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Lakhimpur Kheri News: मोहम्मदी-गोला रेंज में भी हैं करीब 20 बाघ
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मोहम्मदी रंज जंगल में मौजूद बाघ।
बांकेगंज। भारत सरकार ने टाइगर एस्टीमेशन 2022 का विस्तृत परिणाम घोषित कर दिया है। इसके मुताबिक बाघों के लिए संरक्षित दुधवा टाइगर रिजर्व में 153 बाघ होने का अनुमान लगाया गया है। जबकि डीटीआर से अलग दक्षिण खीरी वन प्रभाग की मोहम्मदी और गोला रेंज में भी 20 बाघों की मौजूदगी है। इसे गणना में शामिल किया गया है या नहीं, यह स्पष्ट नहीं है।
इनमें सबसे ज्यादा मोहम्मदी रेंज में बताए जाते हैं। बाघों के हमलों की घटनाओं के बाद बाघों की लोकेशन ट्रेस करने के लिए लगाए गए कैमरों में इस बात की पुष्टि पहले भी हो चुकी है। यह अलग बात है कि इनमें से कुछ बाघ बफरजोन की मैलानी रेंज तक आते-जाते रहते हैं। हालांकि, अधिकांश बाघ मोहम्मदी रेंज के जंगल में कठिना नदी के किनारे और जंगल से सटी आबादी के बीच खेतों में ठिकाना बनाए हुए हैं।
दक्षिण खीरी वन प्रभाग की मोहम्मदी और गोला रेंज को दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन में भले ही शामिल न किया गया हो लेकिन ये दोनों रेंज बाघ बहुल मानी जा रही हैं। हलांकि अभी इन दोनों रेंज को तराई एलिफैंट रिजर्व में शामिल कर लिया गया है।
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दक्षिण खीरी वन प्रभाग की मोहम्मदी और गोला रेंज में बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है। दुधवा टाइगर रिजर्व में होने वाले बाघ एस्टीमेशन के साथ दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मोहम्मदी और गोला रेंज में भी कैमरे लगाकर एस्टीमेशन किया जाता है।
-संजय बिस्वाल, डीएफओ, दक्षिण खीरी वन प्रभाग।
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इनमें सबसे ज्यादा मोहम्मदी रेंज में बताए जाते हैं। बाघों के हमलों की घटनाओं के बाद बाघों की लोकेशन ट्रेस करने के लिए लगाए गए कैमरों में इस बात की पुष्टि पहले भी हो चुकी है। यह अलग बात है कि इनमें से कुछ बाघ बफरजोन की मैलानी रेंज तक आते-जाते रहते हैं। हालांकि, अधिकांश बाघ मोहम्मदी रेंज के जंगल में कठिना नदी के किनारे और जंगल से सटी आबादी के बीच खेतों में ठिकाना बनाए हुए हैं।
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दक्षिण खीरी वन प्रभाग की मोहम्मदी और गोला रेंज को दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन में भले ही शामिल न किया गया हो लेकिन ये दोनों रेंज बाघ बहुल मानी जा रही हैं। हलांकि अभी इन दोनों रेंज को तराई एलिफैंट रिजर्व में शामिल कर लिया गया है।
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दक्षिण खीरी वन प्रभाग की मोहम्मदी और गोला रेंज में बाघों की संख्या लगातार बढ़ रही है। दुधवा टाइगर रिजर्व में होने वाले बाघ एस्टीमेशन के साथ दक्षिण खीरी वन प्रभाग के मोहम्मदी और गोला रेंज में भी कैमरे लगाकर एस्टीमेशन किया जाता है।
-संजय बिस्वाल, डीएफओ, दक्षिण खीरी वन प्रभाग।