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Lakhimpur Kheri News: तेंदुए का डर झेलते रहे ग्रामीण, वन विभाग ने बताया फिशिंग कैट
Tue, 10 Feb 2026 12:24 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Tue, 10 Feb 2026 12:24 AM IST
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शावकों को देखते ग्रामीण और वनकर्मी। संवाद
मझगईं। लुधौरी वन रेंज क्षेत्र के गांव दौलतापुर के मजरा सुरजीपुरवा में सोमवार सुबह सुरेश कुमार को सरसों के खेत में वन्य जीव का शावक दिखाई दिया। तेंदुए के शावक की खबर फैलते ही पूरे इलाके में अफरा-तफरी मच गई। ग्रामीण लाठी-डंडे लेकर मौके पर जमा हो गए।
सुरेश गांव के पूरब दिशा में स्थित तालाब के पास खेत देखने गए थे। वहां मिश्रीलाल भार्गव के सरसों के खेत की मेढ़ पर उन्हें एक छोटा शावक बैठा दिखाई दिया। उसके शरीर पर बने निशानों को देखकर सुरेश के हाथ-पांव फूल गए। उन्होंने इसे तेंदुए का बच्चा समझकर वहां से जान बचाकर भागा और गांव में शोर मचा दिया। देखते ही देखते मौके पर ग्रामीणों का जमावड़ा लग गया। लोग डर रहे थे कि अगर शावक यहां है तो मादा तेंदुआ भी आसपास हो सकती है।
सूचना पर तुरंत लुधौरी वन रेंज की टीम मौके पर पहुंची। वन कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद शावक को बोरी में बंद किया और अपने साथ ले गए। वन दारोगा पीयूष कुमार ने बताया कि जांच में पाया गया कि यह तेंदुए का नहीं, बल्कि फिशिंग कैट का शावक है। शारीरिक बनावट और शरीर पर धब्बे होने के कारण लोग अक्सर इसे तेंदुआ समझ लेते हैं। शावक को सुरक्षित तरीके से जंगल में छोड़ दिया गया। इस दौरान वनरक्षक सरताज अली, चंद्र शेखर, राजेंद्र भार्गव और छोटेलाल सहित पूरी टीम मुस्तैद रही।
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सुरेश गांव के पूरब दिशा में स्थित तालाब के पास खेत देखने गए थे। वहां मिश्रीलाल भार्गव के सरसों के खेत की मेढ़ पर उन्हें एक छोटा शावक बैठा दिखाई दिया। उसके शरीर पर बने निशानों को देखकर सुरेश के हाथ-पांव फूल गए। उन्होंने इसे तेंदुए का बच्चा समझकर वहां से जान बचाकर भागा और गांव में शोर मचा दिया। देखते ही देखते मौके पर ग्रामीणों का जमावड़ा लग गया। लोग डर रहे थे कि अगर शावक यहां है तो मादा तेंदुआ भी आसपास हो सकती है।
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सूचना पर तुरंत लुधौरी वन रेंज की टीम मौके पर पहुंची। वन कर्मियों ने कड़ी मशक्कत के बाद शावक को बोरी में बंद किया और अपने साथ ले गए। वन दारोगा पीयूष कुमार ने बताया कि जांच में पाया गया कि यह तेंदुए का नहीं, बल्कि फिशिंग कैट का शावक है। शारीरिक बनावट और शरीर पर धब्बे होने के कारण लोग अक्सर इसे तेंदुआ समझ लेते हैं। शावक को सुरक्षित तरीके से जंगल में छोड़ दिया गया। इस दौरान वनरक्षक सरताज अली, चंद्र शेखर, राजेंद्र भार्गव और छोटेलाल सहित पूरी टीम मुस्तैद रही।
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