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Lakhimpur Kheri News: ग्रामीणों के काम तो तब हों... जब पंचायत भवनों के ताले खुलें

Sat, 20 Jan 2024 01:04 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Sat, 20 Jan 2024 01:04 AM IST
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Villagers' work should be done only when the locks of Panchayat buildings are opened.
बबुरी गांव के पंचायत भवन के एक कमरें में फैली गंदगी। - संवाद
लखीमपुर खीरी। ग्रामीणों को ग्राम पंचायत भवन में ही जरूरी प्रपत्र मुहैया कराने का दावा खोखला साबित हो रहा है। जिले की अधिकांश पंचायतों में पंचायत सहायकों की तैनाती के बावजूद पंचायत भवनों का ताला कभी-कभार ही खुलता है। ग्रामीणों को आय, जाति प्रमाणपत्र, खतौनी की सुविधाएं सिर्फ कागजों पर ही मिल रही हैं।
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ग्रामीणों को आवश्यक प्रपत्र हासिल करने के लिए कस्बों में संचालित जनसुविधा केंद्रों या फिर तहसील व ब्लॉक कार्यालय की दौड़ लगानी पड़ रही है। पंचायत भवन में कंप्यूटर और अन्य व्यवस्थाएं करने पर लाखों का बजट खर्च किया गया है। शुक्रवार को मोहम्मदी, धौरहरा, निघासन ब्लॉक में कराई गई पड़ताल में कई पंचायत भवनों में ताला लटकता मिला। लखीमपुर देहात ग्राम पंचायत के पंचायत भवन में भी ताला लटक रहा था।
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केहुआ में कंप्यूटर न होने से ठप है कामकाज
मोहम्मदी। विकास खंड की ग्राम पंचायत खजुहा के ग्राम सचिवालय में भी ताला लगा रहता है। केहुआ के पंचायत भवन की चहारदीवारी नहीं है। यहां कंप्यूटर भी नहीं लगा है। इससे ग्रामीणों को कोई सुविधा नहीं मिल रही है। आय, जाति प्रमाणपत्र, खतौनी आदि के लिए उन्हें तहसील की दौड़ लगानी पड़ती है। प्रधान के पति कमलेश वर्मा ने बताया कि खजुहा की पंचायत सहायक कांति देवी ही केहुआ का कामकाज देख रही हैं।
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महीने में दो-तीन बार ही खुलता है छेदुई पतिया का पंचायत भवन
निघासन। ब्लॉक निघासन की ग्राम पंचायत छेदुई पतिया के पंचायत भवन का ताला महीने में दो-तीन बार ही खुलता है। ग्रामीणों को यहां से किसी तरह की सुविधा नहीं मिलती है। पंचायत भवन में पंचायत सहायक का नाम और प्रतिदिन बैठने का समय भी लिखा है, लेकिन वह मिलते कभी-कभार ही हैं। गांव के अवधेश, कमलेश आदि ने बताया कि अभी तक किसी भी सुविधा का लाभ नहीं मिल पाया है। खसरा-खतौनी व अन्य सुविधाएं नहीं मिल रहीं। प्रधान के पति इकराम कहते हैं कि जब जरूरत होती है तब पंचायत भवन खोला जाता है।

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बबुरी में भी कभी-कभार ही खुलता है ताला

धौरहरा। ग्राम पंचायत बबुरी में पंचायत सहायक की तैनाती तो है, लेकिन पंचायत भवन का ताला कभी-कभार ही खुलता है। ग्रामीणों को किसी तरह की सुविधा नहीं मिल रही। गांव के फकीरा ने बताया कि पंचायत भवन अधिकांश समय बंद रहता है। भीखन ने बताया कि पंचायत सेक्रेटरी यहां कभी नहीं बैठते हैं। न ही यहां से किसी प्रकार के प्रपत्र जारी होते हैं। कभी-कभार प्रधान इसका ताला खुलवाते हैं। कमरों व परिसर में गंदगी रहती है। बीडीओ ने पंचायत भवन की जांच कराने की बात कही है।

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13 साल में ही जर्जर हो गया शिवपुरी का पंचायत भवन
अलीगंज। बिजुआ ब्लॉक की ग्राम पंचायत शिवपुरी में बना पंचायत भवन जर्जर हो गया है। इसका निर्माण 13 वर्ष पहले कराया गया था। प्रधान के पति भोगनाथ ने बताया कि पंचायत भवन के नवीनीकरण के लिए कई बार लिखा गया, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। पंचायत सहायक रोहित वर्मा दूसरे स्थान पर बैठकर ग्रामीणों को सुविधाएं दे रहे हैं।

बबुरी गांव के पंचायत भवन के एक कमरें में फैली गंदगी। - संवाद

बबुरी गांव के पंचायत भवन के एक कमरें में फैली गंदगी। - संवाद

बबुरी गांव के पंचायत भवन के एक कमरें में फैली गंदगी। - संवाद

बबुरी गांव के पंचायत भवन के एक कमरें में फैली गंदगी। - संवाद

बबुरी गांव के पंचायत भवन के एक कमरें में फैली गंदगी। - संवाद

बबुरी गांव के पंचायत भवन के एक कमरें में फैली गंदगी। - संवाद

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