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प्रशिक्षु शिक्षकों के प्रमाण पत्रों के सत्यापन में घपलेबाजी
लखीमपुर खीरी।
Updated Mon, 28 Dec 2015 12:18 AM IST
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प्रशिक्षु शिक्षकों और शिक्षा मित्रों के प्रमाण पत्रों के सत्यापन में इलाहाबाद बोर्ड से घपलेबाजी की जा रही है, जिससे सक्रिय रैकेट अंजाम दे रहा है। खास बात यह है कि बीएसए दफ्तर से भेजी जाने वाली सूची पर ध्यान नहीं दिया जाता है, जबकि अभ्यर्थियों के प्रारूप पर ही सत्यापन किया जा रहा है। शहर में भी यह रैकेट सक्रिय है और एक बुक स्टाल से लोगों को फांस रहा है। सत्यापन कराने के लिए पांच सौ से एक हजार रुपये तक बैंक खाते में जमा कराए जा रहे हैं। फिलहाल विभागीय जांच मानकर बैठे हजारों शिक्षकों का सत्यापन लटका है।
बीएसए डॉ ओपी राय ने बताया कि वह प्रशिक्षु शिक्षक की नियुक्ति के बाद उसके शैक्षिक अंक पत्र और प्रमाण पत्र का सत्यापन कराने के लिए कानपुर विश्वविद्यालय के कुल सचिव और यूपी बोर्ड को सूची भेजते हैं, लेकिन उनके यहां से भेजे जाने वाले अभिलेखों को नजरअंदाज किया जाता है। इससे हजारों प्रशिक्षु शिक्षकों के अभिलेखों का सत्यापन न होने से उनका वेतन नहीं निकल पता। आज भी जिले में चार से सात हजार शिक्षकों को सत्यापन के कारण वेतन नहीं दिया जा पा रहा है। वह भटक रहे हैं। पिछले एक साल में गिनती के शिक्षकों का सत्यापन हुआ है, जिसमें भी तमाम त्रुटियां हैं। विभागीय सूत्र बताते हैं कि सत्यापन कराने के लिए जिले से लेकर इलाहाबाद और कानपुर तक में रैकेट सक्रिय है। शहर के एक बुक स्टाल से सत्यापन करा दिया जा रहा है। यहां सक्रिय दलाल एक हजार रुपये की डिमांड करते हैं और पांच सौ तक में मान जाते हैं। वह एक बैक खाते में पैसा डलवाते हैं, उसके बाद सत्यापन होकर आ जाता है।
कुल सचिव के लौटे सत्यापन में यह मिली अनियमितता
बीएसए डॉ राय ने बताया कि कानपुर यूनिवर्सिटी से एक सत्यापन होकर आया तो अनियमितता मिली, जिस पर उन्होंने छत्रपति साहूजी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के कुल सचिव को भेजे गए पत्र में लिखा है कि उन्होंने पांच अक्तूबर 2015 को विज्ञान, स्नातक के 205, गणित स्नातक का एक ओर बीएड के 91 व कृषि स्नातक के 11 परीक्षाफल सत्यापन के लिए भेजे गए हैं, जिसमें से कोई भी सत्यापन आख्या नहीं भेजी गई, जबकि आपके विश्वविद्यालय के सत्यापन अनुभाग द्वारा अपने पत्र से मात्र एक अभ्यर्थी की सत्यापन आख्या भेजी है, जिस पर इस कार्यालय के संदर्भित पत्र का विवरण न देकर गलत पत्रांक दिया गया है, जिससे प्रतीत होता है कि इस कार्यालय के संदर्भ में पत्र आख्या न भेजकर संभवत: स्वयं अभ्यर्थी के उपस्थित होने पर उससे संबंधित सत्यापित आख्या भेजी गई है। बीएसए ने इसे पत्र में नितांत आपत्तिजनक और अनियमित बताया है। उन्होंने इसमें यूपी बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय और कुल सचिव दफ्तर के लिपिक की संलिप्तता होने की आशंका जताई है। बीएसएस ने भविष्य में ऐसी अनियमितता रोकने के लिए मामले में कार्यवाही करने का अनुरोध किया है।
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यूपी बोर्ड कार्यालय से यह मिली अनियमितताएं
यूपी बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय से हुए सत्यापन में तो गड़बडिय़ां अपार हैं। बीएसए बताते हैं कि जो सत्यापन आख्या मिली हैं, उन पर कार्यालय बेसिक शिक्षा अधिकारी, लखीमपुर लिखा है, जबकि हस्ताक्षर सचिव, माध्यमिक शिक्षा परिषद कर रहे हैं। इसके अलावा किसी भी सत्यापन आख्या में भेजे गए पत्रांक पर बीएसए दफ्तर के संदर्भित पत्र का उल्लेख नहीं है। यहां भी अभ्यर्थी के उपस्थित होने अथवा अन्य किसी कारण से मनगढ़ंत पत्रांक का उल्लेख कर सत्यापन आख्या भेज दी गई है, जो कि पूरी तरह अनियमित है।
बीएसए डॉ ओपी राय ने बताया कि कानपुर यूनिवर्सिटी और यूपी बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय से प्रशिक्षु शिक्षकों के अभिलेखों के सत्यापन कार्यालय में लगातार अनियमितताएं की जा रही है, जो अनियमित है। इसमें सक्रिय लोगों के विरुद्ध कार्यवाही होनी ही चाहिए।
डॉयट में कार्य सुचारु करने को प्राचार्य ने लिखा बीएसए को खत
बेसिक शिक्षा विभाग के आठ शिक्षकों के रिलीव होने के बाद डॉयट की व्यवस्था बिगड़ गई है। डॉयट प्राचार्य डॉ. मीरा त्रिपाठी ने बीएसए को पत्र लिखकर बिगड़ी व्यवस्था से अवगत कराने के साथ ही प्रशिक्षण और चयन कार्य सुचारू करने के लिए चार पुरुष और चार महिला शिक्षकों को डॉयट में संबद्ध करने का अनुरोध किया है।
डॉयट प्राचार्य डॉ. मीरा त्रिपाठी ने बीएसए को भेजे गए पत्र में लिखा है कि डॉयट संस्थान में पूर्व से संबद्ध आठ शिक्षकों का वेतन रोकने के कारण शिक्षकों को पत्र को गंभीरता से लेकर राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद लखनऊ के निदेशक से बार्ता बाद संबद्ध आठों शिक्षकों को 22 दिसंबर को डॉयट से कार्यमुक्त कर दिया गया था। डॉयट प्राचार्य ने आगे लिखा है कि इन शिक्षकों के कार्यमुक्त हो जाने के कारण सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशानुसार संस्थान के चयन कार्य और प्रशिक्षण कार्य दोनों ही प्रभावित हो गए हैं।
बीएसए डॉ. ओपी राय ने बताया कि डॉयट प्राचार्य ने शिक्षकों को संबद्ध करने की बाबत वार्ता की थी। पत्र अभी नहीं मिला है। पत्र मिलने के बाद शिक्षकों को संबद्ध किया जाएगा।
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बीएसए डॉ ओपी राय ने बताया कि वह प्रशिक्षु शिक्षक की नियुक्ति के बाद उसके शैक्षिक अंक पत्र और प्रमाण पत्र का सत्यापन कराने के लिए कानपुर विश्वविद्यालय के कुल सचिव और यूपी बोर्ड को सूची भेजते हैं, लेकिन उनके यहां से भेजे जाने वाले अभिलेखों को नजरअंदाज किया जाता है। इससे हजारों प्रशिक्षु शिक्षकों के अभिलेखों का सत्यापन न होने से उनका वेतन नहीं निकल पता। आज भी जिले में चार से सात हजार शिक्षकों को सत्यापन के कारण वेतन नहीं दिया जा पा रहा है। वह भटक रहे हैं। पिछले एक साल में गिनती के शिक्षकों का सत्यापन हुआ है, जिसमें भी तमाम त्रुटियां हैं। विभागीय सूत्र बताते हैं कि सत्यापन कराने के लिए जिले से लेकर इलाहाबाद और कानपुर तक में रैकेट सक्रिय है। शहर के एक बुक स्टाल से सत्यापन करा दिया जा रहा है। यहां सक्रिय दलाल एक हजार रुपये की डिमांड करते हैं और पांच सौ तक में मान जाते हैं। वह एक बैक खाते में पैसा डलवाते हैं, उसके बाद सत्यापन होकर आ जाता है।
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कुल सचिव के लौटे सत्यापन में यह मिली अनियमितता
बीएसए डॉ राय ने बताया कि कानपुर यूनिवर्सिटी से एक सत्यापन होकर आया तो अनियमितता मिली, जिस पर उन्होंने छत्रपति साहूजी महाराज विश्वविद्यालय, कानपुर के कुल सचिव को भेजे गए पत्र में लिखा है कि उन्होंने पांच अक्तूबर 2015 को विज्ञान, स्नातक के 205, गणित स्नातक का एक ओर बीएड के 91 व कृषि स्नातक के 11 परीक्षाफल सत्यापन के लिए भेजे गए हैं, जिसमें से कोई भी सत्यापन आख्या नहीं भेजी गई, जबकि आपके विश्वविद्यालय के सत्यापन अनुभाग द्वारा अपने पत्र से मात्र एक अभ्यर्थी की सत्यापन आख्या भेजी है, जिस पर इस कार्यालय के संदर्भित पत्र का विवरण न देकर गलत पत्रांक दिया गया है, जिससे प्रतीत होता है कि इस कार्यालय के संदर्भ में पत्र आख्या न भेजकर संभवत: स्वयं अभ्यर्थी के उपस्थित होने पर उससे संबंधित सत्यापित आख्या भेजी गई है। बीएसए ने इसे पत्र में नितांत आपत्तिजनक और अनियमित बताया है। उन्होंने इसमें यूपी बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय और कुल सचिव दफ्तर के लिपिक की संलिप्तता होने की आशंका जताई है। बीएसएस ने भविष्य में ऐसी अनियमितता रोकने के लिए मामले में कार्यवाही करने का अनुरोध किया है।
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यूपी बोर्ड कार्यालय से यह मिली अनियमितताएं
यूपी बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय से हुए सत्यापन में तो गड़बडिय़ां अपार हैं। बीएसए बताते हैं कि जो सत्यापन आख्या मिली हैं, उन पर कार्यालय बेसिक शिक्षा अधिकारी, लखीमपुर लिखा है, जबकि हस्ताक्षर सचिव, माध्यमिक शिक्षा परिषद कर रहे हैं। इसके अलावा किसी भी सत्यापन आख्या में भेजे गए पत्रांक पर बीएसए दफ्तर के संदर्भित पत्र का उल्लेख नहीं है। यहां भी अभ्यर्थी के उपस्थित होने अथवा अन्य किसी कारण से मनगढ़ंत पत्रांक का उल्लेख कर सत्यापन आख्या भेज दी गई है, जो कि पूरी तरह अनियमित है।
बीएसए डॉ ओपी राय ने बताया कि कानपुर यूनिवर्सिटी और यूपी बोर्ड के क्षेत्रीय कार्यालय से प्रशिक्षु शिक्षकों के अभिलेखों के सत्यापन कार्यालय में लगातार अनियमितताएं की जा रही है, जो अनियमित है। इसमें सक्रिय लोगों के विरुद्ध कार्यवाही होनी ही चाहिए।
डॉयट में कार्य सुचारु करने को प्राचार्य ने लिखा बीएसए को खत
बेसिक शिक्षा विभाग के आठ शिक्षकों के रिलीव होने के बाद डॉयट की व्यवस्था बिगड़ गई है। डॉयट प्राचार्य डॉ. मीरा त्रिपाठी ने बीएसए को पत्र लिखकर बिगड़ी व्यवस्था से अवगत कराने के साथ ही प्रशिक्षण और चयन कार्य सुचारू करने के लिए चार पुरुष और चार महिला शिक्षकों को डॉयट में संबद्ध करने का अनुरोध किया है।
डॉयट प्राचार्य डॉ. मीरा त्रिपाठी ने बीएसए को भेजे गए पत्र में लिखा है कि डॉयट संस्थान में पूर्व से संबद्ध आठ शिक्षकों का वेतन रोकने के कारण शिक्षकों को पत्र को गंभीरता से लेकर राज्य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद लखनऊ के निदेशक से बार्ता बाद संबद्ध आठों शिक्षकों को 22 दिसंबर को डॉयट से कार्यमुक्त कर दिया गया था। डॉयट प्राचार्य ने आगे लिखा है कि इन शिक्षकों के कार्यमुक्त हो जाने के कारण सुप्रीम कोर्ट और हाईकोर्ट के आदेशानुसार संस्थान के चयन कार्य और प्रशिक्षण कार्य दोनों ही प्रभावित हो गए हैं।
बीएसए डॉ. ओपी राय ने बताया कि डॉयट प्राचार्य ने शिक्षकों को संबद्ध करने की बाबत वार्ता की थी। पत्र अभी नहीं मिला है। पत्र मिलने के बाद शिक्षकों को संबद्ध किया जाएगा।