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मौसम की मार ऊपर से कीटों का कहर
लखीमपुर खीरी।
Updated Tue, 07 Apr 2015 08:19 PM IST
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एक तरफ मौसम किसानों पर सितम ढा रहा है तो दूसरी ओर कीटों के कहर से फसलें चौपट हो रहीं हैं। पिछले दो-तीन वर्षों से जिले में निमेटोड और व्हाइट ग्रब कीटों का प्रकोप एकाएक बढ़ा है। निमेटोड, केले और सब्जियों को, तो व्हाइट ग्रब गन्ने और केले की फसल को नुकसान पहुंचा रहा है। सबसे खतरनाक बात तो यह है कि इन कीटों पर नियंत्रण में रासायनिक कीटनाशक दवाओं का कोई असर नहीं हो रहा है।
एक अनुमान के मुताबिक पिछले दो साल के अंदर जिले में निमेटोड 10 से 15 फीसदी सब्जियां चट कर चुका है तो व्हाइट ग्रब ने गन्ने और केले को 15 से 20 फीसदी तक नुकसान पहुंचाया है। यह दोनों कीट पौधे की जड़ों में लगते हैं। इससे जड़ें फूल जाती हैं और पौधा धीरे-धीरे सूख जाता है। गर्मियों के मौसम में इन कीटों का प्रकोप ज्यादा बढ़ जाता है। बलुई और नम मिट्टी वाले क्षेत्रों में इन कीटों का सबसे ज्यादा प्रभाव दिख रहा है।
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इन फसलों को नुकसान पहुंचाता है निमेटोड
निमेटोड धान, मूंगफली, बैंगन, मिर्च, केला, टमाटर के अलावा बेल वाली सब्जियां जैसे लौकी कद्दू और तोरई पर हमला कर जड़ों को नुकसान पहुंचाता है। इसके बाद पौध सूख जाती है। इसका असर भी नदियों के दोआबे और बलुई मिट्टी में सबसे ज्यादा हो रहा है।
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गन्ने और केले को नुकसान पहुंचाता है व्हाइट ग्रब
व्हाइट ग्रब सबसे ज्यादा नुकसान गन्ने और केले को पहुंचा रहा है। जिले में व्हाइट ग्रब का सबसे ज्यादा असर पलिया, संपूर्णानगर, धौरहरा और निघासन में नदियों के किनारे वाले क्षेत्रों में है। इस कीट के लगने से सबसे ज्यादा नुकसान केले की फसल को हो रहा है।
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पिछले दो-तीन साल से खीरी जिले में निमेटोड और व्हाइट ग्रब का प्रकोप बढ़ा है। इससे फसलों को भारी नुकसान हो रहा है। भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान लखनऊ ने इसके नियंत्रण के लिए लाइट कम सेरोमन ट्रैप तैयार किया है। इसके अलावा नीम की खली इन कीटों की रोकथाम में असरकारक है।
-डॉ. प्रदीप कुमार विसेन, कृषि वैज्ञानिक
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यह सच है कि जिले में निमेटोड और व्हाइट ग्रब का प्रकोप बढ़ा है लेकिन बहुत ज्यादा नहीं है। इसके लिए कृषि रक्षा केंद्रों पर दवाएं उपलब्ध हैं। इन कीटों पर जल्दी ही नियंत्रण कर लिया जाएगा।
-शिव कुमार केसरी, उप कृषि निदेशक प्रसार
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एक अनुमान के मुताबिक पिछले दो साल के अंदर जिले में निमेटोड 10 से 15 फीसदी सब्जियां चट कर चुका है तो व्हाइट ग्रब ने गन्ने और केले को 15 से 20 फीसदी तक नुकसान पहुंचाया है। यह दोनों कीट पौधे की जड़ों में लगते हैं। इससे जड़ें फूल जाती हैं और पौधा धीरे-धीरे सूख जाता है। गर्मियों के मौसम में इन कीटों का प्रकोप ज्यादा बढ़ जाता है। बलुई और नम मिट्टी वाले क्षेत्रों में इन कीटों का सबसे ज्यादा प्रभाव दिख रहा है।
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इन फसलों को नुकसान पहुंचाता है निमेटोड
निमेटोड धान, मूंगफली, बैंगन, मिर्च, केला, टमाटर के अलावा बेल वाली सब्जियां जैसे लौकी कद्दू और तोरई पर हमला कर जड़ों को नुकसान पहुंचाता है। इसके बाद पौध सूख जाती है। इसका असर भी नदियों के दोआबे और बलुई मिट्टी में सबसे ज्यादा हो रहा है।
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गन्ने और केले को नुकसान पहुंचाता है व्हाइट ग्रब
व्हाइट ग्रब सबसे ज्यादा नुकसान गन्ने और केले को पहुंचा रहा है। जिले में व्हाइट ग्रब का सबसे ज्यादा असर पलिया, संपूर्णानगर, धौरहरा और निघासन में नदियों के किनारे वाले क्षेत्रों में है। इस कीट के लगने से सबसे ज्यादा नुकसान केले की फसल को हो रहा है।
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पिछले दो-तीन साल से खीरी जिले में निमेटोड और व्हाइट ग्रब का प्रकोप बढ़ा है। इससे फसलों को भारी नुकसान हो रहा है। भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान लखनऊ ने इसके नियंत्रण के लिए लाइट कम सेरोमन ट्रैप तैयार किया है। इसके अलावा नीम की खली इन कीटों की रोकथाम में असरकारक है।
-डॉ. प्रदीप कुमार विसेन, कृषि वैज्ञानिक
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यह सच है कि जिले में निमेटोड और व्हाइट ग्रब का प्रकोप बढ़ा है लेकिन बहुत ज्यादा नहीं है। इसके लिए कृषि रक्षा केंद्रों पर दवाएं उपलब्ध हैं। इन कीटों पर जल्दी ही नियंत्रण कर लिया जाएगा।
-शिव कुमार केसरी, उप कृषि निदेशक प्रसार