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बाघिन की अब तक नहीं हो सकी शिनाख्त
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tigeress death
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बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन की मैलानी रेंज जंगल से सटे एक खेत में एक माह पहले मृत पाई गई बाघिन की अभी तक शिनाख्त नहीं हो पाई है। भारतीय वन्यजीव संस्थान ( डब्लूआईआई) के तमाम रिकार्ड खंगालने के बाद भी उसकी धारियों का मिलान रिकार्ड में दर्ज किसी भी बाघिन से नहीं हुआ है। ऐसे में वन विभाग इस बात को लेकर ऊहापोह की स्थिति में है कि आखिर इस बाघिन का मूल प्राकृतवास कहां था।
तमाम प्रयासों के बाद भी बाघिन की शिनाख्त न हो पाने की स्थित में अब मानव-बाघ संघर्ष पर नियंत्रण के लिए इधर-उधर लगाए गए कैमरों में ट्रैप हुई तस्वीरों से मिलान की कोशिशें की जा रही हैं। हालांकि अभी तक ये कोशिशें भी कारगर नहीं हो सकी हैं। इसी साल 21 जून को मैलानी रेंज के छेदीपुर गांव के पास एक बाघ ने हमलाकर एक ही परिवार के तीन लोगों को घायल कर दिया था। इस बाघ की लोकेशन जानने के लिए इलाके में कई जोड़ी कैमरे लगाए गए थे। इनमें से एक कैमरे में एक बाघिन की तस्वीर भी कैद हुई थी। उस तस्वीर से इस बाघिन की धारियों का जब मिलान कराया गया, तो यह धारियां भी मैच नहीं हो सकी। इससे इसकी पहचान की संभावनाएं क्षीण हो गई हैं।
इसी साल जून माह में मैलानी रेंज जंगल से सटे छेदीपुर गांव के एक ही परिवार के तीन लोगों पर हमला करने वाले बाघ की लोकेशन पता लगाने के लिए कैमरे लगाए गए थे। उसमें ट्रैप हुई बाघिन की एक तस्वीर से मृत बाघिन की तस्वीर का मिलान किया गया तो वह भी मैच नहीं हुई। इससे मृत बाघिन की पहचान का संकट बना हुआ है।
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- डॉ अनिल कुमार पटेल, उपनिदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व, बफरजोन।
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तमाम प्रयासों के बाद भी बाघिन की शिनाख्त न हो पाने की स्थित में अब मानव-बाघ संघर्ष पर नियंत्रण के लिए इधर-उधर लगाए गए कैमरों में ट्रैप हुई तस्वीरों से मिलान की कोशिशें की जा रही हैं। हालांकि अभी तक ये कोशिशें भी कारगर नहीं हो सकी हैं। इसी साल 21 जून को मैलानी रेंज के छेदीपुर गांव के पास एक बाघ ने हमलाकर एक ही परिवार के तीन लोगों को घायल कर दिया था। इस बाघ की लोकेशन जानने के लिए इलाके में कई जोड़ी कैमरे लगाए गए थे। इनमें से एक कैमरे में एक बाघिन की तस्वीर भी कैद हुई थी। उस तस्वीर से इस बाघिन की धारियों का जब मिलान कराया गया, तो यह धारियां भी मैच नहीं हो सकी। इससे इसकी पहचान की संभावनाएं क्षीण हो गई हैं।
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इसी साल जून माह में मैलानी रेंज जंगल से सटे छेदीपुर गांव के एक ही परिवार के तीन लोगों पर हमला करने वाले बाघ की लोकेशन पता लगाने के लिए कैमरे लगाए गए थे। उसमें ट्रैप हुई बाघिन की एक तस्वीर से मृत बाघिन की तस्वीर का मिलान किया गया तो वह भी मैच नहीं हुई। इससे मृत बाघिन की पहचान का संकट बना हुआ है।
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- डॉ अनिल कुमार पटेल, उपनिदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व, बफरजोन।