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गिनती की लकड़ियां जलाकर ठंड भगाने की कोशिश
लखीमपुर खीरी
Updated Fri, 18 Dec 2015 07:32 PM IST
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कड़ाके की ठंड और रातों में सड़कों पर ठिठुरते लोग। ये तस्वीर है अपने शहर लखीमपुर की, जहां प्रशासनिक अफसर तो पूरे इंतजाम के साथ रहते हैं, लेकिन गरीबों और राहगीरों का कोई पुरसाहाल नहीं है। शहरी क्षेत्र में तहसील प्रशासन अलाव जलाने की खानापूरी में लगा है। कुछ चौराहों पर गिनती की लकड़ियां जलाकर न सिर्फ लोगों के साथ भद्दा मजाक किया जा रहा है, बल्कि स्पष्ट हो रहा है कि तहसील प्रशासन शासन के निर्देशों को लेकर गंभीर नहीं है। शासन ने लगातार गिरते तापमान को देखते हुए अलाव की व्यवस्था के लिए बजट जारी किया है। तहसीलदार राजीव शुक्ला के मुताबिक सदर तहसील को भी 40 हजार रुपये का बजट मिला है। तहसील प्रशासन की ओर से रोडवेज बस अड्डा, हीरालाल धर्मशाला, रेलवे स्टेशन, तहसील परिसर आदि जगहों पर अलाव की व्यवस्था की गई है, लेकिन गिनती भर की लकड़ियां होने के कारण अलाव कुछ ही देर में बुझ जाते हैं, जिसकी वजह से लोग रात में ठिठुरने को मजबूर हो जाते हैं। अमर उजाला ने गुरुवार की रात शहरी क्षेत्र के कई सार्वजनिक स्थलों का मुआयना किया तो कुछ अलग ही तस्वीर दिखाई पड़ी। पेश है रिपोर्ट-
रोडवेज बस स्टैंड
रात आठ बजे: रोडवेज बस स्टैंड पर तहसील प्रशासन की ओर से जलाया गया अलाव रात आठ बजे ही बुझने लगा। जिसकी वजह से ठंड से ठिठुरते लोग चाय की दुकानों पर भट्ठियों के पास सिमटे नजर आए। लोगों की शिकायत थी कि अलाव के लिए कम लकड़ियां डाली जा रही हैं।
हीरालाल धर्मशाला चौराहा
रात साढ़े आठ बजे: तहसील प्रशासन के दावे के उलट हीरालाल धर्मशाला चौराहे पर लोग पुआल जलाकर तापते नजर आए। यहां लकड़ियां नहीं डाली गई थीं। पुआल भी थोड़ा था, इसलिए कुछ ही देर तक लोगों की ठंड दूर हो सकी। इसके बाद लोग हाथ बांधे हुए ठंड से बचने का प्रयास करते रहे।
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रेलवे स्टेशन लखीमपुर
रात नौ बजे: यहां भी तहसील प्रशासन का दावा गलत साबित हुआ। तहसील कर्मियों ने रेलवे स्टेशन पर अलाव जलाने के लिए लकड़ियां तक नहीं डालीं थी। जिसके कारण लोग लोग झिल्ली जलाकर ठंड से बचने का प्रयास करते रहे। कुछ लोगों का कहना था कि अलाव के नाम पर छलावा किया जा रहा है।
मालगोदाम
रात सवा नौ बजे: रेलवे स्टेशन से सटे मालगोदाम पर ग्रामीण क्षेत्रों से आए मजदूर और राहगीर ठहरते हैं। गुरुवार की रात तहसील कर्मियों ने यहां गिनती भर की लकड़ियां जलाई थी, जो कुछ ही देर में बुझ गई। नतीजतन लोग अपने पास मौजूद इंतजामों से ही ठंड से बचाव करते नजर आए। लोगों की शिकायत थी कि तहसील प्रशासन गरीबों की ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
डीएम किंजल सिंह ने बताया कि ठंड से हर किसी को राहत दिलाने के लिए प्रशासन कटिबद्ध है। अलाव लगाने से लेकर जरूरतमंदों को कंबल देने तक की व्यवस्था की गई है। इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही मिली तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।
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रोडवेज बस स्टैंड
रात आठ बजे: रोडवेज बस स्टैंड पर तहसील प्रशासन की ओर से जलाया गया अलाव रात आठ बजे ही बुझने लगा। जिसकी वजह से ठंड से ठिठुरते लोग चाय की दुकानों पर भट्ठियों के पास सिमटे नजर आए। लोगों की शिकायत थी कि अलाव के लिए कम लकड़ियां डाली जा रही हैं।
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हीरालाल धर्मशाला चौराहा
रात साढ़े आठ बजे: तहसील प्रशासन के दावे के उलट हीरालाल धर्मशाला चौराहे पर लोग पुआल जलाकर तापते नजर आए। यहां लकड़ियां नहीं डाली गई थीं। पुआल भी थोड़ा था, इसलिए कुछ ही देर तक लोगों की ठंड दूर हो सकी। इसके बाद लोग हाथ बांधे हुए ठंड से बचने का प्रयास करते रहे।
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रेलवे स्टेशन लखीमपुर
रात नौ बजे: यहां भी तहसील प्रशासन का दावा गलत साबित हुआ। तहसील कर्मियों ने रेलवे स्टेशन पर अलाव जलाने के लिए लकड़ियां तक नहीं डालीं थी। जिसके कारण लोग लोग झिल्ली जलाकर ठंड से बचने का प्रयास करते रहे। कुछ लोगों का कहना था कि अलाव के नाम पर छलावा किया जा रहा है।
मालगोदाम
रात सवा नौ बजे: रेलवे स्टेशन से सटे मालगोदाम पर ग्रामीण क्षेत्रों से आए मजदूर और राहगीर ठहरते हैं। गुरुवार की रात तहसील कर्मियों ने यहां गिनती भर की लकड़ियां जलाई थी, जो कुछ ही देर में बुझ गई। नतीजतन लोग अपने पास मौजूद इंतजामों से ही ठंड से बचाव करते नजर आए। लोगों की शिकायत थी कि तहसील प्रशासन गरीबों की ओर ध्यान नहीं दे रहा है।
डीएम किंजल सिंह ने बताया कि ठंड से हर किसी को राहत दिलाने के लिए प्रशासन कटिबद्ध है। अलाव लगाने से लेकर जरूरतमंदों को कंबल देने तक की व्यवस्था की गई है। इसमें किसी भी स्तर पर लापरवाही मिली तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।