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सीजेएम मर्डर केस में तीन को उम्रकैद

Fri, 09 Sep 2022 01:15 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Fri, 09 Sep 2022 01:15 AM IST
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Three get life imprisonment in CJM murder case
Three get life imprisonment in CJM murder case
27 जनवरी 2001 को लूटपाट के दौरान हुआ था मर्डर
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लखीमपुर खीरी। 21 साल पुराने एक मामले में लूटपाट के दौरान जिले के सीजेएम बालक राम की गोली मारकर हत्या करने के केस में एडीजे अनिल यादव ने तीन बदमाशों को उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही बीस हजार रुपये जुर्माना लगाया है।
अभियोजन पक्ष रखते हुए एडीजीसी रमा रमन सैनी ने बताया कि जिले के सीजेएम बालक राम 26 जनवरी का उत्सव मनाने के बाद फर्रुखाबाद गए हुए थे। वहां से 26/27 जनवरी 2001 की रात वापस चले थे। सुबह चार बजे मितौली-बेहजम रोड पर शिवाला क्रसर के पास बदमाशों ने सीजेएम की गाड़ी रोक ली थी और लूटपाट के दौरान जब सीजेएम बालक राम ने अपनी लाइसेंसी रिवाल्वर निकालनी चाही तभी बदमाशों ने तमंचे से उन्हें गोली मार दी थी। बाद में बदमाशों ने गाड़ी में सवार वकील राजीव अवस्थी से 50000 रुपये, सीजेएम की जेब से 3000 रुपये, रामचंद्र शाह की जेब से 26500 रुपये व ड्राइवर राम सिंह यादव की जेब से 322 रुपये लूट लिए थे।
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बदमाशों ने घड़ी, चेन और अंगूठियां भी लूटी थीं। लूटपाट होने के बाद जब ड्राइवर सिकंदराबाद और कैमहरा होते हुए जिला अस्पताल पहुंचा तो डॉक्टरों ने सीजेएम बालकराम को मृत घोषित कर दिया था। नीमगांव पुलिस ने ग्राम करनपुर निवासी रामलखन और दिलीप कुमार मितौली थाना क्षेत्र के निवासी श्यामू सिंह, खुरई नीमगांव के प्रेमपाल सिंह को लूटपाट के माल सहित गिरफ्तार किया था। मुकदमे की सुनवाई के दौरान ही लूटपाट के आरोपी दिलीप कुमार की मौत हो गई थी। पुलिस ने तफ्तीश करते हुए एससी एसटी एक्ट सहित लूटपाट और हत्या के मामले में आरोप पत्र दाखिल किया था।
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अदालती सुनवाई के बाद एडीजे अनिल यादव ने बृहस्पतिवार को अपना फैसला सुनाते हुए रामलखन, श्यामू सिंह और प्रेमपाल को हत्यायुक्त लूटपाट के लिए उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही तीनों आरोपियों पर बीस हजार रुपये जुर्माना लगाया है।

जज को इंसाफ मिलने में लग गए 21 साल
लखीमपुर खीरी। जिले के मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट बालकराम की हत्या के मामले पुलिस ने तफ्तीश करते हुए बदमाशों को लूटे गए सामान और घटना में प्रयुक्त तमंचे के साथ गिरफ्तार किया था, लेकिन कई अनसुलझे सवाल भी पीछे छूट गए थे। पुलिस के आरोप पत्र पर तत्कालीन सीजेएम ने फाइल 2001 में ही कमिट कर दी थी, जिसके बाद चले अदालती दांवपेंच के खेल और तारीखों पर तारीख पढ़ते हुए कब 21 साल से अधिक समय गुजर गया किसी को याद ही न रहा। मगर हैरत है कि एक जज को इंसाफ पाते पाते 21 साल गुजर गए। संवाद
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