{"_id":"5f3432b68ebc3e9ff3777977","slug":"there-is-always-a-bloody-sight-of-poachers-on-tigers-roaming-the-fields-lakhimpur-news-bly41607287","type":"story","status":"publish","title_hn":"खेतों में घूमने वाले बाघ-बाघिन पर हमेशा रही है शिकारियों की खूनी नजर","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
खेतों में घूमने वाले बाघ-बाघिन पर हमेशा रही है शिकारियों की खूनी नजर
विज्ञापन
बांकेगंज (लखीमपुर खीरी)। दुधवा टाइगर रिजर्व जंगल से सटे इलाके बाघों और अन्य वन्यजीवों का सुरक्षित शिकारगाह बनते जा रहे हैं। कई बार पकड़े गए शिकारियों से पूछताछ में इस तथ्य का खुलासा भी हो चुका है। मैलानी रेंज में बरौंछा नाला और उसके आसपास का क्षेत्र बाघों का पसंदीदा प्राकृतिवास है। इसलिए इस जगह पर शिकारी अपनी घातक नजर हमेशा गड़ाए रखते हैं।
दो साल पहले खटीमा में पकड़े गए तीन शिकारियों से जब पूछताछ की गई तो यह बात सामने आई कि उन्होंने बरौंछा नाले के पास अर्जुन जंगल में बाघ का शिकार किया था और उसकी खाल, दांत, हड्डियां आदि बेचने के प्रयास में थे। मंगलवार को बाघिन का शव जिस खेत में मिला वह भी बांकेगंज से सटे बरौंछा नाले के पास ही है। बाघिन के शव और उसके गले में पड़े मजबूत प्लास्टिक की रस्सी के फंदे से यह बात तो साफ है कि बाघिन को फंदे में फंसाकर शिकार किया गया था। यह बात अलग है कि बाघिन जीवित रहते ही शिकारियों के चंगुल से छूटकर तीन-चार दिन तक इधर-उधर भटकती रही, आखिर में उसकी मौत हो गई। ग्रामीणों के देखे जाने से पहले यदि शिकारियों की नजर बाघिन के शव पर पड़ जाती तो शव भी मिलना मुश्किल हो जाता।
डीटीआर बफरजोन की मैलानी रेंज जंगल से सटा इलाका अब भी शिकार की दृष्टि से काफी संवेदनशील है। इस इलाके में इससे पहले भी कई बार खाबड़ लगाकर बाघों के शिकार की कोशिश की जा चुकी है। संभव है कि कई बाघों का शिकार हुआ भी हो, लेकिन घटना सामने न आने पर स्पष्ट रूप से कुछ कहा नहीं जा सकता।
विज्ञापन
पिछले साल जहर देकर मारी गई बाघिन का मिला था शव
वर्ष 2019 के जुलाई माह में नहर में उतराता हुआ एक बाघिन का शव पानी के बहाव के साथ गोला रेंज के बिझौली गांव के पास तक पहुंच गया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद जब उसकी विसरा जांच की गई तो उसमें आर्गेनोफॉस्फेट नामक तीव्र जहर का अंश पाया गया था। इससे दो साल पहले ही दिल्ली में एक अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्कर गिरफ्तार किया गया था। उसके पास भी बाघ की हड्डियां और खाल बरामद हुई थी। उसके तार भी खीरी से जुड़े थे।
अंतरराष्ट्रीय तस्कर स्थानीय लोगों से कराते हैं शिकार
अंतरराष्ट्रीय शिकारी और वन्यजीव अंग तस्कर स्थानीय लोगों का शिकार करने के लिए इस्तेमाल करते हैं। स्थानीय लोगों से यह शातिर तस्कर मामूली पैसे देकर बाघ और तेंदुओं का शिकार कराते हैं। यही लोग खाल, हड्डियां, दांत, मूंछ के बाल आदि निकाल कर चोरी-छिपे तस्करों तक पहुंचा देते हैं। जहां वे इन कीमती अंगों की सप्लाई विदेशों में करते हैं।
गंभीरता से जांच नहीं हुई तो दब जाएगा मामला
बांकेगंज से सटे हरदुआ गांव के पास खेत में बाघिन शव मिलने के मामले में डीटीआर प्रशासन सभी पहलुओं पर जांच करने का दावा कर रहा है। यदि इस मामले की सतही जांच हुई तो शिकार की इस नई शैली का खुलासा कर पाना मुश्किल हो जाएगा।
शिकार और अन्य वन अपराधों को रोकने के लिए डीटीआर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। बाघिन की मौत की जांच गहनता से की जा रही है, और हर हाल में अपराधियों को पकड़ा जाएगा।
- डॉ अनिल कुमार पटेल, डीडी, डीटीआर, बफरजोन
विज्ञापन
दो साल पहले खटीमा में पकड़े गए तीन शिकारियों से जब पूछताछ की गई तो यह बात सामने आई कि उन्होंने बरौंछा नाले के पास अर्जुन जंगल में बाघ का शिकार किया था और उसकी खाल, दांत, हड्डियां आदि बेचने के प्रयास में थे। मंगलवार को बाघिन का शव जिस खेत में मिला वह भी बांकेगंज से सटे बरौंछा नाले के पास ही है। बाघिन के शव और उसके गले में पड़े मजबूत प्लास्टिक की रस्सी के फंदे से यह बात तो साफ है कि बाघिन को फंदे में फंसाकर शिकार किया गया था। यह बात अलग है कि बाघिन जीवित रहते ही शिकारियों के चंगुल से छूटकर तीन-चार दिन तक इधर-उधर भटकती रही, आखिर में उसकी मौत हो गई। ग्रामीणों के देखे जाने से पहले यदि शिकारियों की नजर बाघिन के शव पर पड़ जाती तो शव भी मिलना मुश्किल हो जाता।
विज्ञापन
डीटीआर बफरजोन की मैलानी रेंज जंगल से सटा इलाका अब भी शिकार की दृष्टि से काफी संवेदनशील है। इस इलाके में इससे पहले भी कई बार खाबड़ लगाकर बाघों के शिकार की कोशिश की जा चुकी है। संभव है कि कई बाघों का शिकार हुआ भी हो, लेकिन घटना सामने न आने पर स्पष्ट रूप से कुछ कहा नहीं जा सकता।
विज्ञापन
पिछले साल जहर देकर मारी गई बाघिन का मिला था शव
वर्ष 2019 के जुलाई माह में नहर में उतराता हुआ एक बाघिन का शव पानी के बहाव के साथ गोला रेंज के बिझौली गांव के पास तक पहुंच गया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट के बाद जब उसकी विसरा जांच की गई तो उसमें आर्गेनोफॉस्फेट नामक तीव्र जहर का अंश पाया गया था। इससे दो साल पहले ही दिल्ली में एक अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्कर गिरफ्तार किया गया था। उसके पास भी बाघ की हड्डियां और खाल बरामद हुई थी। उसके तार भी खीरी से जुड़े थे।
अंतरराष्ट्रीय तस्कर स्थानीय लोगों से कराते हैं शिकार
अंतरराष्ट्रीय शिकारी और वन्यजीव अंग तस्कर स्थानीय लोगों का शिकार करने के लिए इस्तेमाल करते हैं। स्थानीय लोगों से यह शातिर तस्कर मामूली पैसे देकर बाघ और तेंदुओं का शिकार कराते हैं। यही लोग खाल, हड्डियां, दांत, मूंछ के बाल आदि निकाल कर चोरी-छिपे तस्करों तक पहुंचा देते हैं। जहां वे इन कीमती अंगों की सप्लाई विदेशों में करते हैं।
गंभीरता से जांच नहीं हुई तो दब जाएगा मामला
बांकेगंज से सटे हरदुआ गांव के पास खेत में बाघिन शव मिलने के मामले में डीटीआर प्रशासन सभी पहलुओं पर जांच करने का दावा कर रहा है। यदि इस मामले की सतही जांच हुई तो शिकार की इस नई शैली का खुलासा कर पाना मुश्किल हो जाएगा।
शिकार और अन्य वन अपराधों को रोकने के लिए डीटीआर प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद है। बाघिन की मौत की जांच गहनता से की जा रही है, और हर हाल में अपराधियों को पकड़ा जाएगा।
- डॉ अनिल कुमार पटेल, डीडी, डीटीआर, बफरजोन