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तिकुनिया कांड : जांच पूरी नहीं, 16 नवंबर तक बढ़ी जूडिशियल कस्टडी
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- फोटो : demo photo
किसानों की एफआईआर में गिरफ्तार सभी 13 आरोपी अब 16 नवंबर तक जेल में रहेंगे
लखीमपुर खीरी। तिकुनिया कांड में मंगलवार को जूडिशियल कस्टडी पूरी होने पर पहली बार एक साथ तेरह हत्यारोपी सीजेएम अदालत में पेश हुए, जिन्हें अगले 14 दिन यानी 16 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
विवेचक विद्याराम दिवाकर की ओर से केस डायरी पेश करते हुए बताया गया कि अभी जांच पूरी नहीं हो सकी है। इसलिए पंद्रह दिनों के लिए जूडिशियल कस्टडी अवधि बढ़ा दी जाए। इस पर सीजेएम चिंताराम ने सभी तेरह हत्याभियुक्तों की जूडिशियल कस्टडी 16 नवंबर तक आगे बढ़ाते हुए विवेचक को जांच करने के लिए अधिकृत किया है।
अब इस मामले में आशीष पांडेय और लवकुश राना आशीष मिश्र मोनू अंकित दास, सभासद सुमित जायसवाल, नंदन सिंह बिष्ट, सत्यम त्रिपाठी, शिशुपाल धर्मेंद्र सिंह, रिंकू राणा, मोहित त्रिवेदी, लतीफ उर्फ काले, और शेखर भारती को 16 नंवबर के लिए जेल में रखने के लिए सीजेएम ने आदेशित किया है। हालांकि आशीष पांडेय, लवकुश और आशीष मिश्र मोनू की जमानत अर्जी पर सुनवाई तीन नवंबर को जिला जज मुकेश मिश्र की अदालत में लगी हुई है, जिस पर बहस होने की पूरी उम्मीद है। इसलिए आज की जमानत अर्जी पर होने वाले फैसले पर भी लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं।
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पेश हो सकते हैं परिवादी के वकील
प्रदर्शनकारी किसानों पर गाड़ी चढ़ाकर मौत के घाट उतारने के मामले में रिपोर्ट दर्ज कराने वाले फरियादी ने सीजेएम कोर्ट में हाजिर होकर मोहम्मद ख्वाजा सहित तीन अधिवक्ताओं को वकील नियुक्त करते हुए अपना वकालतनामा तो दाखिल कराया था, लेकिन अभी तक जिला जज की कोर्ट में अभियोजन की ओर से डीजीसी अरविंद त्रिपाठी ही पैरवी कर रहे हैं, जिस तरह मंगलवार को एसआईटी ने सभी रिपोर्ट्स पूरी करते हुए फाइनल बहस कराने के मूड में दीख रही है, वहीं कयास लग रहे है कि पीड़ित के अधिवक्ता अलग से हाजिर होकर अपना वकालतनामा भी दाखिल कर सकते है, अगर ऐसा होता है तो जमानत सुनवाई एक बार फिर टलने की संभावना बढ़ सकती है।
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लखीमपुर खीरी। तिकुनिया कांड में मंगलवार को जूडिशियल कस्टडी पूरी होने पर पहली बार एक साथ तेरह हत्यारोपी सीजेएम अदालत में पेश हुए, जिन्हें अगले 14 दिन यानी 16 नवंबर तक न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।
विवेचक विद्याराम दिवाकर की ओर से केस डायरी पेश करते हुए बताया गया कि अभी जांच पूरी नहीं हो सकी है। इसलिए पंद्रह दिनों के लिए जूडिशियल कस्टडी अवधि बढ़ा दी जाए। इस पर सीजेएम चिंताराम ने सभी तेरह हत्याभियुक्तों की जूडिशियल कस्टडी 16 नवंबर तक आगे बढ़ाते हुए विवेचक को जांच करने के लिए अधिकृत किया है।
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अब इस मामले में आशीष पांडेय और लवकुश राना आशीष मिश्र मोनू अंकित दास, सभासद सुमित जायसवाल, नंदन सिंह बिष्ट, सत्यम त्रिपाठी, शिशुपाल धर्मेंद्र सिंह, रिंकू राणा, मोहित त्रिवेदी, लतीफ उर्फ काले, और शेखर भारती को 16 नंवबर के लिए जेल में रखने के लिए सीजेएम ने आदेशित किया है। हालांकि आशीष पांडेय, लवकुश और आशीष मिश्र मोनू की जमानत अर्जी पर सुनवाई तीन नवंबर को जिला जज मुकेश मिश्र की अदालत में लगी हुई है, जिस पर बहस होने की पूरी उम्मीद है। इसलिए आज की जमानत अर्जी पर होने वाले फैसले पर भी लोगों की निगाहें टिकी हुई हैं।
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पेश हो सकते हैं परिवादी के वकील
प्रदर्शनकारी किसानों पर गाड़ी चढ़ाकर मौत के घाट उतारने के मामले में रिपोर्ट दर्ज कराने वाले फरियादी ने सीजेएम कोर्ट में हाजिर होकर मोहम्मद ख्वाजा सहित तीन अधिवक्ताओं को वकील नियुक्त करते हुए अपना वकालतनामा तो दाखिल कराया था, लेकिन अभी तक जिला जज की कोर्ट में अभियोजन की ओर से डीजीसी अरविंद त्रिपाठी ही पैरवी कर रहे हैं, जिस तरह मंगलवार को एसआईटी ने सभी रिपोर्ट्स पूरी करते हुए फाइनल बहस कराने के मूड में दीख रही है, वहीं कयास लग रहे है कि पीड़ित के अधिवक्ता अलग से हाजिर होकर अपना वकालतनामा भी दाखिल कर सकते है, अगर ऐसा होता है तो जमानत सुनवाई एक बार फिर टलने की संभावना बढ़ सकती है।