Sawan 2023: पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान यहां स्थापित किए गए थे 11 शिवलिंग, जानिए पौराणिक इतिहास
मोहम्मदी तहसील का बड़खर गांव राजा विराट के साम्राज्य का हिस्सा था। पांडवों ने एक वर्ष का अज्ञातवास राजा विराट के राज्य में शामिल इसी क्षेत्र में बिताया था। इस दौरान पांडवों ने यहां 11 शिवलिंग स्थापित किए थे।
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महाभारतकाल की एक गाथा लखीमपुर खीरी जिले के बड़खर गांव से भी जुड़ी है। इस गांव में स्थित वनखंडीनाथ शिव मंदिर पांडवों के अज्ञातवास का साक्षी रहा है। बताते हैं कि पांडवों ने अपने अज्ञातवास के दौरान इस क्षेत्र में 11 शिवलिंग स्थापित किए थे। इनमें से एक शिवलिंग वन में स्थापित होने के कारण यह शिवलिंग वनखंडीनाथ के नाम से प्रसिद्ध हुआ।
मोहम्मदी तहसील का बड़खर गांव कभी राजा विराट के साम्राज्य का हिस्सा था। द्यूत क्रीड़ा में हार के बाद पांडवों को 12 वर्ष का वनवास और एक वर्ष का अज्ञातवास भोगना पड़ा। पांडवों ने एक वर्ष का अज्ञातवास राजा विराट के राज्य में शामिल इसी क्षेत्र में बिताया था।
अपने अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने यहां पर 11 शिवलिंग स्थापित किए। इन शिवलिंगों में सिरसा घाट, ऊंचवा घाट, पालननाथ, वनखंडी नाथ, बटेश्वर नाथ, जंगली नाथ, गरीब नाथ, पारसनाथ, टेढ़ेनाथ, लब्धेश्वर नाथ, डेंगेश्रृरनाथ यह सभी शिवलिंग अष्टकोण हैं और एक समान है। वनखंडीनाथ मंदिर बड़खर गांव के नजदीक है।
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वनखंडीनाथ मंदिर के निकट गदाईताल है। इसके बारे में कहा जाता है कि द्रौपदी के स्नान के लिए इस तालाब को भीम ने अपनी गदा के प्रहार से बनाया था। इससे कुछ दूरी पर करीब दो एकड़ क्षेत्रफल में फैला विशाल वंशीवट तालाब भी है। इसे कभी स्नान के लिए प्रयोग किया जाता रहा होगा। इस तालाब के चारों तरफ पक्की सीढ़ियां बनी थीं। जिनके अब सिर्फ अवशेष ही बचे हैं।
राजा विराट का था किला
कभी यहां घना जंगल था। यहीं पर राजा विराट का किला हुआ करता था। किले के खंडहर यहां आज भी ऊंचे टीलों के रूप में मौजूद हैं। इस किले में छह गुंबद हुआ करते थे जो आज भी साफ दिखाई दे रहे हैं। किला निर्माण में डेढ़ फुट चौड़ी इतनी ही लंबी ईटों का प्रयोग किया गया था। दीवारें काफी चौड़ी थीं। इसी महल के पास द्रोपदी मंदिर बनखंडी नाथ मंदिर और गदाई ताल और बंसीवट तालाब मौजूद है।
राजा विराट के किले के आसपास पांच प्राचीन कुएं आज भी मौजूद हैं, जिनमें से तीन कुओं के अवशेष तो दिखाई पड़ रहे हैं जबकि दो विलुप्त हो गए हैं। कीचक वध के समय भीम द्वारा कीचक को घसीटने के निशान कीचकाखार के रूप में आज भी यहां मौजूद हैं। कीचकाखार नाले के रूप में है। मानना है कि भीम ने कीचक को मारकर उसे घसीटते हुए गोमती की तरफ ले गए थे।
यहीं पर द्रौपदी का एक मंदिर भी मौजूद है, जिसमें द्रौपदी की मूर्ति स्थापित थी। जिसे मुगलों ने खंडित कर दिया था लेकिन खंडित मूर्ति इस मंदिर में आज भी संरक्षित की गई है जो एतिहासिक और बहुत ही पुरानी प्रतीत हो रही है। वनखंडी नाथ मंदिर तक जाने का रास्ता बहुत संकरा और कीचड़ युक्त है। देखरेख के अभाव में विरासत अपनी पहचान खो रही है।