{"_id":"584175cc4f1c1bb61fde83c8","slug":"thrilled-to-see-the-baby-birds-chirp","type":"story","status":"publish","title_hn":"मेहमान पक्षियों का कलरव देख रोमांचित हुए बच्चे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
मेहमान पक्षियों का कलरव देख रोमांचित हुए बच्चे
अमर उजाला ब्यूरो लखीमपुर खीरी।
Updated Fri, 02 Dec 2016 10:46 PM IST
विज्ञापन
bird
- फोटो : amar ujala
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
- बर्ड वाचिंग डे पर पक्षी प्रेमियों में दिखा उत्साह
- चार घंटों में जिले के 12 स्थलों पर देखे 2740 परिंदे
प्रदेश भर में मनाए जा रहे तीन दिवसीय पक्षी महोत्सव के तहत शुक्रवार को जिले भर में बर्ड वाचिंग डे मनाया गया। सैकड़ों स्कूली बच्चों ने जलाशयों पर जाकर रंग बिरंगे स्थानीय पक्षियों के साथ-साथ ठंडे देशों से आने वाले प्रवासी पक्षियों के कलरव का आनंद लिया। वन विभाग के अधिकारियों और पक्षी विशेषज्ञों ने बच्चों को पक्षियों के बारे में रोचक जानकारी दी। प्रकृति में पक्षियों के महत्व के बारे में विस्तार से बताया।
बर्ड वाचिंग प्रोग्राम के तहत शुक्रवार को जिले में सुबह छह बजे से 10 बजे तक कुल 855 बर्ड वाचरों ने 87 प्रजातियों के 2740 पक्षी देखकर उनकी रिपोर्टिंग की। इसमें दक्षिण खीरी वन प्रभाग के दक्षिण खीरी वन प्रभाग के छह स्थलों पर 495 बर्ड वाचरों ने 87 प्रजातियों के कुल 1487 पक्षी देखे। जबकि उत्तर खीरी वन प्रभाग के छह स्थलों पर 360 बर्ड वाचरों ने 78 प्रजातियों के कुल 1253 पक्षियों के देखे जाने की रिपोर्टिंग की है।
रजागंज। बर्ड वाचिंग का मुख्य कार्यक्रम संरक्षित वेटलैंड सेमरई झील में हुआ। यहां सुबह छह बजे ही विभिन्न स्कूलों के सैकड़ों बच्चे जमा हो गए। बच्चों ने विभिन्न प्रजातियों के रंग बिरंगे पक्षियों को देखकर अपनी जिज्ञासा विशेषज्ञों के सामने रखी। पक्षी विशेषज्ञ डॉ. वीपी सिंह और डीएफओ अखिलेश पांडेय ने बच्चों को पक्षियों के बारे में रोचक जानकारी देकर बच्चों की जिज्ञासा शांत की। रेंज अधिकारी मोहम्मदी एआर यादव भी मौजूद रहे।
विज्ञापन
बांकेगंज। मैलानी रेंज अंतर्गत नगरिया झील पर भी क्षेत्र के कस्तूरबा विद्यालय की बालिकाओं समेत विभिन्न स्कूल के सैकड़ों स्कूली बच्चों ने झील में तैरते और मंडराते पक्षियों का नजारा देखा। प्रशिक्षु आईएफएस अधिकारी दीक्षा भंडारी ने बच्चों को पक्षियों के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि प्रकृति की इस सबसे खूबसूरत कृति को बचाना हम सबका दायित्व है। यहां एसडीओ गोला आरएन मिश्र, रेज अधिकारी गोला उमेश चंद्र राय रेंजर मैलानी डीएस यादव समेत कई बर्ड वाचर्स मौजूद रहे।
पलियाकलां। बर्ड वाचिंग डे के तहत स्कूली बच्चों को दुधवा के अलग-अलग स्थानों पर ले जाकर दुर्लभ प्रजाति के पक्षियों का दीदार कराया गया। डीडी महावीर कौजलगि दुधवा वार्डन एमके श्रीवास्तव, बेलरायां वार्डन एनके उपाध्याय, किशनपुर वार्डन कल्पनाथ गौतम ने बच्चों को विस्तार से जानकारियां दीं। दुधवा टाइगर रिजर्व की दस रेंजों पर दस साइटों पर बच्चों को पक्षी दिखाए। बच्चों ने कॉमन होप, ब्लैक रेड स्टाई पेटेंट स्टॉर्क, बैक काइट, जंगल क्रो, लिटिल ईगरेट, डारटेड स्नेक बर्ड, व्हाइट ब्रेस्ड किंग फिशिर, इंडियन ग्रे हरनीबल जैसी कई प्रजातियों के पक्षियों को देखा और उनके बारे में जानकारी भी हासिल की। दुधवा टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर महावीर कौजलगि, दुधवा वार्डन एमके श्रीवास्तव, बेलरायां वार्डन एनके उपाध्याय, किशनपुर वार्डन कल्पनाथ गौतम आदि ने अलग-अलग दस साइटों पर स्कूली बच्चों को ले जाकर दुर्लभ प्रजाति के पक्षियों का दीदार कराया। इस दौरान कई स्कूली बच्चे मौजूद रहे।
बेलरायां। दुधवा टाइगर रिजर्व की बेलरायां रेंज अंतर्गत पुरैना ताल में कई स्कूली बच्चों ने बर्ड वाचिंग की। रेंज अधिकारी अशोक कश्यप और पक्षी विज्ञानी डॉ. पुष्पेंद्र ने प्रकृति में पक्षियों के महत्व और उपयोगिता की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पक्षी ग्लोबल वार्मिंग के कारण आए बदलाव की सूचक है। रेंजर अशोक कश्यप ने कहा पक्षी इंसानी जिंदगी के अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण प्राकृतिक उपहार है। बर्ड वाचिंग में अनुराग, मोहम्मद सद्दाम हुसैन एब्लान पब्लिक स्कूल निघासन सरस्वती विद्या मंदिर बेलापरसुआ के बच्चे मौजूद रहे।
धौरहरा। क्यों दूर हुई आंगन की गौरैया? क्यों लापता हुए पर्यावरण के दोस्त गिद्ध? किस तरह चिड़िया हैं इंसानों की दोस्त ऐसे कई सवालों का बच्चों को जवाब मिला शुक्रवार को वन विभाग के बर्ड वाचिंग कार्यक्रम में। रमियाबेहड़ ब्लाक के त्रिवेणी प्रसाद शुक्ल शिक्षा निकेतन के बच्चों ने वन विभाग के अफसरों के साथ भगहर झील के किनारे बर्ड वाचिंग कर रहे थे। इस मौके पर रेंजर एसएस यादव मौजूद रहे।
बर्ड वाचर्स को जलाशयों में दिखे यह प्रवासी पक्षी
बर्ड वाचर्स ने यूरोपीय और मध्य एशियायी देशों से आने वाले ब्राह्मनी डक, रेड क्रस्टेड पोचर्ड, कांब डक, ग्रीव, ब्लेक हेडेड ओरियोल, ब्लेक विल्ड स्टिल्ट, कामन मूरहेन, कामन विजन और पिलिकन आदि प्रवासी परिंदों को देखा। इन प्रवासी परिंदों के साथ स्थानीय परिंदों का अद्भुत मेलमिलाप भी बच्चों ने देखा।
विज्ञापन
- चार घंटों में जिले के 12 स्थलों पर देखे 2740 परिंदे
प्रदेश भर में मनाए जा रहे तीन दिवसीय पक्षी महोत्सव के तहत शुक्रवार को जिले भर में बर्ड वाचिंग डे मनाया गया। सैकड़ों स्कूली बच्चों ने जलाशयों पर जाकर रंग बिरंगे स्थानीय पक्षियों के साथ-साथ ठंडे देशों से आने वाले प्रवासी पक्षियों के कलरव का आनंद लिया। वन विभाग के अधिकारियों और पक्षी विशेषज्ञों ने बच्चों को पक्षियों के बारे में रोचक जानकारी दी। प्रकृति में पक्षियों के महत्व के बारे में विस्तार से बताया।
बर्ड वाचिंग प्रोग्राम के तहत शुक्रवार को जिले में सुबह छह बजे से 10 बजे तक कुल 855 बर्ड वाचरों ने 87 प्रजातियों के 2740 पक्षी देखकर उनकी रिपोर्टिंग की। इसमें दक्षिण खीरी वन प्रभाग के दक्षिण खीरी वन प्रभाग के छह स्थलों पर 495 बर्ड वाचरों ने 87 प्रजातियों के कुल 1487 पक्षी देखे। जबकि उत्तर खीरी वन प्रभाग के छह स्थलों पर 360 बर्ड वाचरों ने 78 प्रजातियों के कुल 1253 पक्षियों के देखे जाने की रिपोर्टिंग की है।
विज्ञापन
रजागंज। बर्ड वाचिंग का मुख्य कार्यक्रम संरक्षित वेटलैंड सेमरई झील में हुआ। यहां सुबह छह बजे ही विभिन्न स्कूलों के सैकड़ों बच्चे जमा हो गए। बच्चों ने विभिन्न प्रजातियों के रंग बिरंगे पक्षियों को देखकर अपनी जिज्ञासा विशेषज्ञों के सामने रखी। पक्षी विशेषज्ञ डॉ. वीपी सिंह और डीएफओ अखिलेश पांडेय ने बच्चों को पक्षियों के बारे में रोचक जानकारी देकर बच्चों की जिज्ञासा शांत की। रेंज अधिकारी मोहम्मदी एआर यादव भी मौजूद रहे।
विज्ञापन
बांकेगंज। मैलानी रेंज अंतर्गत नगरिया झील पर भी क्षेत्र के कस्तूरबा विद्यालय की बालिकाओं समेत विभिन्न स्कूल के सैकड़ों स्कूली बच्चों ने झील में तैरते और मंडराते पक्षियों का नजारा देखा। प्रशिक्षु आईएफएस अधिकारी दीक्षा भंडारी ने बच्चों को पक्षियों के संबंध में जानकारी देते हुए बताया कि प्रकृति की इस सबसे खूबसूरत कृति को बचाना हम सबका दायित्व है। यहां एसडीओ गोला आरएन मिश्र, रेज अधिकारी गोला उमेश चंद्र राय रेंजर मैलानी डीएस यादव समेत कई बर्ड वाचर्स मौजूद रहे।
पलियाकलां। बर्ड वाचिंग डे के तहत स्कूली बच्चों को दुधवा के अलग-अलग स्थानों पर ले जाकर दुर्लभ प्रजाति के पक्षियों का दीदार कराया गया। डीडी महावीर कौजलगि दुधवा वार्डन एमके श्रीवास्तव, बेलरायां वार्डन एनके उपाध्याय, किशनपुर वार्डन कल्पनाथ गौतम ने बच्चों को विस्तार से जानकारियां दीं। दुधवा टाइगर रिजर्व की दस रेंजों पर दस साइटों पर बच्चों को पक्षी दिखाए। बच्चों ने कॉमन होप, ब्लैक रेड स्टाई पेटेंट स्टॉर्क, बैक काइट, जंगल क्रो, लिटिल ईगरेट, डारटेड स्नेक बर्ड, व्हाइट ब्रेस्ड किंग फिशिर, इंडियन ग्रे हरनीबल जैसी कई प्रजातियों के पक्षियों को देखा और उनके बारे में जानकारी भी हासिल की। दुधवा टाइगर रिजर्व के डिप्टी डायरेक्टर महावीर कौजलगि, दुधवा वार्डन एमके श्रीवास्तव, बेलरायां वार्डन एनके उपाध्याय, किशनपुर वार्डन कल्पनाथ गौतम आदि ने अलग-अलग दस साइटों पर स्कूली बच्चों को ले जाकर दुर्लभ प्रजाति के पक्षियों का दीदार कराया। इस दौरान कई स्कूली बच्चे मौजूद रहे।
बेलरायां। दुधवा टाइगर रिजर्व की बेलरायां रेंज अंतर्गत पुरैना ताल में कई स्कूली बच्चों ने बर्ड वाचिंग की। रेंज अधिकारी अशोक कश्यप और पक्षी विज्ञानी डॉ. पुष्पेंद्र ने प्रकृति में पक्षियों के महत्व और उपयोगिता की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पक्षी ग्लोबल वार्मिंग के कारण आए बदलाव की सूचक है। रेंजर अशोक कश्यप ने कहा पक्षी इंसानी जिंदगी के अस्तित्व के लिए महत्वपूर्ण प्राकृतिक उपहार है। बर्ड वाचिंग में अनुराग, मोहम्मद सद्दाम हुसैन एब्लान पब्लिक स्कूल निघासन सरस्वती विद्या मंदिर बेलापरसुआ के बच्चे मौजूद रहे।
धौरहरा। क्यों दूर हुई आंगन की गौरैया? क्यों लापता हुए पर्यावरण के दोस्त गिद्ध? किस तरह चिड़िया हैं इंसानों की दोस्त ऐसे कई सवालों का बच्चों को जवाब मिला शुक्रवार को वन विभाग के बर्ड वाचिंग कार्यक्रम में। रमियाबेहड़ ब्लाक के त्रिवेणी प्रसाद शुक्ल शिक्षा निकेतन के बच्चों ने वन विभाग के अफसरों के साथ भगहर झील के किनारे बर्ड वाचिंग कर रहे थे। इस मौके पर रेंजर एसएस यादव मौजूद रहे।
बर्ड वाचर्स को जलाशयों में दिखे यह प्रवासी पक्षी
बर्ड वाचर्स ने यूरोपीय और मध्य एशियायी देशों से आने वाले ब्राह्मनी डक, रेड क्रस्टेड पोचर्ड, कांब डक, ग्रीव, ब्लेक हेडेड ओरियोल, ब्लेक विल्ड स्टिल्ट, कामन मूरहेन, कामन विजन और पिलिकन आदि प्रवासी परिंदों को देखा। इन प्रवासी परिंदों के साथ स्थानीय परिंदों का अद्भुत मेलमिलाप भी बच्चों ने देखा।