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दल बदलुवों के लिए इस बार आसान नहीं चुनावी डगर
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Neta Ji
- फोटो : Social media
निघासन में सपा-बसपा दोनों ने उतारे दल बदलू उम्मीदवार
मोहम्मदी में सपा तो श्रीनगर में बसपा प्रत्याशी हैं दलबदलू
लखीमपुर खीरी। सपा और बसपा ने इस विधानसभा चुनाव में जिले की कुछ सीटों पर दूसरी पार्टियां छोड़कर आए लोगों को उम्मीदवार बनाया है, लेकिन इन उम्मीदवारों के सामने उसी दल के लोग चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं।
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने पांच दलबदलुओं को टिकट दिया था। पिछले चुनाव में भाजपा लहर के चलते इन सभी उम्मीदवारों ने शानदार जीत हासिल की थी, लेकिन इस बार किसी पार्टी के पक्ष में ऐसी कोई लहर नहीं दिख रही है। जिले में इस बार दल बदलुओं के लिए इस बार चुनावी डगर आसान नहीं होगी।
विधानसभा क्षेत्र निघासन में बहुजन समाज पार्टी ने पूर्व घोषित उम्मीदवार मनमोहन मौर्य का टिकट काटकर सपा छोड़कर बसपा में शामिल हुए आरए उस्मानी को टिकट दिया है। आरए उस्मानी इससे पहले श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र से सपा टिकट पर चुनाव लड़कर विधायक बने थे।
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2012 के चुनाव में वह निघासन क्षेत्र से ही सपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे, लेकिन उन्हें भाजपा उम्मीदवार अजय कुमार मिश्र टेनी के मुकाबले हार का सामना करना पड़ा था। 2012 के चुनाव में आरए उस्मानी 43966 वोट पा सके थे, जबकि भाजपा के अजय मिश्र टेनी को 75005 वोट मिले थे। इस तरह 31039 वोटों से उनकी हार हुई थी। उस समय मुस्लिम वोटों का रुझान सपा की ओर था। मुस्लिम वोटों का रुझान इस बार भी सपा के साथ है, लेकिन आरए उस्मानी सपा में न होकर बसपा में हैं। ऐसे में आरए उस्मानी को मुस्लिम वोटों में सेंध लगाना बहुत बड़ी चुनौती होगी।
इसी विधानसभा क्षेत्र से सपा ने भी बसपा छोड़कर सपा में शामिल होने वाले आरएस कुशवाहा को अपना उम्मीदवार बनाया है। आरएस कुशवाहा भी वर्ष 2002 में निघासन विधानसभा क्षेत्र से बसपा के टिकट पर चुनाव जीत कर विधायक बने थे। इस तरह निघासन क्षेत्र के लिए आर एस कुशवाहा और आरए उस्मानी का राजनीतिक इतिहास तकरीबन एक जैसा है। इस बार आरए उस्मानी की मुस्लिम वोटों में सेंधमारी बसपा उम्मीदवार आर एस कुशवाहा के लिए बड़ी चुनौती होगी। दलबदल करने वाले यह दोनों उम्मीदवार एक दूसरे की चुनावी डगर को मुश्किल बनाएंगे।
मोहम्मदी में सपा ने उतारे दल-बदलू प्रत्याशी
मोहम्मदी विधानसभा क्षेत्र में कुछ निघासन जैसी स्थिति नजर आ रही है। यहां समाजवादी पार्टी ने बसपा छोड़कर शामिल हुए दाउद अहमद को अपना उम्मीदवार बनाया है। दाउद अहमद इससे पहले मोहम्मदी विधानसभा क्षेत्र से 2017 में बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे, लेकिन हार गए थे। इस चुनाव में विजयी रहे भाजपा उम्मीदवार लोकेंद्र प्रताप सिंह को 93000 वोट मिले थे। कांग्रेस के संजय शर्मा 59082 वोट पाकर दूसरे स्थान पर और बसपा के दाउद अहमद 57902 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे। इस बार बसपा ने मोहम्मदी से दाउद अहमद के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी इलियास आजमी के बेटे शकील सिद्दीकी को चुनाव मैदान में उतारा है। शकील सिद्दीकी मुस्लिम वोटों में गहरी सेंधमारी कर सपा प्रत्याशी दाउद अहमद की चुनावी राह को मुश्किल बना रहे हैं।
श्रीनगर में बसपा प्रत्याशी हैं दलबदलू
श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र में बसपा ने चुनाव से कुछ पहले ही सपा छोड़कर आईं मीरा बानो को अपना उम्मीदवार बनाया है। मीरा बानो श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र से ही वर्ष 2017 में चुनाव लड़ चुकी हैं। पिछले चुनाव में मीरा बानो यहां दूसरे स्थान पर रहीं थीं। विजयी भाजपा की मंजू त्यागी को उस चुनाव में 112941 वोट मिले थे, जबकि मीरा बानो 58002 वोट पा सकी थीं। बसपा प्रत्याशी प्रवीण कुमार 44757 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे। इस बार मीरा बानो का मुकाबला दो बार विधायक रहे सपा के रामसरन और एक बार की विधायक रहीं भाजपा की मंजू त्यागी से है। यहां से कांग्रेस ने भी महिला उम्मीदवार चांदनी को अपना उम्मीदवार बनाया है। मीरा बानो और चांदनी दोनों ही मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखती हैं। इस तरह मुस्लिम वोटों का बंटवारा सपा, बसपा और कांग्रेस के बीच होने से मीरा बानो की राह में मुश्किलें खड़ी हो रही हैं।
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मोहम्मदी में सपा तो श्रीनगर में बसपा प्रत्याशी हैं दलबदलू
लखीमपुर खीरी। सपा और बसपा ने इस विधानसभा चुनाव में जिले की कुछ सीटों पर दूसरी पार्टियां छोड़कर आए लोगों को उम्मीदवार बनाया है, लेकिन इन उम्मीदवारों के सामने उसी दल के लोग चुनौतियां खड़ी कर रहे हैं।
वर्ष 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने पांच दलबदलुओं को टिकट दिया था। पिछले चुनाव में भाजपा लहर के चलते इन सभी उम्मीदवारों ने शानदार जीत हासिल की थी, लेकिन इस बार किसी पार्टी के पक्ष में ऐसी कोई लहर नहीं दिख रही है। जिले में इस बार दल बदलुओं के लिए इस बार चुनावी डगर आसान नहीं होगी।
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विधानसभा क्षेत्र निघासन में बहुजन समाज पार्टी ने पूर्व घोषित उम्मीदवार मनमोहन मौर्य का टिकट काटकर सपा छोड़कर बसपा में शामिल हुए आरए उस्मानी को टिकट दिया है। आरए उस्मानी इससे पहले श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र से सपा टिकट पर चुनाव लड़कर विधायक बने थे।
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2012 के चुनाव में वह निघासन क्षेत्र से ही सपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे, लेकिन उन्हें भाजपा उम्मीदवार अजय कुमार मिश्र टेनी के मुकाबले हार का सामना करना पड़ा था। 2012 के चुनाव में आरए उस्मानी 43966 वोट पा सके थे, जबकि भाजपा के अजय मिश्र टेनी को 75005 वोट मिले थे। इस तरह 31039 वोटों से उनकी हार हुई थी। उस समय मुस्लिम वोटों का रुझान सपा की ओर था। मुस्लिम वोटों का रुझान इस बार भी सपा के साथ है, लेकिन आरए उस्मानी सपा में न होकर बसपा में हैं। ऐसे में आरए उस्मानी को मुस्लिम वोटों में सेंध लगाना बहुत बड़ी चुनौती होगी।
इसी विधानसभा क्षेत्र से सपा ने भी बसपा छोड़कर सपा में शामिल होने वाले आरएस कुशवाहा को अपना उम्मीदवार बनाया है। आरएस कुशवाहा भी वर्ष 2002 में निघासन विधानसभा क्षेत्र से बसपा के टिकट पर चुनाव जीत कर विधायक बने थे। इस तरह निघासन क्षेत्र के लिए आर एस कुशवाहा और आरए उस्मानी का राजनीतिक इतिहास तकरीबन एक जैसा है। इस बार आरए उस्मानी की मुस्लिम वोटों में सेंधमारी बसपा उम्मीदवार आर एस कुशवाहा के लिए बड़ी चुनौती होगी। दलबदल करने वाले यह दोनों उम्मीदवार एक दूसरे की चुनावी डगर को मुश्किल बनाएंगे।
मोहम्मदी में सपा ने उतारे दल-बदलू प्रत्याशी
मोहम्मदी विधानसभा क्षेत्र में कुछ निघासन जैसी स्थिति नजर आ रही है। यहां समाजवादी पार्टी ने बसपा छोड़कर शामिल हुए दाउद अहमद को अपना उम्मीदवार बनाया है। दाउद अहमद इससे पहले मोहम्मदी विधानसभा क्षेत्र से 2017 में बसपा के टिकट पर चुनाव लड़े थे, लेकिन हार गए थे। इस चुनाव में विजयी रहे भाजपा उम्मीदवार लोकेंद्र प्रताप सिंह को 93000 वोट मिले थे। कांग्रेस के संजय शर्मा 59082 वोट पाकर दूसरे स्थान पर और बसपा के दाउद अहमद 57902 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे। इस बार बसपा ने मोहम्मदी से दाउद अहमद के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी इलियास आजमी के बेटे शकील सिद्दीकी को चुनाव मैदान में उतारा है। शकील सिद्दीकी मुस्लिम वोटों में गहरी सेंधमारी कर सपा प्रत्याशी दाउद अहमद की चुनावी राह को मुश्किल बना रहे हैं।
श्रीनगर में बसपा प्रत्याशी हैं दलबदलू
श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र में बसपा ने चुनाव से कुछ पहले ही सपा छोड़कर आईं मीरा बानो को अपना उम्मीदवार बनाया है। मीरा बानो श्रीनगर विधानसभा क्षेत्र से ही वर्ष 2017 में चुनाव लड़ चुकी हैं। पिछले चुनाव में मीरा बानो यहां दूसरे स्थान पर रहीं थीं। विजयी भाजपा की मंजू त्यागी को उस चुनाव में 112941 वोट मिले थे, जबकि मीरा बानो 58002 वोट पा सकी थीं। बसपा प्रत्याशी प्रवीण कुमार 44757 वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे। इस बार मीरा बानो का मुकाबला दो बार विधायक रहे सपा के रामसरन और एक बार की विधायक रहीं भाजपा की मंजू त्यागी से है। यहां से कांग्रेस ने भी महिला उम्मीदवार चांदनी को अपना उम्मीदवार बनाया है। मीरा बानो और चांदनी दोनों ही मुस्लिम समुदाय से ताल्लुक रखती हैं। इस तरह मुस्लिम वोटों का बंटवारा सपा, बसपा और कांग्रेस के बीच होने से मीरा बानो की राह में मुश्किलें खड़ी हो रही हैं।