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भदरकुंड बना बाघ के जोड़े का ठिकाना
अमर उजाला ब्यूरो बांकेगंज।
Updated Mon, 27 Nov 2017 10:39 PM IST
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टाइगर
- फोटो : SELF
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ग्रामीणों ने बाघ-बाघिन को एक साथ चहलकदमी करते देखा
बोले वन्यजीव विशेषज्ञ- यह जगह हमेशा बाघों के प्रणय के लिए पसंदीदा जगह रही है
दुधवा टाइगर रिजर्व की जटपुरा बीट में बरौछा नाले के भदरकुंड को इन दिनों एक बाघ के जोड़े ने बपना ठिकाना बना लिया है। राहगीरों और खेतों में काम करने वाले ग्रामीणों ने सोमवार दोपहर इस जोड़े को धूप सेंकते और साथ-साथ चहलकदमी करते देखा है।
वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ वीपी सिंह ने बताया कि इन दिनों बाघों की मीटिंग का सीजन चल रहा है। भदरकुंड हमेशा से बाघों के प्रणय के लिए पसंदीदा जगह रही है। बरौंछा नाले में हमेशा रहने वाला पानी और आसपास नरकुल की झाड़ियां बाघों को अनुकूल वातावरण प्रदान करती है। मीटिंग के लिए अक्सर बाघों के जोडे़ इस स्थान का चयन करते हैं। यही नहीं जब बाघिन का बच्चे को जन्म देने का समय होता है, तब भी यह स्थान उनके लिए उपयुक्त रहता है। पूरे साल यहां बाघ-बाघिन और उनके शावकों का बसेरा रहता है, लेकिन पिछले चार-पांच दिनों से यहां बाघों का जोड़ा दिखने से लोगों में दहशत है।
इसी जगह पर ढाका गांव के निकट दो दिन पहले किसी जानवर ने कुत्ते का शिकार किया था। इससे लोगों ने अनुमान लगाया है कि इसी इलाके में कहीं तेंदुआ भी सक्रिय है। भदरकुंड इलाके से सटी जमीनों में खेतीबाड़ी करने वाले किसान जटपुरा प्रधान कुलवंत सिंह कक्की, हरदुआ प्रधान रामकिशुन, जगतार सिंह, हैप्पी सिंह, गोल्डी गोयल, मोहम्मद जाबिर, संदीप सिंह आदि ने बताया कि पिछले बाघ का जोड़ा कई दिनों से इस इलाके में सक्रिय है। सारी रात रुक-रुक कर दहाड़ने की आवाजें सुनाई देती है, जिससे लोग दहशत में हैं।
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मैलानी रेंज के भदरकुंड में पूरे साल बाघों का बसेरा रहता है। बाघों की मीटिंग और बच्चा देने के लिए यह सबसे अनुकूल स्थान है। इन दिनों बाघों की मीटिंग का सीजन चल रहा है। ऐसी स्थित में यहां बाघ के जोड़े की मौजूदगी संभावित है।
- डीएस यादव, रेंजर मैलानी।
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बोले वन्यजीव विशेषज्ञ- यह जगह हमेशा बाघों के प्रणय के लिए पसंदीदा जगह रही है
दुधवा टाइगर रिजर्व की जटपुरा बीट में बरौछा नाले के भदरकुंड को इन दिनों एक बाघ के जोड़े ने बपना ठिकाना बना लिया है। राहगीरों और खेतों में काम करने वाले ग्रामीणों ने सोमवार दोपहर इस जोड़े को धूप सेंकते और साथ-साथ चहलकदमी करते देखा है।
वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ वीपी सिंह ने बताया कि इन दिनों बाघों की मीटिंग का सीजन चल रहा है। भदरकुंड हमेशा से बाघों के प्रणय के लिए पसंदीदा जगह रही है। बरौंछा नाले में हमेशा रहने वाला पानी और आसपास नरकुल की झाड़ियां बाघों को अनुकूल वातावरण प्रदान करती है। मीटिंग के लिए अक्सर बाघों के जोडे़ इस स्थान का चयन करते हैं। यही नहीं जब बाघिन का बच्चे को जन्म देने का समय होता है, तब भी यह स्थान उनके लिए उपयुक्त रहता है। पूरे साल यहां बाघ-बाघिन और उनके शावकों का बसेरा रहता है, लेकिन पिछले चार-पांच दिनों से यहां बाघों का जोड़ा दिखने से लोगों में दहशत है।
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इसी जगह पर ढाका गांव के निकट दो दिन पहले किसी जानवर ने कुत्ते का शिकार किया था। इससे लोगों ने अनुमान लगाया है कि इसी इलाके में कहीं तेंदुआ भी सक्रिय है। भदरकुंड इलाके से सटी जमीनों में खेतीबाड़ी करने वाले किसान जटपुरा प्रधान कुलवंत सिंह कक्की, हरदुआ प्रधान रामकिशुन, जगतार सिंह, हैप्पी सिंह, गोल्डी गोयल, मोहम्मद जाबिर, संदीप सिंह आदि ने बताया कि पिछले बाघ का जोड़ा कई दिनों से इस इलाके में सक्रिय है। सारी रात रुक-रुक कर दहाड़ने की आवाजें सुनाई देती है, जिससे लोग दहशत में हैं।
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मैलानी रेंज के भदरकुंड में पूरे साल बाघों का बसेरा रहता है। बाघों की मीटिंग और बच्चा देने के लिए यह सबसे अनुकूल स्थान है। इन दिनों बाघों की मीटिंग का सीजन चल रहा है। ऐसी स्थित में यहां बाघ के जोड़े की मौजूदगी संभावित है।
- डीएस यादव, रेंजर मैलानी।