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टूरिज्म कॉरीडोर ठंडे बस्ते में
लखीमपुर खीरी
Updated Wed, 06 May 2015 08:23 PM IST
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जिले में टूरिज्म कॉरीडोर बनाने की योजना ठंडे बस्ते में दफन हो गई है। प्रदेश के इकलौते दुधवा नेशनल पार्क आने वाले सैलानियों को जिले की अन्य ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत से रूबरू कराने के लिए प्रदेश सरकार ने दुधवा नेशनल पार्क के रास्ते पड़ने वाले ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थलों को विकसित करने की योजना बनाई थी। इस योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए जिले में सर्वे भी हुआ लेकिन बाद में इसे ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।
प्रदेश सरकार ने वर्ष 2012-13 में जिले में टूरिज्म कॉरीडोर बनाने की घोषणा की थी। इसके लिए पहले डीएम ने फिर पर्यटन विभाग ने सर्वे कराया। दो चरणों में सर्वे होने के बाद भी टूरिज्म कॉरीडोर बनाने को करीब 128 करोड़ रुपये का इस्टीमेट बनाया गया। इसके बाद अज्ञात कारणों से योजना पर काम नहीं शुरू हो पाया। अब अफसरों से लेकर विधायक तक सभी इस मामले में बात करने से कतराने लगे हैं।
यह स्थल होने थे विकसित
टूरिज्म कॉरीडोर में दुधवा नेशनल पार्क के रास्ते में आने वाले ओयल स्थित मेंढक शिव मंदिर, इंदिरा मनोरंजन वन, शारदा बैराज, अंतर्वेद, सिंगाही का राजमहल और भूलभुलैया मंदिर शामिल किए जाने थे। इन स्थलों का सर्वे कर इन्हें विकसित करने की योजना बनाई गई थी।
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यह होता फायदा
टूरिस्ट कॉरीडोर बनने से पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित होने वाले स्थलों के आसपास रहने वाले लोगों को रोजगार के अवसर विकसित होते। ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति मजबूत होती और उनके रहन-सहन में भी गुणात्मक बदलाव आता लेकिन ऐसा हो न सका।
एडीएम हरिकेश चौरसिया ने बताया कि टूरिज्म कॉरीडोर बनाने के लिए सर्वे के बाद करीब 128 करोड़ रुपये का इस्टीमेट बनाया गया था। संभवत: बजट की कमी से फिलहाल काम शुरू नहीं हो पाया है।
जिलाध्यक्ष समाजवादी पार्टी अनुराग पटेल ने बताया कि टूरिज्म कॉरीडोर योजना ड्रॉप नहीं की गई है। बजट की कमी के कारण काम में देरी हो रही है। फिलहाल इसके लिए सड़कों के चौड़ीकरण का काम चल रहा है।
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प्रदेश सरकार ने वर्ष 2012-13 में जिले में टूरिज्म कॉरीडोर बनाने की घोषणा की थी। इसके लिए पहले डीएम ने फिर पर्यटन विभाग ने सर्वे कराया। दो चरणों में सर्वे होने के बाद भी टूरिज्म कॉरीडोर बनाने को करीब 128 करोड़ रुपये का इस्टीमेट बनाया गया। इसके बाद अज्ञात कारणों से योजना पर काम नहीं शुरू हो पाया। अब अफसरों से लेकर विधायक तक सभी इस मामले में बात करने से कतराने लगे हैं।
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यह स्थल होने थे विकसित
टूरिज्म कॉरीडोर में दुधवा नेशनल पार्क के रास्ते में आने वाले ओयल स्थित मेंढक शिव मंदिर, इंदिरा मनोरंजन वन, शारदा बैराज, अंतर्वेद, सिंगाही का राजमहल और भूलभुलैया मंदिर शामिल किए जाने थे। इन स्थलों का सर्वे कर इन्हें विकसित करने की योजना बनाई गई थी।
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यह होता फायदा
टूरिस्ट कॉरीडोर बनने से पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित होने वाले स्थलों के आसपास रहने वाले लोगों को रोजगार के अवसर विकसित होते। ग्रामीणों की आर्थिक स्थिति मजबूत होती और उनके रहन-सहन में भी गुणात्मक बदलाव आता लेकिन ऐसा हो न सका।
एडीएम हरिकेश चौरसिया ने बताया कि टूरिज्म कॉरीडोर बनाने के लिए सर्वे के बाद करीब 128 करोड़ रुपये का इस्टीमेट बनाया गया था। संभवत: बजट की कमी से फिलहाल काम शुरू नहीं हो पाया है।
जिलाध्यक्ष समाजवादी पार्टी अनुराग पटेल ने बताया कि टूरिज्म कॉरीडोर योजना ड्रॉप नहीं की गई है। बजट की कमी के कारण काम में देरी हो रही है। फिलहाल इसके लिए सड़कों के चौड़ीकरण का काम चल रहा है।