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मिट्टी से उठकर छुआ आसमान: लखीमपुर खीरी में जिला टॉपर उमाशंकर की झोपड़ी में पहुंचे डीएम, किया सम्मानित

Sat, 25 Apr 2026 01:09 PM IST
बरेली ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी
संवाद न्यूज एजेंसी, लखीमपुर खीरी Updated Sat, 25 Apr 2026 01:09 PM IST
सार

लखीमपुर खीरी जिले में इंटरमीडिएट के छात्र उमाशंकर ने 93.60 प्रतिशत अंक पाकर जिले में पहला स्थान पाया है। उनके माता-पिता मजदूरी करते हैं। न जमीन है और न ही पक्का घर। झोपड़ी में रहने वाले उमाशंकर ने कठिन हालात को हराकर सफलता का परचम लहराया है। 

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DM Visits the Hut of District Topper Student Umashankar in Lakhimpur Kheri
डीएम ने मेधावी छात्र उमाशंकर को किया सम्मानित - फोटो : संवाद

विस्तार

जमीन इतनी नहीं है कि पांव रख पाएं, दिल-ए-खराब की जिद है कि घर बनाया जाए... ये पंक्तियां इंटरमीडिएट में 93.60 प्रतिशत अंक लाकर लखीमपुर खीरी में जिला टॉप करने वाले रामनगर बगहा गांव के उमाशंकर पर सटीक बैठती हैं।

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मजदूरी कर परिवार चलाने वाले पिता भगौती और मां कामना ने कठिन हालात के बावजूद बेटे की पढ़ाई को प्राथमिकता दी। बिना ट्यूशन, कोचिंग और संसाधनों के उमाशंकर ने पांचों विषयों में विशेष योग्यता के साथ जिले में टॉप किया है। डीएम ने शुक्रवार को गांव पहुंचकर मेधावी उमाशंकर को सम्मानित किया। 
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अंत्योदय कार्डधारक भगौती की तीन बीघा जमीन घाघरा नदी में समा चुकी है। कच्चा घर भी कटान की जद में है। माता-पिता मजदूरी कर बेटे की पढ़ाई का खर्च उठाते रहे, जबकि उमाशंकर भी समय मिलने पर खेतों में हाथ बंटाता था। पढ़ाई के लिए स्मार्टफोन की जरूरत पड़ने पर वह दोस्तों और आसपास के लोगों से मदद लेता था। उमाशंकर सिविल इंजीनियर बनकर माता-पिता के सपने पूरे करना और छोटी बहन की शादी धूमधाम से करने की इच्छा रखता है।
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गांव के स्कूल से शुरू की थी पढ़ाई 
उमाशंकर ने जूनियर तक की पढ़ाई गांव के प्राइमरी स्कूल से की। आर्थिक तंगी के चलते माता-पिता पढ़ाई छुड़वाना चाहते थे, लेकिन बेटे की जिद के आगे झुकते हुए उसे क्षेत्र के एक निजी स्कूल में दाखिला दिलाया। रिजल्ट के समय माता-पिता गांव से 30 किमी दूर सुजईकुंडा में गेहूं काट रहे थे। मां कामना का कहना है कि बेटा आगे पढ़ना चाहता है, लेकिन घर की हालत बेहद खराब है। 

डीएम पहुंचे झोपड़ी में, यादगार बने पल
जिला टॉपर उमाशंकर के घर जब डीएम अंजनी कुमार सिंह पहुंचे तो पूरा गांव उत्सव में बदल गया। करीब 60 किमी का सफर तय कर डीएम रामनगर बगहा आए और झोंपड़ी के सामने खटिया पर बैठकर उमाशंकर से बातचीत की। उन्होंने उमाशंकर को अपने पास बैठाकर उसकी पढ़ाई, संघर्ष और सपनों के बारे में जाना। उमाशंकर ने अपनी लिखी कविताएं और गजलें दिखाई, जिन्हें पढ़कर डीएम ने उसकी प्रतिभा की सराहना की।

कविता, कॉपी और कॅरिअर का संकल्प
डीएम ने कहा कि उमाशंकर की प्रतिभा को आगे बढ़ाने में प्रशासन पूरा सहयोग करेगा। जब उन्होंने पूछा कि आगे क्या बनना चाहते हो, तो उमाशंकर ने सिविल इंजीनियर बनने की इच्छा जताई। इस पर डीएम ने कहा कि अब यह सपना केवल तुम्हारा नहीं, प्रशासन का भी है। डीएम ने माता-पिता से भी बातचीत कर हर संभव सहयोग का आश्वासन दिया। इस मौके पर एसडीएम शशिकांत मणि, डीआईओएस विनोद कुमार मिश्र, बीडीओ श्रद्धा गुप्ता, एसआई जुबेर अहमद, खंड शिक्षाधिकारी फूलचंद सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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