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साल भर होता रहा मानव-बाघ संघर्ष गन्ने के खेतों में ठिकाना बना रहे बाघ
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बांकेगंज। दुधवा टाइगर रिजर्व से बाहर आ रहे बाघों ने गन्ने के खेतों को अपना ठिकाना बनाया है। इससे मानव और बाघों के बीच संघर्ष की घटनाएं भी बढ़ रही हैं।
दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन की मैलानी,भीरा, रेंज के अलावा दक्षिण निघासन, उत्तर निघासन, मझगईं, पलिया, संपूर्णानगर और दक्षिण खीरी वन प्रभाग के महेशपुर और गोला रेंज से सटे इलाके में गन्ने के खेतों में ठिकाना बनाए बाघ किसानों के लिए मुसीबत बनते जा रहे हैं। साल के अंत में शनिवार रात गेहूं फसल की रखवाली रहे युवक पर बाघ हमले की घटना के बाद वन विभाग सकते में हैं।
करीब छह साल से जिला खीरी में जंगल से सटे इलाके मानव-बाघ संघर्ष की घटनाओं से जूझ रहे थे। इस दौरान बाघ हमलों में करीब 25 लोगों की जान गई आर 30 से अधिक लोग घायल हुए। साल 2019 में दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन क्षेत्र में तिकुनियां में बाघ ने किसान को मार डाला तो ईसानगर क्षेत्र में तेंदुए ने बच्चे को घायल किया।
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वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. वीपी सिंह कहते कि बाघों का सबसे पसंदीदा प्राकृतिक आवास नरकुल की ऊंची-ऊंची घास होती है। नरकुल की घास और गन्ने के खेतों में खास फर्क नहीं होता। गन्ने की फसल तैयार होने पर बड़ी संख्या में शाकाहारी और मांसाहारी वन्यजीव आ जाते हैं। इससे बाघों को अपना पसंदीदा भोजन जंगल से ज्यादा खेतों में मिलता है।
ममरी क्षेत्र में दिसंबर माह में हुए बाघ के हमलों पर एक नजर
6 दिसंबर : बाघ ने सांड़ को बनाया निवाला। वन रक्षक श्यामकिशोर बाल बाल बचे।
8 दिसंबर: बाघ ने बकरी को बनाया निवाला। हमले में बचा बरसेला का अंकित (14)
19 दिसंबर : बाघ ने चकिया में सांड़ को बनाया निवाला
23 दिसंबर : बाघ के हमले में बचा अमरीका गांव निवासी संतोष कुमार
26 दिसंबर : बाघ ने नरसिंहपुर में बछड़े को बनाया निवाला
यह है बाघों का मेटिंग सीजन
सर्दियां शुरू होते ही बाघों का मेटिंग सीजन शुरू हो जाता है जो दिसंबर और जनवरी तक चलता है। बाघ एक शर्मीला जानवर होता है। मेटिंग के लिए वह नरकुल के जंगल या गन्ने के खेतों को चुनता है। चूंकि बाघ इस समय जोड़े में रहता है इसलिए इस सीजन में हमले भी बढ़ जाते हैं।
-डॉ वीपी सिंह, वन्यजीव विशेषज्ञ
बाघों की लोकेशन पर नजर रखने के लिए जंगल के बाहरी किनारों पर भी कैमरे लगवाएं जाएंगे। दुधवा टाइगर रिजर्व में ग्रासलैंड का वैज्ञानिक ढंग से प्रबंधन किया जा रहा है, ताकि बाघों के जंगल के बाहर से निकलने की स्थिति ही न पैदा हो। इसके अलावा भीरा रेंज की बरूआ बीट गिरदा गौढ़ी में बाघ के हमले में युवक दिनेश को वन विभाग की ओर से नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा। ग्रामीणों से अपील है कि वे वन्यजीवों के हमलों से बचाव के लिए जंगल के अंदर न जाएं।
-संजय पाठक, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व
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दुधवा टाइगर रिजर्व बफर जोन की मैलानी,भीरा, रेंज के अलावा दक्षिण निघासन, उत्तर निघासन, मझगईं, पलिया, संपूर्णानगर और दक्षिण खीरी वन प्रभाग के महेशपुर और गोला रेंज से सटे इलाके में गन्ने के खेतों में ठिकाना बनाए बाघ किसानों के लिए मुसीबत बनते जा रहे हैं। साल के अंत में शनिवार रात गेहूं फसल की रखवाली रहे युवक पर बाघ हमले की घटना के बाद वन विभाग सकते में हैं।
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करीब छह साल से जिला खीरी में जंगल से सटे इलाके मानव-बाघ संघर्ष की घटनाओं से जूझ रहे थे। इस दौरान बाघ हमलों में करीब 25 लोगों की जान गई आर 30 से अधिक लोग घायल हुए। साल 2019 में दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन क्षेत्र में तिकुनियां में बाघ ने किसान को मार डाला तो ईसानगर क्षेत्र में तेंदुए ने बच्चे को घायल किया।
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वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. वीपी सिंह कहते कि बाघों का सबसे पसंदीदा प्राकृतिक आवास नरकुल की ऊंची-ऊंची घास होती है। नरकुल की घास और गन्ने के खेतों में खास फर्क नहीं होता। गन्ने की फसल तैयार होने पर बड़ी संख्या में शाकाहारी और मांसाहारी वन्यजीव आ जाते हैं। इससे बाघों को अपना पसंदीदा भोजन जंगल से ज्यादा खेतों में मिलता है।
ममरी क्षेत्र में दिसंबर माह में हुए बाघ के हमलों पर एक नजर
6 दिसंबर : बाघ ने सांड़ को बनाया निवाला। वन रक्षक श्यामकिशोर बाल बाल बचे।
8 दिसंबर: बाघ ने बकरी को बनाया निवाला। हमले में बचा बरसेला का अंकित (14)
19 दिसंबर : बाघ ने चकिया में सांड़ को बनाया निवाला
23 दिसंबर : बाघ के हमले में बचा अमरीका गांव निवासी संतोष कुमार
26 दिसंबर : बाघ ने नरसिंहपुर में बछड़े को बनाया निवाला
यह है बाघों का मेटिंग सीजन
सर्दियां शुरू होते ही बाघों का मेटिंग सीजन शुरू हो जाता है जो दिसंबर और जनवरी तक चलता है। बाघ एक शर्मीला जानवर होता है। मेटिंग के लिए वह नरकुल के जंगल या गन्ने के खेतों को चुनता है। चूंकि बाघ इस समय जोड़े में रहता है इसलिए इस सीजन में हमले भी बढ़ जाते हैं।
-डॉ वीपी सिंह, वन्यजीव विशेषज्ञ
बाघों की लोकेशन पर नजर रखने के लिए जंगल के बाहरी किनारों पर भी कैमरे लगवाएं जाएंगे। दुधवा टाइगर रिजर्व में ग्रासलैंड का वैज्ञानिक ढंग से प्रबंधन किया जा रहा है, ताकि बाघों के जंगल के बाहर से निकलने की स्थिति ही न पैदा हो। इसके अलावा भीरा रेंज की बरूआ बीट गिरदा गौढ़ी में बाघ के हमले में युवक दिनेश को वन विभाग की ओर से नियमानुसार मुआवजा दिया जाएगा। ग्रामीणों से अपील है कि वे वन्यजीवों के हमलों से बचाव के लिए जंगल के अंदर न जाएं।
-संजय पाठक, फील्ड डायरेक्टर, दुधवा टाइगर रिजर्व