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चार ब्लाकों में बनेंगे खेल स्टेडियम
लखीमपुर खीरी
Updated Fri, 28 Aug 2015 10:48 PM IST
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युवा प्रतिभाओं को खेल के मैदान में निखारने में सबसे बड़ी बाधा थी स्टेडियम। काफी हद तक अब यह बाधा दूर हो गई है। जुलाई 2014 से लटके पड़े राजीव गांधी खेल अभियान के प्रस्ताव को मंजूरी मिल गई है। जिसके बाद जिले के पलिया ब्लाक के विशेनपुरी, मितौली के नवोदय विद्यालय, गोला देहात और रमियाबेहड़ के रामनगर बगहा में छह से सात एकड़ में स्टेडियम निर्माण का रास्ता साफ हो गया है।
ब्लाक स्तर बनने वाले स्टेडियम के निर्माण में एक करोड़ 60 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। जिसमें 60 लाख रुपये राजीव गांधी खेल अभियान के अंतर्गत मिलेगा, जबकि 60 लाख रुपये ब्लाकों से मनरेगा के तहत खर्च किए जाएंगे। स्टेडियम में युवा प्रतिभाओं को विभिन्न खेलों में निखारने के लिए एक मुख्य प्रशिक्षक, एक महिला प्रशिक्षक और एक पुरुष प्रशिक्षक रखा जाएगा। इसके अलावा अन्य सहयोगी भी रहेंगे और युवाओं को खेल सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी। स्टेडियम बनाने की मंजूरी मिलने को जिले के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि इससे पहले कभी भी ब्लाक स्तर स्टेडियम निर्माण पहल नहीं की गई थी।
इन ब्लाकों में तलाशी जा रही जमीन
राजीव गांधी खेल अभियान के तहत जिले के आठ ब्लाकों में स्टेडियम के निर्माण का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन बांकेगंज, निघासन, धौरहरा और मोहम्मदी में जमीन की कमी आड़े आ रही है। अब जगहों पर छह-सात एकड़ जमीन एकमुश्त नहीं मिल पा रही है। इसलिए अब इन ब्लाकों में एकमुश्त चार एकड़ जमीन की तलाश की जा रही है। जमीन मिलने पर अगले वर्ष यहां स्टेडियम का निर्माण कराया जाएगा।
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इनकी वजह से मिल पाई स्टेडियम के लिए जमीन
जिले में स्टेडियम निर्माण के लिए जिला युवा कल्याण अधिकारी एनयू खान का प्रयास काफी सराहनीय रहा। मई 2015 में जिले में तैनाती होने के बाद इन्होंने स्टेडियम निर्माण के लिए डीएम, सीडीओ, एसडीएम, तहसीलदार समेत हर स्तर पर संपर्क कर स्टेडियम के लिए जगह उपलब्ध कराने का प्रयास किया। इनकी कोशिश रंग भी लाई और चार ब्लाकों में स्टेडियम के लिए जमीन उपलब्ध हो सकी।
लखीमपुर स्टेडियम में प्रशिक्षक की कमी बड़ी समस्या
युवाओं के लिए लखीमपुर शहर से सटे लालपुर स्टेडियम बना है। कुछ वर्ष पहले इस स्टेडियम सिर्फ नाम भर का था, लेकिन अब यहां स्वीमिंग पुल, बैडमिंटन हाल, 400 मीटर का ट्रैक, वॉलीबाल, हॉकी, फुलबाल हैंडबाल खेलों के लिए ओपेन ग्राउंड आदि की व्यवस्था है। स्टेडियम में खेल सामग्री भी उपलब्ध कराई जा रही है। लेकिन प्रशिक्षक के अभाव में यहां युवा प्रतिभाएं नहीं निखर पा रही हैं। जिला क्रीड़ा अधिकारी प्रदीप सिंह चौहान भी प्रशिक्षकों की कमी से आहत हैं कहते हैं अगर विभिन्न खेलों के प्रशिक्षक उपलब्ध हो जाएं तो युवा प्रतिभाओं को निखरने का मौका मिलेगा।
कॉलेजों के प्रशिक्षक भी नहीं देते ध्यान
क्रीड़ा अधिकारी के मुताबिक जिले के इंटर कॉलेजों में नियुक्त प्रशिक्षक सिर्फ औपचारिकता निभा रहे हैं। कॉलेजों में न तो युवाओं को खेल सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है और न ही उन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसकी वजह से युवा प्रतिभाएं नहीं निखर पा रही हैं।
पंचायतों में खेल मैदानों पर कब्जे से बढ़ी दिक्कत
जिले की ग्राम पंचायतों में पाइका योजना के तहत खेल मैदान बनाने और प्रशिक्षक रखने की योजना धरी की धरी रह गई। जिले में मौजूदा 995 ग्राम पंचायतों में सिर्फ दो सौ पंचायतों में ही खेल मैदान के लिए जमीन मिल पाई थी, अब वहां भी खेल मैदानों पर दबंगों ने कब्जा कर रखा है।
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ब्लाक स्तर बनने वाले स्टेडियम के निर्माण में एक करोड़ 60 लाख रुपये खर्च किए जाएंगे। जिसमें 60 लाख रुपये राजीव गांधी खेल अभियान के अंतर्गत मिलेगा, जबकि 60 लाख रुपये ब्लाकों से मनरेगा के तहत खर्च किए जाएंगे। स्टेडियम में युवा प्रतिभाओं को विभिन्न खेलों में निखारने के लिए एक मुख्य प्रशिक्षक, एक महिला प्रशिक्षक और एक पुरुष प्रशिक्षक रखा जाएगा। इसके अलावा अन्य सहयोगी भी रहेंगे और युवाओं को खेल सामग्री भी उपलब्ध कराई जाएगी। स्टेडियम बनाने की मंजूरी मिलने को जिले के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है, क्योंकि इससे पहले कभी भी ब्लाक स्तर स्टेडियम निर्माण पहल नहीं की गई थी।
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इन ब्लाकों में तलाशी जा रही जमीन
राजीव गांधी खेल अभियान के तहत जिले के आठ ब्लाकों में स्टेडियम के निर्माण का लक्ष्य रखा गया था, लेकिन बांकेगंज, निघासन, धौरहरा और मोहम्मदी में जमीन की कमी आड़े आ रही है। अब जगहों पर छह-सात एकड़ जमीन एकमुश्त नहीं मिल पा रही है। इसलिए अब इन ब्लाकों में एकमुश्त चार एकड़ जमीन की तलाश की जा रही है। जमीन मिलने पर अगले वर्ष यहां स्टेडियम का निर्माण कराया जाएगा।
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इनकी वजह से मिल पाई स्टेडियम के लिए जमीन
जिले में स्टेडियम निर्माण के लिए जिला युवा कल्याण अधिकारी एनयू खान का प्रयास काफी सराहनीय रहा। मई 2015 में जिले में तैनाती होने के बाद इन्होंने स्टेडियम निर्माण के लिए डीएम, सीडीओ, एसडीएम, तहसीलदार समेत हर स्तर पर संपर्क कर स्टेडियम के लिए जगह उपलब्ध कराने का प्रयास किया। इनकी कोशिश रंग भी लाई और चार ब्लाकों में स्टेडियम के लिए जमीन उपलब्ध हो सकी।
लखीमपुर स्टेडियम में प्रशिक्षक की कमी बड़ी समस्या
युवाओं के लिए लखीमपुर शहर से सटे लालपुर स्टेडियम बना है। कुछ वर्ष पहले इस स्टेडियम सिर्फ नाम भर का था, लेकिन अब यहां स्वीमिंग पुल, बैडमिंटन हाल, 400 मीटर का ट्रैक, वॉलीबाल, हॉकी, फुलबाल हैंडबाल खेलों के लिए ओपेन ग्राउंड आदि की व्यवस्था है। स्टेडियम में खेल सामग्री भी उपलब्ध कराई जा रही है। लेकिन प्रशिक्षक के अभाव में यहां युवा प्रतिभाएं नहीं निखर पा रही हैं। जिला क्रीड़ा अधिकारी प्रदीप सिंह चौहान भी प्रशिक्षकों की कमी से आहत हैं कहते हैं अगर विभिन्न खेलों के प्रशिक्षक उपलब्ध हो जाएं तो युवा प्रतिभाओं को निखरने का मौका मिलेगा।
कॉलेजों के प्रशिक्षक भी नहीं देते ध्यान
क्रीड़ा अधिकारी के मुताबिक जिले के इंटर कॉलेजों में नियुक्त प्रशिक्षक सिर्फ औपचारिकता निभा रहे हैं। कॉलेजों में न तो युवाओं को खेल सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है और न ही उन्हें प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिसकी वजह से युवा प्रतिभाएं नहीं निखर पा रही हैं।
पंचायतों में खेल मैदानों पर कब्जे से बढ़ी दिक्कत
जिले की ग्राम पंचायतों में पाइका योजना के तहत खेल मैदान बनाने और प्रशिक्षक रखने की योजना धरी की धरी रह गई। जिले में मौजूदा 995 ग्राम पंचायतों में सिर्फ दो सौ पंचायतों में ही खेल मैदान के लिए जमीन मिल पाई थी, अब वहां भी खेल मैदानों पर दबंगों ने कब्जा कर रखा है।