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Lakhimpur Kheri News: लाखों की लागत से बने बंद पड़े ग्राम सचिवालय, खा रहे धूल

Mon, 02 Jun 2025 11:32 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Updated Mon, 02 Jun 2025 11:32 PM IST
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Village secretariats built at the cost of lakhs are lying closed, gathering dust
ग्राम पंचायत भेड़ौरी के सचिवालय में पसरा सन्नाटा। संवाद
बेलरायां। क्षेत्र के भारत-नेपाल सीमा की ग्राम पंचायतों में लाखों रुपये लगाकर बनाए गए ग्राम सचिवालय शोपीस बन गए हैं और धूल फांक रहे हैं। इनकी यह हालत जिम्मेदारों के रुचि न लेने की वजह से हुई है। यहां पंचायत की खुली बैठकें नहीं होती हैं और न ही यह कभी खोले जाते हैं। इस वजह से ग्रामीणों को अपनी समस्याओं के लिए अफसरों की चौखट पर गुहार लगानी पड़ रही है।
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सचिवालय संचालित करने के लिए भवन में समाज कल्याण विभाग, पीडब्ल्यूडी, पुलिस, शिक्षा, खाद्यान्न, विकास, राजस्व, स्वास्थ्य विभाग समेत 14 विभागों के जिम्मेदारों को निर्धारित तिथियों में ड्यूटी निभाने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, लेकिन यह सचिवालय हाथी के दांत साबित हुए और ग्रामीणों की समस्या जस की तस रह गई। ग्रामीणों ने ग्राम सचिवालय भवन पर अधिकारियों की खुली बैठक कराने और समस्याएं दूर कराने की मांग मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से की है।
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भाजपा की कल्याण सिंह सरकार में हुआ था निर्माण

सन 2001 में भाजपा की कल्याण सिंह सरकार ने प्रदेश की ग्राम पंचायतों में लोगों की समस्याओं को ग्राम स्तर पर दूर कराने के लिए ग्राम सचिवालय भवन निर्माण कराने का फरमान जारी किया था। इस पर प्रशासन द्वारा गांवों में ग्राम सचिवालय बनवाए गए। क्षेत्र की ग्राम पंचायत भिड़ौरी की पूर्व प्रधान नसीम बानो, बीडीसी साधना पांडे ने भूमि पूजन कर सचिवालय के निर्माण कार्य का शुभारंभ किया था।
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सरकार ने ग्राम सचिवालय भवन में मीटिंग हॉल, कमरा, बरामदा, शौचालय, बिजली, पानी, लाॅन, फूल-पौधों का इंतजाम कराया था। यहां 14 विभागों के जिम्मेदारों की ड्यूटी लगाई गई और सभी ने सचिवालयों में बैठना शुरू कर दिया। जिम्मेदारों ने भवन में ग्रामीणों की बैठक कर समस्याओं का समाधान करना शुरू कर दिया था और ग्रामीणों को तहसील तक दौड़ना नहीं पड़ता था। इससे ग्रामीणों की राशनकार्ड, इंतखाब, पेंशन सहित तमाम समस्याओं से छुटकारा मिलना शुरू हो गया।



वर्ष में एक दो बार ही होती हैं बैठकें

ग्रामीणों का कहना है कि सचिवालय में अधिकारियों ने बैठने में रुचि कम कर दी है। निघासन की 65 ग्राम पंचायतों के अस्थाई अस्थाई ग्राम सचिवालय भवन के जिम्मेदारों ने वर्ष में एकाध बार ही बैठकें कर औपचारिकताएं पूरी की हैं। उधर ग्राम पंचायत भैरमपुर में ग्राम सचिवालय भवन न होने के कारण ग्राम रोजगार सेवक एक किराए की दुकान में कंप्यूटर के जरिए ग्रामीणों की सहायता कर रहा है। वहीं पंचायतों के ग्राम सचिवालय में नियुक्त ग्राम रोजगार सेवकों की नियमित आवाजाही न होने से यहां आए दिन ताला लटकता रहता है इससे ग्रामीणों में असंतोष व्याप्त है।


वर्जन...
ग्राम पंचायतों में बने ग्राम सचिवालय की गंभीरता से जांच कराई जाएगी। जांच के बाद जिम्मेदारों से जवाब तलब कर इसका हल निकाला जाएगा और ग्रामीणों की समस्याओं का गंभीरता से निस्तारण कराया जाएगा।
- जयेश कुमार, बीडीओ निघासन
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