिशत पर असर पड़ता है और दागी किस्म के नेताओं को मौका मिल जाता है। इसके अलावा लोगों को भी जाति धर्म से ऊपर उठकर मतदान करना चाहिए। क्योंकि वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य बेहद चिंताजनक है। इसलिए लोगों को विकास की राजनीति का चुनाव करना चाहिए। वहीं, कोरोना के बाद पढ़ाई भी तकनीक पर निर्भर हो चुकी है, ऐसे में सरकार को मेरिट बनाकर निर्धन व पात्र लोगों को मोबाइल, टैबलेट आदि देने की व्यवस्था करनी चाहिए।
- डॉ. ज्योति पंत, विभागाध्यक्ष अर्थशास्त्र, वाईडीपीजी कॉलेज
देश के लिए सोचें युवा... स्थानीय स्तर पर समग्र विकास की जरूरत
देश में रिसोर्स की कोई कमी नहीं है। लेकिन नेतृत्व कमजोर होने के कारण युवा प्रतिभाएं आज देश को छोड़ दे रहे हैं। जबकि, उन्हें अपनी क्षमता और प्रतिभा का इस्तेमाल अपने आस पास के क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिये करना चाहिए। इसलिए सरकारों को बहुत जरूरत है कि स्थानीय स्तर पर मौके उपलब्ध कराएं। गांव में सुविधाएं नही हैं, छोटी जगहों का भी बुरा हाल है। युवाओं के लिये स्थानीय स्तर पर ही अगर रोजगार और विकास के अवसर उपलब्ध हो सकें, तभी समग्र विकास हो सकता है। साफ-सफाई के मामले में भी शहर की हालत ठीक नहीं है। सफाईकर्मी भी सिर्फ वेतन ले रहे हैं, ढंग से कहीं साफ-सफाई नहीं है। कई बार शिकायतों के बाद भी हालात नहीं सुधरते। सरकारी निकायों में भ्रष्टाचार भी बड़ी समस्या है। जनप्रतिनिधियों के चुनाव में इन सब बातों को भी ध्यान में रखने की बहुत जरूरत है।
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- शालिनी सचान, प्रिंसिपल, सेठ एमआर जयपुरिया स्कूल, लखीमपुर
नीतियां अच्छीं, क्रियान्वयन नहीं..
पीएम मोदी की बेहतर नीतियों के कारण देश में विकास हुआ है। मगर स्थानीय स्तर पर स्थिति बहुत खराब है। जल निगम बिना किसी जानकारी के सड़क खोद देता है। लोग परेशान होते हैं, मगर जागरूकता के अभाव में सही जगह शिकायत तक नहीं दर्ज करा पाते। अगर शिकायत हो भी जाए, तो उस पर कोई अमल तक नहीं होता। चुनाव के पहले नेता तमाम वादे करते हैं, लेकिन उसके बाद हालात बिगड़ते जाते हैं। देश में ऐसी पारदर्शी नियामक संस्था की जरूरत है, जो हर तीन महीने नहीं तो कम से कम सालाना उनका रिपोर्ट कार्ड तैयार करे और उनकी जनता के प्रति उनकी जवाबदेही तय हो। क्योंकि ग्रामीण स्तर पर अशिक्षा की वजह से लोग अपने हक की आवाज उठाने में परहेज करते हैं, और लगातार उनका शोषण होता रहता है।
- रुपाली शुक्ला, अध्यक्ष, जेसीआई लखीमपुर संकल्प संस्था
महिलाओं के लिए मासिक हेल्थ कार्ड बनवाए सरकार
महिलाओं के लिए सरकार ने अच्छा काम किया है। लेकिन, जागरूकता के अभाव में ग्रामीण महिलाओं की स्थिति बेहद खराब है। आने वाली सरकार महिलाओं के लिये एक मासिक हेल्थ कार्ड जारी करे, जिससे महिलाएं हर महीने अपने स्वास्थ्य की जांच करवा सकें, इससे सरकार के पास आधी आबादी के स्वास्थ्य का रिकॉर्ड भी रहेगा। इसके अलावा महिलाओं के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में हेल्थ कैंप भी लगने चाहिए। इसकी अनदेखी से तमाम अनचाहे रोग पनपते हैं। महिलाओं के स्वास्थ्य की दशा सुधारने के बारे में देश, समाज और आने वाली सरकारों को अभी भी बहुत काम करने होंगे।
- डॉ. सुप्रिया मिश्रा, स्त्री रोग विशेषज्ञ
घर-घर पहुंचाई जाए मतदान पर्ची... भत्ता नहीं रोजगार दें सरकार
वोट डालने के दौरान आखिरी दौर में पर्चियां नहीं मिलतीं, जिससे 100 लोगों में सिर्फ 25 लोग ही मतदान कर पाते हैं। ऐसे में यह बहुत जरूरी हो जाता है कि वोट प्रतिशत कम न पडे़। इससे दागियों के महापुरुष बनने पर रोक लग सकेगी। वहीं, चुनाव के दौरान राजनीतिक दल मुफ्त चीजें बांटने के वादों का पिटारा खोल देते हैं। उन्हें युवाओं को रोजगार या छोटे छोटे स्टार्टअप खोलने में मदद देनी चाहिए, जिससे युवा स्वाभिमान पूर्वक जीवन जी सकें। युवा भत्ता नहीं रोजगार चाहते हैं। इसके अलावा सरकारी मशीनरी और दफ्तरों में पारदर्शिता के अभाव में किसी भी काम के लिए जाने पर वहां महिलाओं के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार होता है। महिलाओं को किसी भी काम के लिए अक्सर टरकाया जाता है।
- डॉ. मीनाक्षी तिवारी, प्रिंसिपल गुरुनानक कन्या इंटर कॉलेज, लखीमपुर
मोबाइल एप्स के जरिये भी वोट की होनी चाहिए व्यवस्था
नेताओं की जवाबदेही पांच साल बाद क्यों, वार्षिकी के आधार पर तय होनी चाहिए। इससे जनता को भी पता लग सके कि जिनका उन्होंने चुनाव किया है। वह काम क्या कर रहे हैं? इसके अलावा वोट प्रतिशत बढ़ाने के लिए सरकार को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि इंसान कहीं से भी मोबाइल एप्स के जरिये अपना वोट कर सके। इससे फर्जी वोटिंग पर लगाम लगेगी। वहीं धर्म और जाति से ऊपर उठकर लोगों को वोट करना चाहिये, क्योंकि भविष्य में इसके दुष्परिणाम हमें ही भोगने पड़ते हैं। मुख्य रुप से महिला सुरक्षा समेत, शिक्षा और रोजगार की गारंटी सरकार की गारंटी होती है। नेता मुफ्त का पिटारा न खोलें, शिक्षा, सुरक्षा और रोजगार की गारंटी दें। क्योंकि, ये जनता है, सब जानती है।
- रुपम तिवारी, समाजसेवी, लखीमपुर खीरी
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वोटर कार्ड बनाते वक्त होती है गड़बड़ी
वोटर कार्ड में होने वाली गड़बड़ी का चुनाव के प्रतिशत पर भारी असर होता है। परिवार में ही वोटर कार्ड बनवाने के दौरान औपचारिकताएं पूरी करने के बाद भी वोटर कार्ड नहीं बने। इससे चुनाव में वोट प्रतिशत पर असर पड़ता है और दागी किस्म के नेताओं को मौका मिल जाता है। इसके अलावा लोगों को भी जाति धर्म से ऊपर उठकर मतदान करना चाहिए। क्योंकि वर्तमान राजनीतिक परिदृश्य बेहद चिंताजनक है। इसलिए लोगों को विकास की राजनीति का चुनाव करना चाहिए। वहीं, कोरोना के बाद पढ़ाई भी तकनीक पर निर्भर हो चुकी है, ऐसे में सरकार को मेरिट बनाकर निर्धन व पात्र लोगों को मोबाइल, टैबलेट आदि देने की व्यवस्था करनी चाहिए।
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- डॉ. ज्योति पंत, विभागाध्यक्ष अर्थशास्त्र, वाईडीपीजी कॉलेज
देश के लिए सोचें युवा... स्थानीय स्तर पर समग्र विकास की जरूरत
देश में रिसोर्स की कोई कमी नहीं है। लेकिन नेतृत्व कमजोर होने के कारण युवा प्रतिभाएं आज देश को छोड़ दे रहे हैं। जबकि, उन्हें अपनी क्षमता और प्रतिभा का इस्तेमाल अपने आस पास के क्षेत्र को मजबूत बनाने के लिये करना चाहिए। इसलिए सरकारों को बहुत जरूरत है कि स्थानीय स्तर पर मौके उपलब्ध कराएं। गांव में सुविधाएं नही हैं, छोटी जगहों का भी बुरा हाल है। युवाओं के लिये स्थानीय स्तर पर ही अगर रोजगार और विकास के अवसर उपलब्ध हो सकें, तभी समग्र विकास हो सकता है। साफ-सफाई के मामले में भी शहर की हालत ठीक नहीं है। सफाईकर्मी भी सिर्फ वेतन ले रहे हैं, ढंग से कहीं साफ-सफाई नहीं है। कई बार शिकायतों के बाद भी हालात नहीं सुधरते। सरकारी निकायों में भ्रष्टाचार भी बड़ी समस्या है। जनप्रतिनिधियों के चुनाव में इन सब बातों को भी ध्यान में रखने की बहुत जरूरत है।
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- शालिनी सचान, प्रिंसिपल, सेठ एमआर जयपुरिया स्कूल, लखीमपुर
नीतियां अच्छीं, क्रियान्वयन नहीं..
पीएम मोदी की बेहतर नीतियों के कारण देश में विकास हुआ है। मगर स्थानीय स्तर पर स्थिति बहुत खराब है। जल निगम बिना किसी जानकारी के सड़क खोद देता है। लोग परेशान होते हैं, मगर जागरूकता के अभाव में सही जगह शिकायत तक नहीं दर्ज करा पाते। अगर शिकायत हो भी जाए, तो उस पर कोई अमल तक नहीं होता। चुनाव के पहले नेता तमाम वादे करते हैं, लेकिन उसके बाद हालात बिगड़ते जाते हैं। देश में ऐसी पारदर्शी नियामक संस्था की जरूरत है, जो हर तीन महीने नहीं तो कम से कम सालाना उनका रिपोर्ट कार्ड तैयार करे और उनकी जनता के प्रति उनकी जवाबदेही तय हो। क्योंकि ग्रामीण स्तर पर अशिक्षा की वजह से लोग अपने हक की आवाज उठाने में परहेज करते हैं, और लगातार उनका शोषण होता रहता है।
- रुपाली शुक्ला, अध्यक्ष, जेसीआई लखीमपुर संकल्प संस्था
महिलाओं के लिए मासिक हेल्थ कार्ड बनवाए सरकार
महिलाओं के लिए सरकार ने अच्छा काम किया है। लेकिन, जागरूकता के अभाव में ग्रामीण महिलाओं की स्थिति बेहद खराब है। आने वाली सरकार महिलाओं के लिये एक मासिक हेल्थ कार्ड जारी करे, जिससे महिलाएं हर महीने अपने स्वास्थ्य की जांच करवा सकें, इससे सरकार के पास आधी आबादी के स्वास्थ्य का रिकॉर्ड भी रहेगा। इसके अलावा महिलाओं के लिए ग्रामीण क्षेत्रों में हेल्थ कैंप भी लगने चाहिए। इसकी अनदेखी से तमाम अनचाहे रोग पनपते हैं। महिलाओं के स्वास्थ्य की दशा सुधारने के बारे में देश, समाज और आने वाली सरकारों को अभी भी बहुत काम करने होंगे।
- डॉ. सुप्रिया मिश्रा, स्त्री रोग विशेषज्ञ
घर-घर पहुंचाई जाए मतदान पर्ची... भत्ता नहीं रोजगार दें सरकार
वोट डालने के दौरान आखिरी दौर में पर्चियां नहीं मिलतीं, जिससे 100 लोगों में सिर्फ 25 लोग ही मतदान कर पाते हैं। ऐसे में यह बहुत जरूरी हो जाता है कि वोट प्रतिशत कम न पडे़। इससे दागियों के महापुरुष बनने पर रोक लग सकेगी। वहीं, चुनाव के दौरान राजनीतिक दल मुफ्त चीजें बांटने के वादों का पिटारा खोल देते हैं। उन्हें युवाओं को रोजगार या छोटे छोटे स्टार्टअप खोलने में मदद देनी चाहिए, जिससे युवा स्वाभिमान पूर्वक जीवन जी सकें। युवा भत्ता नहीं रोजगार चाहते हैं। इसके अलावा सरकारी मशीनरी और दफ्तरों में पारदर्शिता के अभाव में किसी भी काम के लिए जाने पर वहां महिलाओं के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार होता है। महिलाओं को किसी भी काम के लिए अक्सर टरकाया जाता है।
- डॉ. मीनाक्षी तिवारी, प्रिंसिपल गुरुनानक कन्या इंटर कॉलेज, लखीमपुर
मोबाइल एप्स के जरिये भी वोट की होनी चाहिए व्यवस्था
नेताओं की जवाबदेही पांच साल बाद क्यों, वार्षिकी के आधार पर तय होनी चाहिए। इससे जनता को भी पता लग सके कि जिनका उन्होंने चुनाव किया है। वह काम क्या कर रहे हैं? इसके अलावा वोट प्रतिशत बढ़ाने के लिए सरकार को ऐसी व्यवस्था करनी चाहिए कि इंसान कहीं से भी मोबाइल एप्स के जरिये अपना वोट कर सके। इससे फर्जी वोटिंग पर लगाम लगेगी। वहीं धर्म और जाति से ऊपर उठकर लोगों को वोट करना चाहिये, क्योंकि भविष्य में इसके दुष्परिणाम हमें ही भोगने पड़ते हैं। मुख्य रुप से महिला सुरक्षा समेत, शिक्षा और रोजगार की गारंटी सरकार की गारंटी होती है। नेता मुफ्त का पिटारा न खोलें, शिक्षा, सुरक्षा और रोजगार की गारंटी दें। क्योंकि, ये जनता है, सब जानती है।
- रुपम तिवारी, समाजसेवी, लखीमपुर खीरी