{"_id":"69ee59b218353a9a5b0374a3","slug":"up-lags-behind-in-blood-donation-gujarat-kerala-ahead-dr-tulika-lakhimpur-news-c-120-1-lkh1011-173799-2026-04-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"रक्तदान में यूपी पीछे, गुजरात-केरल आगे : डॉ. तूलिका","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
रक्तदान में यूपी पीछे, गुजरात-केरल आगे : डॉ. तूलिका
Mon, 27 Apr 2026 12:00 AM IST
बरेली ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
Updated Mon, 27 Apr 2026 12:00 AM IST
विज्ञापन
लखीमपुर खीरी। भारत में रक्तदान के मामले में उत्तर प्रदेश की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है, जबकि गुजरात और केरल जैसे राज्य बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं।
यह बात स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय देवकली में आयोजित ‘मेडिकल एल्ट्रिज्म (परोपकारार्थमिदं शरीरम्)’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान केजीएमयू की प्रोफेसर डॉ. तूलिका चंद्रा ने कही।
उन्होंने कहा कि रक्तदान को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। यदि देश के केवल दो प्रतिशत युवा भी नियमित रूप से रक्तदान करने लगें, तो खून की कमी पूरी तरह खत्म हो सकती है। उन्होंने इसे समाज के लिए बड़ा योगदान बताते हुए कहा कि रक्तदान महादान है, क्योंकि यह ऐसा दान है जिसे व्यक्ति जीवित रहते हुए कर सकता है।
डॉ. चंद्रा ने बताया कि एक व्यक्ति द्वारा किया गया रक्तदान चार लोगों की जान बचाने में सहायक हो सकता है। हर स्वस्थ व्यक्ति को हर तीन माह और महिलाओं को चार माह के अंतराल पर रक्तदान करना चाहिए। इससे स्वास्थ्य पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता, बल्कि शरीर में नई रक्त कोशिकाओं का निर्माण होता है।
विज्ञापन
उन्होंने सम्मेलन में मौजूद चिकित्सकों और मेडिकल छात्रों से स्वयं रक्तदान करने और समाज को इसके लिए प्रेरित करने की अपील की। विशेषज्ञों का मानना है कि रक्तदान को जनआंदोलन का रूप दिया जाए, तो आपात स्थितियों में मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराया जा सकता है।
विज्ञापन
यह बात स्वशासी राज्य चिकित्सा महाविद्यालय देवकली में आयोजित ‘मेडिकल एल्ट्रिज्म (परोपकारार्थमिदं शरीरम्)’ विषय पर अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन के दौरान केजीएमयू की प्रोफेसर डॉ. तूलिका चंद्रा ने कही।
उन्होंने कहा कि रक्तदान को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है। यदि देश के केवल दो प्रतिशत युवा भी नियमित रूप से रक्तदान करने लगें, तो खून की कमी पूरी तरह खत्म हो सकती है। उन्होंने इसे समाज के लिए बड़ा योगदान बताते हुए कहा कि रक्तदान महादान है, क्योंकि यह ऐसा दान है जिसे व्यक्ति जीवित रहते हुए कर सकता है।
विज्ञापन
डॉ. चंद्रा ने बताया कि एक व्यक्ति द्वारा किया गया रक्तदान चार लोगों की जान बचाने में सहायक हो सकता है। हर स्वस्थ व्यक्ति को हर तीन माह और महिलाओं को चार माह के अंतराल पर रक्तदान करना चाहिए। इससे स्वास्थ्य पर कोई नकारात्मक असर नहीं पड़ता, बल्कि शरीर में नई रक्त कोशिकाओं का निर्माण होता है।
विज्ञापन
उन्होंने सम्मेलन में मौजूद चिकित्सकों और मेडिकल छात्रों से स्वयं रक्तदान करने और समाज को इसके लिए प्रेरित करने की अपील की। विशेषज्ञों का मानना है कि रक्तदान को जनआंदोलन का रूप दिया जाए, तो आपात स्थितियों में मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराया जा सकता है।