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Lakhimpur Kheri News: खंडसारी उद्योग न चलने से पिछड़ रही गेंहू बोआई

Sun, 30 Nov 2025 11:07 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Updated Sun, 30 Nov 2025 11:07 PM IST
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Wheat sowing lags behind due to non-operation of the Khandsari industry
पवन पाठक
धौरहरा। चीनी मिलों की तर्ज पर गन्ना खरीद और ऑनलाइन भुगतान के सरकारी आदेश के विरोध में क्षेत्र के खंडसारी उद्योग अनिश्चितकालीन के लिए बंद चल रहे हैं। वहीं, चीनी मिलों की पर्चियां भी किसानों को समय से नहीं मिल रहीं। ऐसे में खेत खाली न होने से गेंहू की बोआई पिछड़ रही है।
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धौरहरा क्षेत्र में पांच बॉयलर मिनी चीनी मिलें हैं। इन्हें अक्टूबर से संचालित होना था, पर सरकारी आदेश ने इनके चक्के जाम कर दिए। उत्तर प्रदेश गुड़ एवं खंडसारी मैन्युफैक्चर एसोसिएशन के अध्यक्ष जगदीश गुप्ता, संरक्षक ज्ञान स्वरूप शुक्ला, मंत्री सानुज गुप्ता सहित तमाम व्यापारियों ने आदेश के विरोध में बीते दिनों गन्ना आयुक्त उत्तर प्रदेश को ज्ञापन दिया था। उन्हें बताया था कि चीनी मिलों की तर्ज पर किसानों को ऑनलाइन भुगतान करना बिचौलियों को बढ़ावा देना है।
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एसोसिएशन के मंत्री सानुज गुप्ता ने बताया कि शुगर कंट्रोल आदेश 2025 में 500 टीसीडी व उससे अधिक वाली क्षमता वाली इकाइयों को एनएसडब्ल्यूएस पोर्टल पर रजिस्टर करना होगा, जबकि चीनी मिलों की अपेक्षा चीनी उत्पादन 3 प्रतिशत कम होता है। संवाद
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---किसान बोले-400 की जगह 290 में बिचौलिये खरीद रहे गन्ना---
मिनी मिलें बंद होने से क्षेत्र में बिचौलिये सक्रिय हो गए हैं। महराजनगर गांव के किसान दिनेश, राजाराम, मोहम्मद उमर ने बताया कि गेहूं बोने के लिए खेत खाली करना था। इसके लिए गन्ने को बिचौलियों को बेचना पड़ रहा है। बिचौलिये 400 रुपये क्विंटल के बजाय 290 में गन्ना खरीद रहे हैं।
बाक्स-


एक तरफ बॉयलर बंद हैं तो दूसरी ओर नकद गन्ना बेचने के लिए किसान कोल्हुओं पर गन्ना बेच रहे थे, पर प्रशासन इन कोल्हुओं पर भी प्रदूषण के नाम पर शिकंजा कस रहा है। यह सब चीनी मिलों से प्रशासन की मिलीभगत प्रतीत होती है। हम किसानों के साथ मिलकर आंदोलन करेंगे।
-पवन पाठक, तहसील अध्यक्ष, किसान यूनियन टिकैत गुट, धौरहरा
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आगामी फसलों की बोआई के लिए रुपयों की जरूरत होती है। इसलिए बॉयलर और कोल्हू पर गन्ना बेचते हैं। अब बॉयलर न चलने से गेंहू की बोआई पिछड़ रही है। पर्चियां भी समय से नहीं मिल रहीं।
-रमाशंकर शुक्ला, किसान, धौरहरा
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गेंहू बोने के लिए खेत खाली करना है। पर्चियां न मिलने से खेतों में गन्ना खड़ा है। यदि बॉयलर चल गए होते तो समय से गेंहू की बोआई हो जाती। अब लगता है कि इस बार समय से गेंहू नहीं बो पाएंगे।

-राज बख्श, लोहरीपुर
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नवंबर बीत गया। अभी गेहूं के खेतों की जोताई नहीं हो पाई, क्योंकि खेतों में गन्ना खड़ा है। पर्चियां भी नहीं मिल रही हैं। बॉयलर बंद होने से परेशानी हो रही है। बॉयलर चलते तो पर्चियां भी समय से आतीं।
-मुकेश गुप्ता, धौरहरा

पवन पाठक

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पवन पाठक

पवन पाठक

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